For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Satyanarayan Singh's Blog (33)

कह-मुकरियाँ

कह-मुकरियाँ
(१)
जिसकी ठाँव में दिवस बिताऊँ,
पाकर   जिसको   मैं   इतराऊँ,
अफसर  काटें  उसके  चक्कर,
क्यों सखि साजन? ना सखि दफ्तर!
(२)
जीवन  को  वह  सुलभ  बनाए,
वह सुख  दुख में  साथ निभाए,
महका…
Continue

Added by Satyanarayan Singh on September 25, 2019 at 10:47pm — 6 Comments

मत्तगयंद सवैया

छंद - मत्तगयंद सवैया
******************************
शिल्प= भगण×7+2 गुरु ,
23 वर्ण यति 12,11 

सावन मास रही तिथि पूनम,
क्रूर महा शिशुपाल सँहारे।

युध्द मझार उतार दिया रिपु ,
शीश सुदर्शन को कर धारे।
घायल अंगुलिका हरि रक्षति,
द्रौपदि अंबर को निज फारे।

वस्त्र हरे बलवान दुशासन,
चीर बढा हरि कर्ज उतारे।।

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Satyanarayan Singh on August 15, 2019 at 8:07pm — No Comments

अबला नहिं आज रही महिला

दुर्मिल सवैया

अबला नहिं आज रही महिला, सबला बन राज करे जगती।

मुहताज नहीं सब काज करे, मन ओज अदम्य सदा भरती ।।

धरती नभ नाप रही पल में, प्रतिमान नये नित है गढ़ती।

यह बात सभी जन मान गये, अब नार नहीं अबला फबती।१।

परिधान हरा तन धार खुशी, ललना गल धीरज हार गहा।

सिर बाँध दुकूल उमंग नया, मन केशरिया रँग आज लहा।।

शुभ कंगन साहस हाथ भरा, मुख आस सुहास विराज रहा।

पथ उन्नति एक चुना उसने, बिसरे सब पंथ विराग…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on June 25, 2018 at 8:26pm — 13 Comments

जताएं मातृ दिन पर हम

विधाता छंद 

जताएं मातृ दिन पर हम.....

जगत में मात के जैसा,नहीं दूजा दिखा भाई !

कहो माता कहो मम्मी, कहो चाहे उसे माई  !

पुकारे बाल माँ जब भी, तुरत वह दौडकर आई !

बुरा माना नहीं उसने, कभी मन बाल रुसवाई …

Continue

Added by Satyanarayan Singh on May 13, 2018 at 3:30am — 4 Comments

कह-मुकरियाँ

कह-मुकरियाँ

जाऊँ जहाँ वहीं वह  होले,

संग संग वह मेरे डोले,

जीवन उसके बिना अलोन,

क्यों सखि साजन ? ना सेल फोन !

 

हाल चाल सब रखता मेरा,

हमदम सा वह मीत घनेरा,

मै कश्ती तो  वह है साहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

 

चहल पहल वह रौनक लाये,

महफिल में भी रंग जमाये,

उसके बिन जीवन है काहिल,

क्यों सखि साजन ? ना मोबाइल !

.

मौलिक व अप्रकाशित

 

 

 

Added by Satyanarayan Singh on May 1, 2018 at 3:00pm — 6 Comments

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो,,,,,,

विहग निज चोंच में देखो, अहा! मछली दबोचे है|

फँसी खग कंठ में मछली, पड़े तन पर खरोंचे हैं ||

विहग औ मीन दोनों इक, सरीखे ही अबोले हैं |

मगर इक हर्ष दूजी भय, सँजोये आँख बोले हैं |१ |

उदर की भूख मिट जाए, यही चाहत विहग पाले |

वहीं पर मीन के देखो, पड़े हैं जान के लाले ||

सलामत जान की अपने, खुदा से चाहती मछली |

निवाला छूट ना जाए, यही मन सोचती बगुली |२ |



मौलिक और अप्रकाशित…



Continue

Added by Satyanarayan Singh on March 30, 2018 at 1:30pm — 12 Comments

आँसू बहते आँख से

आँसू बहते आँख से, कौन जुगत हो बंद ?

जहाँ कुशल नलसाज के, असफल सारे फंद।  

असफल सारे फंद, काम ना कोई आये।    

केवल साँचा मीत, उसे तब कर दिखलाये।।    

सत्य जगत में मीत, वही कहलाता धाँसू।     

कर देता जो बंद, आँख से  बहते आँसू।।     

 

-    मौलिक व अप्रकाशित 

Added by Satyanarayan Singh on March 5, 2017 at 8:00pm — 8 Comments

दो इतनी बस भीख मुझे ......

