For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक ग़ज़ल मनोज अहसास

एक ताज़ा ग़ज़ल

1222    1222     1222    1222

उदासी घिर के आई है चलो फिर कुछ नया कह दें
पलक को बेवफा कह दें या पैसे को खुदा कह दें

यहाँ से टूट कर जुड़ना नहीं मुमकिन मगर फिर भी
चलो एक बार फिर से आंसुओं को अलविदा कह दें

समंदर सी बड़ी नाकामियां है सामने अपने
ये सोचा है कि अपना नाम मिट्टी पर लिखा कह दें

तुम्हारे आने की उम्मीद की भी क्या जरूरत है
हमें ही लोग शायद कुछ दिनों में जा चुका कह दें

ये धड़कन जिस ने दी है वह भी अपना हो नहीं पाया

किसी बेजान पुतले को भला कैसे सगा कह दें

यही अहसास लेकर अब तलक खाते रहे ठोकर
यें सब पत्थर ही हमसे असली मंजिल का पता कह दें

मौलिक अरे अप्रकाशित

Views: 79

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ajay Tiwari on January 24, 2019 at 5:50pm

आदरणीय मनोज जी, अच्छे शेर हुए हैं. हार्दिक बधाई.

Comment by Samar kabeer on January 21, 2019 at 10:42pm

जनाब मनोज अहसास जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'पलक को बेवफा कह दें या पैसे को खुदा कह दें'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर देखें ।

'चलो एक बार फिर से आंसुओं को अलविदा कह दें'

इस मिसरे में 'एक' को "इक़" कर लें,लय बाधित हो रही है ।

Comment by Naveen Mani Tripathi on January 21, 2019 at 12:29pm

आ0 मनोज भाई बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by amod shrivastav (bindouri) on January 20, 2019 at 8:51am

आ मजोज भाई सा , बढ़िया कही है , सादर बधाई 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. अंजलि जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई दिगम्बर जी, सादर अभिवादन ।सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, बेहतरीन गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई सुरेंद्र जी, लाजवाब गजल हुई है । दिल से बधाई स्वीकारें।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"आ. भाई जावेद जी सादर आभार।"
1 hour ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब अनीस शैख़ साहिब आदाब ग़ज़ल के उम्दा प्रयास के लिए दिली मुबारक बाद "
5 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब बलराम धाकड़ जी आदाब ग़ज़ल के उम्दा प्रयास के लिए मुबारक बाद  अकाबेरीन की इस्लाह …"
5 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब  शानदार ग़ज़ल के लिए दिली मुबारक बाद "
6 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब लक्शमण धामी जी आदाब  आपके प्रयास ओर ग़ज़ल कहने के जज़्बे को सलाम"
6 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरेंद्र नाथ जी उम्दा ग़ज़ल के लिए दिली मुबारक बाद "
6 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब सुरेंद्र नाथ जी उम्दा अशआर के लिए दिली मुबारक बाद "
6 hours ago
mirza javed baig replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-104
"जनाब नादिर ख़ान साहिब आदाब  हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया। "
6 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service