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अबला नहिं आज रही महिला

दुर्मिल सवैया

अबला नहिं आज रही महिला, सबला बन राज करे जगती।

मुहताज नहीं सब काज करे, मन ओज अदम्य सदा भरती ।।

धरती नभ नाप रही पल में, प्रतिमान नये नित है गढ़ती।

यह बात सभी जन मान गये, अब नार नहीं अबला फबती।१।

परिधान हरा तन धार खुशी, ललना गल धीरज हार गहा।

सिर बाँध दुकूल उमंग नया, मन केशरिया रँग आज लहा।।

शुभ कंगन साहस हाथ भरा, मुख आस सुहास विराज रहा।

पथ उन्नति एक चुना उसने, बिसरे सब पंथ विराग दहा।२।

वसुधा हरसी लखि शान लला, सरसी नभ भोर उजास सनी।

सँवरी खुशहाल धरा विहँसी, महकी सरसों खिल पीत घनी।।

महिला यह चालक ट्रैक्टर की, फिर भारत शान मिसाल बनी।

ढलती रही कालनुसार सदा, वसुधा करती निज नाम धनी।३।

-मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 2:06pm

आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी नहीं को नहिं लिखना सवैया  विधान अनुसार मान्य है इस सन्दर्भ में अधिक जानकारी मंच के पटल पर भारतीय छंद विधान सवैया  अंतर्गत उपलब्ध है सादर 

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 1:08pm

हृदयतल से आभार आदरणीय सुरेन्द्रनाथ जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 1:03pm

हृदयतल से आभार आदरणीय बृजेश कुमार जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 1:02pm

हृदयतल से आभार आदरणीया नीलम  जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 1:00pm

हृदयतल से आभार आदरणीय मोहम्मद आरिफ जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 12:59pm

हृदयतल से आभार आदरणीय श्यामनारायण जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by Satyanarayan Singh on July 8, 2018 at 12:57pm

हृदयतल से आभार आदरणीय समर कबीर जी प्रस्तुति पर उपस्थित होकर उत्साहवर्धन करने के लिए,सादर नमन

Comment by नाथ सोनांचली on July 5, 2018 at 3:34pm

आद0 सत्य नारायण जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव प्रधान सवैया।। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये। 

एक प्रश्न है,, क्या नहीं को नहि लिखना सही है??

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 30, 2018 at 2:01pm

बहुत ही उत्तम और सरस भाव से परिपूर्ण छंद लिखे हैं आदरणीय..वाह

Comment by Neelam Upadhyaya on June 26, 2018 at 2:16pm

आदरणीय सत्यनारायण जी, नमस्कार ।  बहुत ही सुन्दर  छंद की प्रस्तुति के लिए बधाई।   

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