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Nita Kasar
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Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"अंदर की बात बेहद गंभीर ,विचारणीय है,मातापिता बच्चों की परवरिश के समय स्टेटस नही समझते है।बदलाव की ये बयार घातक संकेत की ओर इंगित करती है।कथा के लिये बधाई आद०तेजवीर सिंह जी ।"
Oct 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"परिवार से बढकर कोई शौक महत्त्वपूर्ण नही होना चाहिये सार्थक कथा के लिये बधाई।"
Oct 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-55 (विषय: घर संसार)
"शीर्षक आधारित कथा के जरिये गंभीर विषय उठाया है।कथा के लिये बधाई आद० गंगाधर शर्मा जी ।"
Oct 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"परिवार की महत्वपूर्ण कापी होती है स्त्री् जिसके बिना परिवार की कल्पना बेमानी है।परिवार की देखभाल उसका दायित्व है तो परिवार काफी उनके प्रति दायित्व सुनिश्चित होना चाहिये।कथा के लिये बधाई आद० कनक हरलालका जी ।"
Sep 29
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"स्त्री आदतन ही देखभालपसंद होती है,क्योंकि ये उसके संस्कार है।पुरूष घर में भी हो तो वह ठंडा क्यों खाये पर पुरूष को परवाह कम होती है।कथा में आपने उम्दा विषय पर प्रकाश डाला है ।बधाई कथा के लिये आद० प्रतिभा पांडे जी ।"
Sep 29
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
" जब जब पुरूष ने स्त्री को आज़माया तब तब स्त्री ने उनके अहं,वहम को समझदारी का जामा पहनाया है। अधिकतर दांपत्य जीवन में ऐसी नोंकझोंक चलती रहती है।शीर्षक भी उम्दा है। बधाई आद० ओमप्रकाश क्षत्रिय जी ।"
Sep 29
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-54 (विषय: स्त्री)
"विषय आधारित सुंदर कथा जिसमें स्त्री के साथ पुरूष मानसिकता का चित्रण है बधाई  आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Sep 29
Nita Kasar commented on विनय कुमार's blog post समीकरण- लघुकथा
"बदलते दौर में समाज के समीकरण बनते बिगड़ते रहते है।एक दौर ऐसा भी रहा कि  सायकिल से चलने वाले वक़ील बहुत आगे तक पहुँचे ,और आज का दौर है जहाँ दिखावा ही मायने रखता है ।कथा के लिये बधाई आद० विनय सिंह जी ।"
Sep 28
Nita Kasar commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"शारीरिकता विकलांगता से ज़्यादा घातक होती है मानसिक विकलांगता ।मानसिक दूषित विचार कुछ हद तक लाइलाज होते है।उम्दा कथा के लिये बधाई आद०विनय कुमार जी ।"
Sep 14
Nita Kasar commented on TEJ VEER SINGH's blog post सीख - लघुकथा -
"संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद० तेजवीर सिंह जी ।"
Aug 31
Nita Kasar commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post उपेक्षा (लघुकथा )
"नदी नही हम माँ कहते है उनकी पीड़ा की सुंदर अभिव्यक्ति है कथा में ।बधाई आपको आद०गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी ।"
Aug 9
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आपकी कथा पढकर मुझे आद०योगपाज प्रभाकर जी की कही एक बात याद आ रही है ।कृपया अन्यथा ना लें।जब हम संजीदा विषय पर लिखें तो अपनी बात इशारों में कहें कथा की प्रस्तुतिके लिये बधाई आद० अर्चना त्रिपाठी जी ।"
May 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"आज  ऐसे भीष्म रूपी बापू की ज़रूरत नही है।बेटियाँ पढ़े आगे बढ़ें।यही होना चाहिये बधाई इस संदेशप्रद कथा के लिये आद० कल्पना भट्ट जी ।"
May 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"कथा अच्छी है।वरिष्ठजनों की टिप्पणी पर गौर करियेगा ।हम यहाँ सबके साथ मिलकर ही सीखते हैं।प्रस्तुति के लिये बधाई आद० रचना भाटिया जी ।"
May 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"कुशल ् सफल दाम्पत्य के लिये समझौतें और सामंजस्य दोनों तरफ से ज़रूरी होते है ।आज के दौर की जटिल समस्या पर प्रकाश डालती कथा के लिये बधाई आद० वीरेंद्र वीर मेहता जी ।"
May 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" स्वर्ण जयंती अंक-50
"धर्म और मज़हब से बढकर होता है इंसानियत का रिश्ता।संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद० तस्दीक़ अहमद खान जी ।"
May 31

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लघु कथा

"अपमान "



'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।

क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?

आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।

हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।

जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।

'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।

वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और… Continue

Posted on September 12, 2016 at 9:30pm — 4 Comments

वृद्धाश्रम: लघुकथा

कौन है जो घंटी बजा रहा है,?चौकीदार तुम से काम ढंग से नही होता तो काम छोड़ दो।

'मेडम जी एक बुड्डा आया है,जिद्दी है कहता मिलना ज़रूरी है।

"देख राजू आख़िरी चेतावनी है तेरे लिये आलतू ,फ़ालतू लोगों को भगा नही सकता चले आते है समय बेसमय।

लगता हैवह इनाम की आस में आया है , हमारे टामी का विज्ञापन पढ़कर।"

अरे! क्या कह रहे हो राजू उसे बैठक में बैठाओ ,पानी,चाय लेते आना ,अभी आती हूँ।

बाहर ससुर को देखकर मालकिन के पाँव तले ज़मीन खिसक गई ।

"बेटा ,टामी वृद्धाश्रम आ गया था मेरे…

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Posted on August 2, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

फेरे लघुकथा

फेरे '



घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।

"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।

पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।

"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।

तुम्हारे,बच्चों के बिना… Continue

Posted on December 26, 2015 at 6:20pm — 8 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Posted on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 1:46pm on November 16, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया नीता कसार जी आपकी लघु-कथा "फूल चोर" को इस माह की सर्वश्रेष्ठ कृति चुने जाने पर। समाज में व्याप्त किसी भी छोटी सी या बड़ी बुराई या ग़लत मानसिकता पर तीखा व्यंग्य या कटाक्ष करते हुए उत्कृष्ट लघु कथा सृजन करते हुए आपकी लेखनी वास्तव में सम्मानीय व अनुकरणीय है। सादर बधाई। आशा है हम नव रचनाकारों को आपकी और भी बेहतरीन लघु कथाएँ पढ़ने का अवसर मिलता रहेगा।
At 1:13pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया नीता कसार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "फूल चोर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:07pm on July 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 4:59pm on June 28, 2015, Nita Kasar said…
"बंधन"
स्वर्ण आभूषणों क़ीमती कपड़ों की चकाचौंध से उसका रूप सौंदर्य दमक रहा था, स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो जैसे।
और कोई होती तो मारे ख़ुशी से बावली हो जाती, पर नाम की लक्ष्मी का मन डूबा जा रहा था।
लोग क़यास लगाने में उलझे हुये थे।
पर कुछ जोड़ी अनुभवी आँखें युवती
की मन, की मलिनता समझ रही थी पर मजबूर थी। उनके हाथ बँधे जो थे।
"तू जल्दी से तैयार हों जा लक्ष्मी, सरपंच के बेटे की बहू बनकर जा रही है बहुत खुश रहेगी।
सुनो न माँ ------।कुअें से डूबती आवाज़ से पुकारा लक्ष्मी ने । माँ लौटी नसीहत के साथ, 'रानी बनकर राज करेगी ' लाड़ों, कहकर माँ ने उसके गोरे,गोरे गाल थपथपा दिये, पर वे शर्मो हया के मारे लाल न हुये ।
'दुल्हन को बुलाओ, मुहुरत निकला जा रहा है'। पर उसका निर्णय अटल था
वह घर के पिछले दरवाज़े से निकल चुकी थी अपनी पसंद के साथ, प्रेमपथ पर, आज़ाद हो सारे बंधनों से ।
एक एेसी नदी जिसे कोई बाँध, बंधन मंज़ूर नही, अनवरत चाहती थी, उन्मुक्त हो निर्बाध बहना ।

मौलिक व अप्रकाशित नीता कसार
जबलपुर (म०प्र) ।
At 2:58pm on June 24, 2015, Nita Kasar said…
सुलझती उलझन

पिछली कुछ रातों से मनु चैन से सो न पाया अक्सर आये सपने से चौंक कर उठ कर बैठ जाता ।
छोटा बच्चा नहीं है वह मिनी से शादी करता पर माँ पापा की कट्टरता के आगे समर्पण कर बैठा।
अब आजीवन जेल में रहना होगा क्या मुझे जेल में नही !!!!!!
वह बिन ब्याही मिनी और उसके बच्चे का पिता होने के जुर्म में सवालों के पीछे पहंुच गया ।
मनु आदतन अपराधी नही था पूरी ज़िंदगी उसके और मिनी के सामने थी ।अदालत ने इसी आधार पर उसकी ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली ।
अब वह बेटे को अपना नाम देगा,अच्छा पति बनेगा ।ज़िम्मेदारियों के अहसास ने उसे कश्मकश के भँवर से भी मुक्त कर दिया ।
नीता कसार
जबलपुर
मौलिक व अप्रकाशित ।
At 7:33pm on April 29, 2015, Nita Kasar said…
दर ए दीवार लघुकथा ।
एक ही मोहल्ले में,एक ही गली में रहने वाले दो परिवार,अपनापन इतना ज़्यादा कि लोग एक ही परिवार समझते।
वक़्त की नज़ाकत,व बड़ों का बचपना,दोनों मंे अनबोला हो गया।
हालत इतने बिगड़ गये कि एक दूसरे कि सूरत देखना गवांरा नही था।
अचानक आये भूकंप ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भूकंप की थरथराहट ने दीवार को ज़मींदोज़ कर
दिया ।
क़ुदरत के क़हर के आगे सब बौने है?

अप्रकाशित मौलिक

नीता कसार
At 7:43am on April 29, 2015, Nita Kasar said…
Thank you
At 11:41pm on April 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !

 
 
 

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