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Nita Kasar
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Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post घटते क़द (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"शिक्षा के घटते स्तर व इंटरनेट के बढते दख़लंदाज़ी पर कटु व्यंग्य करती कथा के लिये बधाई आद०शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Mar 13
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post विश्व महिला दिवस - लघुकथा –
"सार्थक सारगर्भित कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Mar 9
Nita Kasar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post उसकी ज़रूरत (लघुकथा)
"जीवन में एेसे क्षण व्यक्ति के क़दमों को डगमगाते है।पर बच्चे की सूरत सार्थक सोच की प्रेरणा देती है बधाई आपको आद० चंद्रेश छतलानी जी ।"
Mar 7
Nita Kasar commented on Rahila's blog post पर्दा(लघुकथा)राहिला
"पर्दे की ओट में भाभी नन्द के रिश्ते को ख़ूबसूरती से व्यक्त करती बढ़िया कथा है दिली बधाई प्रिय राहिला जी ।"
Mar 7
Nita Kasar commented on Dr T R Sukul's blog post लौकी (लघुकथा)
"सेठ जी की ओछी सोच का सुंदर प्रस्तुतीकरण ।शिष्य की नसीहत व दिलेरी सार्थक है बधाई आपको आद० टी आर शुक्ल जी ।"
Mar 7
Nita Kasar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"आदरणीय योगराज सर लघु कथा गोष्ठी के अंक 23 की सभी चुनिंदा रचनाओं के संकलन के लिए हार्दिक बधाई सादर। कथा मे कुछ सुधार कर प्रेषित है। "बहाव" "फिर क्या सोचा है? बेला,कुछ तो सोचा होगा" । "यही शादी और मैं रानी अपने पिया के घर…"
Mar 2
Nita Kasar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 में स्वीकृत लघुकथाएँ
"ओ बी ओ लघुकथा संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिये बहुत बहुत बधाईयां आ० योगराज प्रभाकर जी ।"
Mar 1
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post स्वतंत्र, परतंत्र या परजीवी (लघुकथा)/ शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत उम्दा तरीके से कथा कहनी चाही है आपने यहाँ पर कुछ अस्पष्ट रह गया है ।इसी कारण कथा मेरी तो समझ से परे हो गई है ।पाठक क्या अनुमान लगाये ।आद० प्रतिभा पांडे से सहमत हूँ ।"
Mar 1
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post ताले-चाबी वाले (लघुकथा) / शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बड़ी बेबाकी से आपने आज की व्यथा उकेर कर रखी है ।वाकई आज समाज में व्याप्त जवंलंत समस्या है बधाई आपको आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Mar 1
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post लोकतंत्र का ताजमहल (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"ताजमहल की तरह लोकतंत्र हमारे देश की अनमोल धरोहर है जिसे सुदृढ़ बनाये रखाना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है बधाई आपको आद०शेख शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Mar 1
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post श्रद्धा - लघुकथा –
"खुद की सुविधा के लिये बनाये नियम ,और स्वार्थ के घटिया दायरे,बेहद कटु व्यंग्य किया है आपने कथा के जरिये ।दान करते हाथ अछूत कहाँ होते है ।बढ़िया कथा है ।बधाई आपको आद० तेजवीर भाई जी ।"
Mar 1
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"हार्दिक आभार आपका आद० विनय कुमार जी,उत्साहवर्धन हेतु ।"
Feb 28
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"हार्दिक आभार आपका आद० मिथिलेश वामनकर जी ।"
Feb 28
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"हार्दिक आभार आपका आद० मोहन बेगोवाल जी ।"
Feb 28
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"बिल्कुल सही कहा है आपने सहमत हूँ आपसे ।पात्राऔ के नाम जानबूझकर रखे है क्योंकि हर माता पिता बेटी को संस्कार देते है सोच उनकी विकसित खुद की समझदारी पर होती है ।हौंसलाअफजाई के लिये हार्दिक आभार आपका भाई सतविंद्र कुमार जी ।"
Feb 28
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-23 (विषय: धारा के विपरीत)
"हार्दिक आभार आपका आद०महेंद्र कुमार जी ।गल्ती समझ आ गई है।सहमत हूँ सही कहा है आपने ।"
Feb 28

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लघु कथा

"अपमान "



'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।

क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?

आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।

हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।

जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।

'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।

वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और… Continue

Posted on September 12, 2016 at 9:30pm — 3 Comments

वृद्धाश्रम: लघुकथा

कौन है जो घंटी बजा रहा है,?चौकीदार तुम से काम ढंग से नही होता तो काम छोड़ दो।

'मेडम जी एक बुड्डा आया है,जिद्दी है कहता मिलना ज़रूरी है।

"देख राजू आख़िरी चेतावनी है तेरे लिये आलतू ,फ़ालतू लोगों को भगा नही सकता चले आते है समय बेसमय।

लगता हैवह इनाम की आस में आया है , हमारे टामी का विज्ञापन पढ़कर।"

अरे! क्या कह रहे हो राजू उसे बैठक में बैठाओ ,पानी,चाय लेते आना ,अभी आती हूँ।

बाहर ससुर को देखकर मालकिन के पाँव तले ज़मीन खिसक गई ।

"बेटा ,टामी वृद्धाश्रम आ गया था मेरे…

Continue

Posted on August 2, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

फेरे लघुकथा

फेरे '



घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।

"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।

पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।

"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।

तुम्हारे,बच्चों के बिना… Continue

Posted on December 26, 2015 at 6:20pm — 8 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Posted on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

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At 1:46pm on November 16, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया नीता कसार जी आपकी लघु-कथा "फूल चोर" को इस माह की सर्वश्रेष्ठ कृति चुने जाने पर। समाज में व्याप्त किसी भी छोटी सी या बड़ी बुराई या ग़लत मानसिकता पर तीखा व्यंग्य या कटाक्ष करते हुए उत्कृष्ट लघु कथा सृजन करते हुए आपकी लेखनी वास्तव में सम्मानीय व अनुकरणीय है। सादर बधाई। आशा है हम नव रचनाकारों को आपकी और भी बेहतरीन लघु कथाएँ पढ़ने का अवसर मिलता रहेगा।
At 1:13pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया नीता कसार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "फूल चोर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:07pm on July 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 4:59pm on June 28, 2015, Nita Kasar said…
"बंधन"
स्वर्ण आभूषणों क़ीमती कपड़ों की चकाचौंध से उसका रूप सौंदर्य दमक रहा था, स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो जैसे।
और कोई होती तो मारे ख़ुशी से बावली हो जाती, पर नाम की लक्ष्मी का मन डूबा जा रहा था।
लोग क़यास लगाने में उलझे हुये थे।
पर कुछ जोड़ी अनुभवी आँखें युवती
की मन, की मलिनता समझ रही थी पर मजबूर थी। उनके हाथ बँधे जो थे।
"तू जल्दी से तैयार हों जा लक्ष्मी, सरपंच के बेटे की बहू बनकर जा रही है बहुत खुश रहेगी।
सुनो न माँ ------।कुअें से डूबती आवाज़ से पुकारा लक्ष्मी ने । माँ लौटी नसीहत के साथ, 'रानी बनकर राज करेगी ' लाड़ों, कहकर माँ ने उसके गोरे,गोरे गाल थपथपा दिये, पर वे शर्मो हया के मारे लाल न हुये ।
'दुल्हन को बुलाओ, मुहुरत निकला जा रहा है'। पर उसका निर्णय अटल था
वह घर के पिछले दरवाज़े से निकल चुकी थी अपनी पसंद के साथ, प्रेमपथ पर, आज़ाद हो सारे बंधनों से ।
एक एेसी नदी जिसे कोई बाँध, बंधन मंज़ूर नही, अनवरत चाहती थी, उन्मुक्त हो निर्बाध बहना ।

मौलिक व अप्रकाशित नीता कसार
जबलपुर (म०प्र) ।
At 2:58pm on June 24, 2015, Nita Kasar said…
सुलझती उलझन

पिछली कुछ रातों से मनु चैन से सो न पाया अक्सर आये सपने से चौंक कर उठ कर बैठ जाता ।
छोटा बच्चा नहीं है वह मिनी से शादी करता पर माँ पापा की कट्टरता के आगे समर्पण कर बैठा।
अब आजीवन जेल में रहना होगा क्या मुझे जेल में नही !!!!!!
वह बिन ब्याही मिनी और उसके बच्चे का पिता होने के जुर्म में सवालों के पीछे पहंुच गया ।
मनु आदतन अपराधी नही था पूरी ज़िंदगी उसके और मिनी के सामने थी ।अदालत ने इसी आधार पर उसकी ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली ।
अब वह बेटे को अपना नाम देगा,अच्छा पति बनेगा ।ज़िम्मेदारियों के अहसास ने उसे कश्मकश के भँवर से भी मुक्त कर दिया ।
नीता कसार
जबलपुर
मौलिक व अप्रकाशित ।
At 7:33pm on April 29, 2015, Nita Kasar said…
दर ए दीवार लघुकथा ।
एक ही मोहल्ले में,एक ही गली में रहने वाले दो परिवार,अपनापन इतना ज़्यादा कि लोग एक ही परिवार समझते।
वक़्त की नज़ाकत,व बड़ों का बचपना,दोनों मंे अनबोला हो गया।
हालत इतने बिगड़ गये कि एक दूसरे कि सूरत देखना गवांरा नही था।
अचानक आये भूकंप ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भूकंप की थरथराहट ने दीवार को ज़मींदोज़ कर
दिया ।
क़ुदरत के क़हर के आगे सब बौने है?

अप्रकाशित मौलिक

नीता कसार
At 7:43am on April 29, 2015, Nita Kasar said…
Thank you
At 11:41pm on April 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !

 
 
 

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