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Nita Kasar
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Nita Kasar commented on Manan Kumar singh's blog post बातचीत(लघु कथा)
"कम शबदों में कटु व्यंग्य उम्दा कथा के लिये बधाई आद० मनन कुमार सिंह जी ।"
Feb 11
Nita Kasar commented on VIRENDER VEER MEHTA's blog post आशियाँ' - लघुकथा
"शुरू में सामान्य दिखने वाली कथा में बलिदान पश्चाताप ने दोस्ती की असलियत उजागर कर दी,सारगर्भित कथा के लिये बधाई आद० वीरेंद्र वीर मेहता जी ।"
Feb 11
Nita Kasar commented on विनय कुमार's blog post जरुरत- लघुकथा
" युवक का शौक़ ज़रूरी था ।ज़रूरत ने संवेदनाओं को ज़ब्त कर शौक़ को प्राथमिकता दी ।समय समय की बात है।उम्दा कथा के लिये बधाई आद० विनय  सिंह जी ।"
Feb 9
Nita Kasar commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post पकोड़े (लघुकथा)
"पकौड़ा राजनीति पर आधारित कटु व्यंग्य किया है आपने बधाई कथा के लिये आद० शहज़ाद भाई ।"
Feb 8
Nita Kasar commented on Chandresh Kumar Chhatlani's blog post शह की संतान (लघुकथा)
"बच्चे बच्चे होते है ।घर,स्कूल का परिवेश उसकी मानसिकता का निर्माण करता है।ज़िम्मेदार अपनी ज़िम्मेदारी से बच नही सकते ।सशक्त कथा के लिये बधाई आद० चंद्रेश छतलानी जी ।"
Feb 8
Nita Kasar replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 में शामिल सभी लघुकथाएँ
"ओ बी ओ लघुकथा गोष्ठी के सफल आयोजन व संचालन के लिये बहुत बहुत बधाईयां व शुभकामनायें आद० योगराज प्रभाकर जी ।ओ बी ओ के सशक्त मंच के जरिये गूढ,उम्दा कथायें पढने सीखने मिलती है।सफर में होने के कारणकथा पर आये कमेंट्स का जवाब नही दे पाई।इसके लिये क्षमा…"
Feb 2
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"इंसान इंसान के लिये बाधा खड़ी करता है ,तो प्रतिभा और मेहनत से अर्जित ज्ञान उसे पार करवाते है ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद०सतविंद्र कुमार भाई जी ।"
Jan 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"कथा के लिये उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार आद० शेख़ शहज़ाद उस्मानी जी ।"
Jan 31
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"बेटी 'ये लो कर लो बात,अभी बहू को आये कितने दिन हुये,जो फिर से भाई लेने आने वाला है।'सुनिये बहू के मायके फ़ोन करके आप कहिये 'एेसे नही चलेगा ।तीज त्यौहार हमारा घर आँगन सूना क्यों रहेगा ?' पत्नि को आगबबूला देख मोहन लाल चुपचाप सुनते…"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"संदेशप्रद कथा के लिये बधाई आद० तस्दीक़ अहमद खान जी ।"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"पहिले बाप कमाई से चीज़ें ख़रीदती थी ,अब आप कमाई से उम्दा कथा के लिये बधाई आद० ओम भाई जी ।"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"ओह,इतिहास का असर वर्तमान के साथ भविष्य पर पड़ना ।बेहद दुखद है ।काश! लेंगे समझते ?बधाई इस कथा के लिये आद० सुरेन्द्र नाथ कुशक्षत्रप जी ।"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"इतिहस गवाह है कि ये अहं व वहं कितना दुखी करते है।समझदारी पर निर्भर करता है कि आज मे ही जिये,बधाई कथा के लिये आद० शशि बंसल जी ।"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"पत्रलेखन शैली में लिखी गई कथा के लिये बधाई आद०मोहम्मद आरिफ़ जी ।"
Jan 30
Nita Kasar replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-34 (विषय: "इतिहास")
"अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदना जानता था,निकलना जानता होता तो इतिहास कुछ हटकर ही होता ।उम्दा कथा के लिये बधाई आद०तेजवीर सिंह जी ।"
Jan 30
Nita Kasar commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post मकड़जाल (लघुकथा)
"आँखे खोलने वाली कथा,आज यही देखने में आता है लोकलुभावन दुनिया की हकीकत से अवगत कराती कथा के लिये बधाई  आद० कल्पना बहना ।"
Jan 19

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लघु कथा

"अपमान "



'जल्दी से आ जा मोनू ,खाना गरम है,खा लें,सबके साथ ।

क्या जल्दी है ,माँ खाना खाना लगा रखा है ?

