For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,

जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर नव-हस्ताक्षरों, के लिए अपनी कलम की धार को और भी तीक्ष्ण करने का अवसर प्रदान करता है. इसी क्रम में प्रस्तुत है :

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-117 

विषय - "रोटी"

आयोजन अवधि- 11 जुलाई 2020, दिन शनिवार से 12 जुलाई 2020, दिन रविवार की समाप्ति तक अर्थात कुल दो दिन.

ध्यान रहे : बात बेशक छोटी हो लेकिन ’घाव करे गंभीर’ करने वाली हो तो पद्य- समारोह का आनन्द बहुगुणा हो जाए. आयोजन के लिए दिये विषय को केन्द्रित करते हुए आप सभी अपनी मौलिक एवं अप्रकाशित रचना पद्य-साहित्य की किसी भी विधा में स्वयं द्वारा लाइव पोस्ट कर सकते हैं. साथ ही अन्य साथियों की रचना पर लाइव टिप्पणी भी कर सकते हैं.

उदाहरण स्वरुप पद्य-साहित्य की कुछ विधाओं का नाम सूचीबद्ध किये जा रहे हैं --

तुकांत कविता, अतुकांत आधुनिक कविता, हास्य कविता, गीत-नवगीत, ग़ज़ल, नज़्म, हाइकू, सॉनेट, व्यंग्य काव्य, मुक्तक, शास्त्रीय-छंद जैसे दोहा, चौपाई, कुंडलिया, कवित्त, सवैया, हरिगीतिका आदि.

अति आवश्यक सूचना :-

रचनाओं की संख्या पर कोई बन्धन नहीं है. किन्तु, एक से अधिक रचनाएँ प्रस्तुत करनी हों तो पद्य-साहित्य की अलग अलग विधाओं अथवा अलग अलग छंदों में रचनाएँ प्रस्तुत हों.
रचना केवल स्वयं के प्रोफाइल से ही पोस्ट करें, अन्य सदस्य की रचना किसी और सदस्य द्वारा पोस्ट नहीं की जाएगी.
रचनाकारों से निवेदन है कि अपनी रचना अच्छी तरह से देवनागरी के फॉण्ट में टाइप कर लेफ्ट एलाइन, काले रंग एवं नॉन बोल्ड टेक्स्ट में ही पोस्ट करें.
रचना पोस्ट करते समय कोई भूमिका न लिखें, सीधे अपनी रचना पोस्ट करें, अंत में अपना नाम, पता, फोन नंबर, दिनांक अथवा किसी भी प्रकार के सिम्बल आदि भी न लगाएं.
प्रविष्टि के अंत में मंच के नियमानुसार केवल "मौलिक व अप्रकाशित" लिखें.
नियमों के विरुद्ध, विषय से भटकी हुई तथा अस्तरीय प्रस्तुति को बिना कोई कारण बताये तथा बिना कोई पूर्व सूचना दिए हटाया जा सकता है. यह अधिकार प्रबंधन-समिति के सदस्यों के पास सुरक्षित रहेगा, जिस पर कोई बहस नहीं की जाएगी.
सदस्यगण बार-बार संशोधन हेतु अनुरोध न करें, बल्कि उनकी रचनाओं पर प्राप्त सुझावों को भली-भाँति अध्ययन कर संकलन आने के बाद संशोधन हेतु अनुरोध करें. सदस्यगण ध्यान रखें कि रचनाओं में किन्हीं दोषों या गलतियों पर सुझावों के अनुसार संशोधन कराने को किसी सुविधा की तरह लें, न कि किसी अधिकार की तरह.

आयोजनों के वातावरण को टिप्पणियों के माध्यम से समरस बनाये रखना उचित है. लेकिन बातचीत में असंयमित तथ्य न आ पायें इसके प्रति टिप्पणीकारों से सकारात्मकता तथा संवेदनशीलता अपेक्षित है.

इस तथ्य पर ध्यान रहे कि स्माइली आदि का असंयमित अथवा अव्यावहारिक प्रयोग तथा बिना अर्थ के पोस्ट आयोजन के स्तर को हल्का करते हैं.

रचनाओं पर टिप्पणियाँ यथासंभव देवनागरी फाण्ट में ही करें. अनावश्यक रूप से स्माइली अथवा रोमन फाण्ट का उपयोग न करें. रोमन फाण्ट में टिप्पणियाँ करना, एक ऐसा रास्ता है जो अन्य कोई उपाय न रहने पर ही अपनाया जाय.

फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो - 11 जुलाई 2020, दिन शनिवार लगते ही खोल दिया जायेगा।

यदि आप किसी कारणवश अभी तक ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार से नहीं जुड़ सके है तो www.openbooksonline.com पर जाकर प्रथम बार sign up कर लें.

