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आख़िरी आदमी (लघु-कथा) - डॉo विजय शंकर

भाषण अपने चरम पर था। विशाल जन - समूह पूरे मनोयोग से सुन रहा था।
उन्होंने कहा:

"भाइयों! पार्टी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण और उच्च पद रिक्त है, मैंने निर्णय लिया है कि यह पद हमारे साथियों में सबसे पीछे खड़े आख़िरी आदमी को दिया जाएगा " .
उनका वाक्य पूरा भी नहीं हुआ कि सब लोग पीछे की ओर भागने लगे। पूरा मैदान खाली हो गया, मंच खाली हो गया, वे मंच पर अकेले रह गए।
खबर आयी है , लोग एक और भागे जा रहे हैं , बस भागे जा रहे हैं।
.
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Dr. Vijai Shanker on August 22, 2016 at 7:07pm
आदरणीय विजय निकोर जी , रचना पर आपके आगमन एवं उसे स्वीकृति प्रदान करने के लिए आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by vijay nikore on August 22, 2016 at 4:04pm

बहुत ही खूबसूरत रचना के लिए बधाई, आदरणीय विजय शंकर जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 10:26pm
आदरणीय सुश्री नीता कसर जी , आख़िरी आदमी " कहानी के मूल तक पहुँच कर उसकी विवेचना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 10:26pm
आदरणीय सतविंद्र कुमार जी , " आख़िरी आदमी " कहानी के मूल तक पहुँच कर उसकी विवेचना के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Nita Kasar on August 13, 2016 at 8:57pm
अवसरवादिता का आलम देखिये कि भेडचाल मची हुई है आख़िरी आदमी बनने की सारगर्भित कथा के लिये बधाई आद०विजयशंकर जी ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on August 13, 2016 at 1:13pm
हा हा हा जब पद की चमक और चाह हो तो नेता को कौन सुनें।आगे आने की शर्त ही जब पीछे जाना हो तो कोई आगे क्योंकर रहे।गम्भीर सन्देश को सम्प्रेषित करती उम्दा। रचना।हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 12:17pm
आदरणीय डॉo गोपाल नारायण जी , बहुत बहुत आभासर एवम धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 12:16pm
आदरणीय सुश्री राहिला जी , लघु-कथा पर आपकी उन्मुक्त प्रशस्ति के लिए ह्रदय से आभार एवं धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 12:16pm
आदरणीय राजेन्द्र कुमार गौड़ जी , लघु-कथा पर आपकी सराहना के लिए ह्रदय से आभार और धन्यवाद , सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 13, 2016 at 12:11pm
आदरणीय वीरेंद्र वीर मेहता जी , लघु-कथा पर आपके विचारों और सराहना के लिए ह्रदय से आभार और धन्यवाद , प्रिय अनुज , सादर।

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