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2×16

इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.
लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.

एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है,
चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.

लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,
किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.

सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,
लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.

व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को यह समझाती है,
कोई काम भी मेरे बच्चे ऐसा वैसा मत कर लेना.

छोटी सी तस्वीर थी तेरी,जिसको बटुए में रखता था,
अब वो कहाँ है मुझसे सुनकर,चेहरा रुखा मत कर लेना.

मिट जाना ही आखिर है तो फिर कोई समझौता क्यों हो,
अपने आदर्शों के बदले कोई सौदा मत कर लेना.

लिख देने से दिल की बातें बोझ ज़रा कम हो जाता है,
सबको दिल को हाल बताकर दिल से धोखा मत कर लेना.

कोई अंबर की खिड़की से झूठ व सच को नाप रहा है,
खुद को यह विश्वास दिलाकर खुद से छोटा मत कर लेना.

पेड़ पे जब फल आएंगे तो पत्थर भी आएंगे निश्चित,
दुनिया के व्यवहार से लेकिन फल को कड़वा मत कर देना.

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by मनोज अहसास on November 6, 2019 at 12:11am

हार्दिक आभार सागर साहब

Comment by प्रशांत दीक्षित 'प्रशांत' on October 18, 2019 at 7:49am

बहुत सुंदर । बधाई स्वीकार करें ।

Comment by मनोज अहसास on October 17, 2019 at 8:47pm

सादर प्रणाम आदरणीय कबीर साहब 

यकीनन आप बहुत ही ध्यान से सभी ग़ज़लें पढ़ते हैं आपकी सरपरस्ती में हम लोग सीख रहें हैं हमारे लिए ये सौभाग्य की बात है

बहुत बहुत आभार

Comment by Samar kabeer on October 17, 2019 at 11:35am

जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'सबको दिल को हाल बताकर दिल से धोखा मत कर लेना'

इस मिसरे में 'को' की जगह "का" कर लें ।

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