महा-उत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"OBO लाइव महा उत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" के पिछ्ले अंकों को पढ़ने हेतु यहाँ क्लिक करें

मंच संचालक
ई. गणेश जी बाग़ी 
(संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम परिवार

Views: 560

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

 

श्री सतविन्दर कुमार राणा, आपने ज़हमत की और अलग- अलग विधाओं मे लिखी हुई प्रस्तुतियों की पड़ताल की और उन्हें अनुशंसा योगय पाया, इसके लिए हृदय से आपका आभार व्यक्त करता हूँ ! वन्दे !

आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । विषयानुकूल बढ़िया हाइकू और कुण्डलिया सृजित हुए हैं। हार्ददिक बधाई।

22 22 22 22
क्या क्या होता रोटी खातिर
दौड़े भूखा रोटी खातिर।1

लट्ठ लिए जो पहरा देता,
वह भी जगता रोटी खातिर।2

पेट पीठ का मेल दिखाता,
भिक्षुक आता रोटी खातिर।3

शीश महल में शील बिका क्यूं?
बस इक अदना रोटी खातिर।4

सोन चिरैया कैद हुई,फिर
उतरा गहना रोटी खातिर।5

जो बातें मन मान न सकता
माना कहना रोटी खातिर।6

मुजरिम को मैं क्यूं पहचानूं?
बस पहचाना रोटी खातिर।7

ढेर ' लुटेरे ' बांट रहे हैं,
तुम भी आना रोटी खातिर।8
" मौलिक व अप्रकाशित" 

आ. भाई मनन जी, विषयानुरूप उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

आभार आदरणीय लक्ष्मण भाई जी।

आदरणीय मनन कुमार जी, प्रदत्त विषय पर अति सुंदर रचना के लिए बधाई स्वीकार करें।

आभार आदरणीय दयाराम जी।

आदरणीय मनन जी, सादर नमन, विषयानुरूप बेहतरीन गजल हुई है।

आभार आदरणीय सतविंदर भाई।

रोटियाँ
बहर :- 122*3+ 12 (शक्ति छंद आधारित)

लगे ऐंठने आँत जब भूख से,
क्षुधा शांत तब ये करें रोटियाँ।।
लखे बाट सब ही विकल हो बड़े,
तवे पे न जब तक पकें रोटियाँ।।

तुम्हारे लिए पाप होतें सभी,
तुम्हारी कमी ना सहन हो कभी।
रहे म्लान मुख थाल में तुम न हो,
सभी बात मन की कहें रोटियाँ।।

भजन हो न जब पेट खाली रहे,
सभी मान अपमान भूखा सहे।
नहीं काम में मन लगे तुम बिना,
किसी की न कुछ भी सुनें रोटियाँ।।

तुम्हीं से चले आज व्यापार सब,
तुम्हारे बिना चैन हो प्राप्त कब।
जगत की रही एक चाहत यही,
लगे भूख जब भी मिलें रोटियाँ।।

अगर भूख जग को सताती नहीं,
न होता लहू का खराबा कहीं।
'नमन' ईश तुझसे यही प्रार्थना,
हरिक थाल में नित सजें रोटियाँ।।

आदरणीय वासुदेव अग्रवाल जी,  प्रदत्त विषय पर सुंदर सर्जन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

आदरणीय दयाराम जी आपका अतीव आभार।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल
"आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ। उर्दू के…"
27 minutes ago
आशीष यादव commented on आशीष यादव's blog post उसने पी रखी है
"आदरणीय श्री लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, हौसला अफजाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।"
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आशीष यादव जी , हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रिया | "
1 hour ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post वक़्त ने हमसे मुसल्सल इस तरह की रंजिशें (११९ )
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , स्नेहिल सराहना के लिए दिली शुक्रिया एवं सादर…"
1 hour ago
Rupam kumar -'मीत''s blog post was featured

मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगता

बह्र- 1222×4मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगताकहाँ जाए कि अब ये दो जहाँ अच्छा नहीं लगता…See More
3 hours ago
Arif is now a member of Open Books Online
3 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

ग़ज़ल को सँवारा है इन दिनों.- ग़ज़ल

मापनी 221 2121 1221 212  हर आदमी ही वक्त का मारा है इन दिनों.  प्रभु के सिवा न कोई सहारा है इन…See More
3 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मौत की दस्तक है क्या...)
"जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल…"
6 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on आशीष यादव's blog post उसने पी रखी है
"आ. भाई आशीष जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
7 hours ago
Rupam kumar -'मीत' commented on Rupam kumar -'मीत''s blog post मियाँ हमको ज़मीन-ओ-आसमाँ अच्छा नहीं लगता
"आदरणीय आशीष यादव जी, बहुत नवाज़िश हौसला अफजाई का। "
7 hours ago
Madhu Passi 'महक' commented on Madhu Passi 'महक''s blog post राखी
"बृजेश कुमार 'ब्रज' जी लघुकथा तक आने के लिए बहुत बहुत आभार! आपके सुझाव पर ज़रूर ध्यान…"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on anjali gupta's blog post ग़ज़ल
"आ. अंजलि जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
7 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service