आते साथ चुपचाप बैठा देख माँ से रहा ना गया।

हाथ धोकर आजा बेटा, फिर खाना खाने बैठ।

जितना तुझे ज़रूरत हो उतना ही लेना,छोड़ना मत ।माँ ने लाड़ले को समझाना चाहा ।

'अब पेट कोई कमरा नही है खाता जाऊँगा ,थोड़ा छूट गया तो क्या फ़र्क़ पड़ता है ?

ये अन्नदेव का अपमान है बेटा ।

वो कैसे ?जिस दिन तुम्है ग़ुस्सा आ जाता है,और उस दिन तुम खाना नही खाते तब ये संतुलन और… Continue

Posted on September 12, 2016 at 9:30pm — 3 Comments

वृद्धाश्रम: लघुकथा

कौन है जो घंटी बजा रहा है,?चौकीदार तुम से काम ढंग से नही होता तो काम छोड़ दो।

'मेडम जी एक बुड्डा आया है,जिद्दी है कहता मिलना ज़रूरी है।

"देख राजू आख़िरी चेतावनी है तेरे लिये आलतू ,फ़ालतू लोगों को भगा नही सकता चले आते है समय बेसमय।

लगता हैवह इनाम की आस में आया है , हमारे टामी का विज्ञापन पढ़कर।"

अरे! क्या कह रहे हो राजू उसे बैठक में बैठाओ ,पानी,चाय लेते आना ,अभी आती हूँ।

बाहर ससुर को देखकर मालकिन के पाँव तले ज़मीन खिसक गई ।

"बेटा ,टामी वृद्धाश्रम आ गया था मेरे…

Continue

Posted on August 2, 2016 at 9:00pm — 8 Comments

फेरे लघुकथा

फेरे '



घर के काम से फ़ुरसत हो थोड़ा आराम करने जा ही रही थी , वक़्त बेवक्त घंटी के बजते ही मन में आया इस समय कौन होगा, अभी सूरज के आने का समय तो हुआ नहीं है, दरवाज़े पर पति को देख मैं चकित रह गई।

"अरे आप !!!!" पति को अचानक सामने ,पसीने से तरबतर देख ,अपने आप को बोलने से रोक ना पाई।

पानी लेने जा रही थी, सूरज ने हाथ पकड़ कर रोक लिया।

"तुमसे कुछ कहना है मुझे सुमन, मैं फिसल गया, रोशनी से संबंध बना बैठा , मुझे माफ़ करोगी ना मुझे हर सज़ा मंज़ूर है।

तुम्हारे,बच्चों के बिना… Continue

Posted on December 26, 2015 at 6:20pm — 8 Comments

फूल चोर

"फूल चोर"



मंदिर में वर्मा जी की थाली में अपने बागीचे के विदेशी फूल देखकर वृंदा के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। वे पूजा की थाली हाथ में पकडे मूर्ति के सामने खड़े हुए थे, जिसे देखकर वृंदा के चेहरे पर अविश्वास और क्रोध के मिश्रित भाव उभर आए।



दरअसल बचपन से ही वृंदा को जूनून की हद तक बागवानी का बेहद शौक था। तरह तरह से रंग सजावटी पौधों, हरी भरी घास, रंग बिरंगे फूलों तथा विभिन्न प्रकार के बेल बूटों से भरा बगीचा पूरी कॉलोनी में चर्चा का विषय बन चुका था। जो भी देखता, बगीचे और वृंदा की… Continue

Posted on October 19, 2015 at 5:04pm — 25 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 1:46pm on November 16, 2015, Sheikh Shahzad Usmani said…
हृदयतल से बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आदरणीया नीता कसार जी आपकी लघु-कथा "फूल चोर" को इस माह की सर्वश्रेष्ठ कृति चुने जाने पर। समाज में व्याप्त किसी भी छोटी सी या बड़ी बुराई या ग़लत मानसिकता पर तीखा व्यंग्य या कटाक्ष करते हुए उत्कृष्ट लघु कथा सृजन करते हुए आपकी लेखनी वास्तव में सम्मानीय व अनुकरणीय है। सादर बधाई। आशा है हम नव रचनाकारों को आपकी और भी बेहतरीन लघु कथाएँ पढ़ने का अवसर मिलता रहेगा।
At 1:13pm on November 16, 2015,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीया नीता कसार जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी लघुकथा "फूल चोर" को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है, तथा आप की छाया चित्र को ओ बी ओ मुख्य पृष्ठ पर स्थान दिया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |

