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गोधूलि की बेला में (लघु रचना ) ....

मैं
आस था
विश्वास था
अनभूति का
आभास था
पथ पथरीला प्रीत का
लम्बा और उदास था
जाने किसके हाथ थे
जाने किसका साथ था
गोधूलि की बेला में
अंतिम जीवन खेला में
आहटों की देहरी पर
अटका
मेरा
श्वास था

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on August 17, 2018 at 4:02pm

आदरणीय बबितागुप्ता जी सृजन पर आपकी मधुर प्रतिक्रिया का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 17, 2018 at 4:02pm

आदरणीय तेज वीर सिंह जी सृजन को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 17, 2018 at 4:02pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी प्रस्तुति पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by babitagupta on August 15, 2018 at 3:38pm

आस-विश्वास के बीच झूलती बेहतरीन रचना,हार्दिक बधाई स्वीकार कीजियेगा आदरणीय सरजी।

Comment by TEJ VEER SINGH on August 15, 2018 at 10:31am

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी।बेहतरीन रचना।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 15, 2018 at 9:14am

आदरणीय सुशील सरना जी , बधाई , इस सुन्दर , सांकेतिक रचना के लिए , सादर।

Comment by Sushil Sarna on August 14, 2018 at 7:40pm

आदरणीया नीलम उपाध्याय जी सृजन पर आपकी मन मुदित करती प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Neelam Upadhyaya on August 14, 2018 at 3:27pm

आदरणीय सुशील सरना जी,   बहुत ही अच्छी रचना की प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें।

 

Comment by Sushil Sarna on August 14, 2018 at 2:31pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब। ... सृजन आपकी ऊर्जावान प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on August 14, 2018 at 2:31pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब, आदाब। ... सृजन के भावों पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से शुक्रिया।

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