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छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई |
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई |

निक नाही लागे अब त घरवा अंगनवा,
तोहई के खोजे घूमि चारो और मनवा |
कवनी खोतवा में लूकाय गईलू चिरई |
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चिरई |

रोवेलिन भौजी देखा, रोवे महतारी |
बाबू जी आ भैया बईठी रोवेलन दुवारी |
सबसे पिरितिया छोडाय गईलू चिरई |
छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई |

बाछी के कहाई अब सोना के कहाई |
इहे राग धईके देखा रोवत बानी मई |
नयना के लोरवा सुखवाय गईलू चिरई |
छोड़ के पिजरवा पराय गईलू चिरई |

भौजी के बबुनी आ भैया के मोटकी |
प्यार से बोलावें कहिके बाबू जी ऐ छोटकी |
काहे कुलही नामवा भूलाय गईलू चीरई |
सबहीं के सनेहिया भूलाय गईलू चीरई |

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Replies to This Discussion

Bahut hi sundar kavita hai. My wife can speak and understand Bhojpuri, she read it for me and explained. Beti ke chale jaane ke baad ki stithi ko bahut achhe se ukera ya Yadav ji ne. Meri aur se abhivadan sweekar karein.

Dharmender sharma
धरम सर, i can't speak that how am i happy. aap ko aapki patni ji ne iska matlab samjhaya mai unka bhi shukragujaar hu| mujhe bahut khushi hai ki aap logo ko meri ye rachna pasand aayi|
आशीष भाई बहुत ही नीक गीत रौआ प्रस्तुत कईले बानी, बहुत बहुत बधाई एह बरियार रचना खातिर |
बागी जी बहुत बहुत धन्यवाद| हमके बहुत प्रसन्नता भईल ई जान के की आप के हमार ई रचना पसंद आइल| आप लोग आपन आशीर्वाद बना के राखी, हम आगे भी कोशिश करत रहब|
Bahut badhiya kavita ba. ekdam mati ke sonha khoshboo se bharpoor aa bhojpuri kalewar mein laptayil.  Bahut bahut badhayee.
एतना बढीया रचना खातिर बधाई स्वीकार करीं आशीष भाई

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