आपको प्रसस्ति पत्र शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 1:07pm on July 20, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें 

At 4:59pm on June 28, 2015, Nita Kasar said…
"बंधन"
स्वर्ण आभूषणों क़ीमती कपड़ों की चकाचौंध से उसका रूप सौंदर्य दमक रहा था, स्वर्ग से अप्सरा उतर आई हो जैसे।
और कोई होती तो मारे ख़ुशी से बावली हो जाती, पर नाम की लक्ष्मी का मन डूबा जा रहा था।
लोग क़यास लगाने में उलझे हुये थे।
पर कुछ जोड़ी अनुभवी आँखें युवती
की मन, की मलिनता समझ रही थी पर मजबूर थी। उनके हाथ बँधे जो थे।
"तू जल्दी से तैयार हों जा लक्ष्मी, सरपंच के बेटे की बहू बनकर जा रही है बहुत खुश रहेगी।
सुनो न माँ ------।कुअें से डूबती आवाज़ से पुकारा लक्ष्मी ने । माँ लौटी नसीहत के साथ, 'रानी बनकर राज करेगी ' लाड़ों, कहकर माँ ने उसके गोरे,गोरे गाल थपथपा दिये, पर वे शर्मो हया के मारे लाल न हुये ।
'दुल्हन को बुलाओ, मुहुरत निकला जा रहा है'। पर उसका निर्णय अटल था
वह घर के पिछले दरवाज़े से निकल चुकी थी अपनी पसंद के साथ, प्रेमपथ पर, आज़ाद हो सारे बंधनों से ।
एक एेसी नदी जिसे कोई बाँध, बंधन मंज़ूर नही, अनवरत चाहती थी, उन्मुक्त हो निर्बाध बहना ।

मौलिक व अप्रकाशित नीता कसार
जबलपुर (म०प्र) ।
At 2:58pm on June 24, 2015, Nita Kasar said…
सुलझती उलझन

पिछली कुछ रातों से मनु चैन से सो न पाया अक्सर आये सपने से चौंक कर उठ कर बैठ जाता ।
छोटा बच्चा नहीं है वह मिनी से शादी करता पर माँ पापा की कट्टरता के आगे समर्पण कर बैठा।
अब आजीवन जेल में रहना होगा क्या मुझे जेल में नही !!!!!!
वह बिन ब्याही मिनी और उसके बच्चे का पिता होने के जुर्म में सवालों के पीछे पहंुच गया ।
मनु आदतन अपराधी नही था पूरी ज़िंदगी उसके और मिनी के सामने थी ।अदालत ने इसी आधार पर उसकी ज़मानत अर्ज़ी मंज़ूर कर ली ।
अब वह बेटे को अपना नाम देगा,अच्छा पति बनेगा ।ज़िम्मेदारियों के अहसास ने उसे कश्मकश के भँवर से भी मुक्त कर दिया ।
नीता कसार
जबलपुर
मौलिक व अप्रकाशित ।
At 7:33pm on April 29, 2015, Nita Kasar said…
दर ए दीवार लघुकथा ।
एक ही मोहल्ले में,एक ही गली में रहने वाले दो परिवार,अपनापन इतना ज़्यादा कि लोग एक ही परिवार समझते।
वक़्त की नज़ाकत,व बड़ों का बचपना,दोनों मंे अनबोला हो गया।
हालत इतने बिगड़ गये कि एक दूसरे कि सूरत देखना गवांरा नही था।
अचानक आये भूकंप ने सबको स्तब्ध कर दिया।
भूकंप की थरथराहट ने दीवार को ज़मींदोज़ कर
दिया ।
क़ुदरत के क़हर के आगे सब बौने है?

अप्रकाशित मौलिक

नीता कसार
At 7:43am on April 29, 2015, Nita Kasar said…
Thank you
At 11:41pm on April 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है !

 
 
 

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