मत्तगयंद सवैया :-

============

 

दो इतनी बस भीख मुझे मन, और न माँग रहा कुछ स्वामी|

नाम जपे दिन रात सदा मुख, गान करे रसना गुण स्वामी||

रूप मनोहर देख सदा दृग, शीतल हो मन पावन स्वामी |

याचक “सत्य” करे विनती नित , शीश नवा पद पंकज स्वामी|१|

 

याद बड़ी शुभदायक औ तव, रूप बड़ा मन मोहक स्वामी|

भक्त कृपालु उदार मना तुम, भक्त कृपा लहते तव स्वामी||

बन्धु सखा गुरु मात पिता तुम, हो भव सागर तारक स्वामी|

जीवन की तुम आस प्रभो! तुम,हो…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on February 21, 2017 at 11:30pm — 2 Comments

करूँ वंदना आज वागीश्वरी की.......

करूँ वंदना आज वागीश्वरी की, सुनो प्रार्थना माँ हमारी सभी।

भरो ज्ञान का मात भंडार ऐसे, लुटाऊँ जहाँ में न रीते कभी।।

विराजो सदा आप वाणी हमारी, फलीभूत हो कामना माँ सभी।

लिखूँ गीत गाऊँ सुनाऊँ ख़ुशी से, दुलारा जहाँ में कहाऊँ तभी।१।



दिलों में अँधेरा समाया सभी के, उजाला दिलों में करो ज्ञान से।

मुझे मात दो कंठ ऐसा सुरीला, झरे माँ सुधा गीत के गान से।।

करो लेखनी की जरा धार पैनी, निखारो सदा शिल्प के सान से।

कला पक्ष औ भाव दोनों सँवारो, सधे साधना आपके ध्यान…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on February 1, 2017 at 12:30am — 7 Comments

सबसे अपावन क्रोध है, क्रोध ना मन में जनें !

थी भोर की बेला सुहानी, भीड़ गंगा तट जुटी !  

इक वृद्ध सन्यासी चला, गंगा नहा अपनी कुटी !

ओढ़े दुशाला राम नामी, गेरुवा पट रंग था !

 कर में कमंडल था सुशोभित, भस्म चर्चित अंग था !!

 

प्रभु नाम का शुभ जाप करता, साधु कुछ…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on November 6, 2016 at 10:09pm — 4 Comments

आओ मनाएँ हम दिवाली !

आओ मनाएँ हम दिवाली, बाल दीपक प्यार का !
आँगन गली घर जगमगाये, तम मिटे संसार का !
यह रौशनी का पर्व सूचक, है तिमिर पर जीत का !
अनुभव करें इस पर्व पर मिल, हम अनोखी प्रीत का !

मन दीप पूरित प्रीत घृत पुनि, भाव निर्मल वर्तिका !
बलकर दिये की लौ सुहानी, नाचती ज्यों नर्तिका !
काली अमा की रात में, न्यारी लगे हर दीपिका !
शुभ कामना जग प्रीति मुक्ता, मन सँजोये सीपिका !

- मौलिक व अप्रकाशित

Added by Satyanarayan Singh on October 31, 2016 at 1:21am — 11 Comments

बम बम भोलेनाथ

बम बम भोलेनाथ

 

बम बम भोलेनाथ शिव, आशुतोष भगवान।

नीलकंठ विरुपाक्ष अज, शंकर कृपानिधान।।

शंकर कृपानिधान, शिवाप्रिय भव त्रिपुरारी।

महादेव सर्वज्ञ, यज्ञमय हवि कामारी।।…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on March 7, 2016 at 2:00am — 2 Comments

राह हमें उत्कर्ष की, नित दिखला नववर्ष......

दोहा छंद आधारित गीत

================

मन सहिष्णु भटके नहीं,

लेकर भाव अमर्ष

राह हमें उत्कर्ष की, नित दिखला नववर्ष.....

 

झाँक रही दीवार से,

खूंटी ओढ़े  गर्द

साल मुबारक हो नया,

कहता मौसम सर्द

जंत्री नूतन साल की, करती ध्यानाकर्ष

 

लौटें लेकर सुदिन सब,

उत्सव औ त्यौहार

मिलना जुलना हो सहज,

सरल भाव व्यवहार

जाति धर्म के नाम पर, हो न कभी संघर्ष

 

गीत छंद कविता गजल,

ललित कलेवर…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on December 23, 2015 at 9:00pm — 12 Comments

फाल्गुनी दोहे

दिवस तीस औ पक्ष दो, छह रितु बारह मास।

होली उत्सव को सभी, बता रहे हैं खास।१।

आता समता को लिए, होली का त्यौहार।

सारे जग को बांटता, नेह भरा उपहार ।२।

खुशियाँ खूब उलीचता, फाल्गुन पूनम रात।

ख़ुशी साल भर ना खले, यही सोच मन…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on February 28, 2015 at 8:54pm — 23 Comments

स्वागतम नव वर्ष का

स्वागतम नव वर्ष का

 

हर्ष से आओ करें मिल, स्वागतम नव वर्ष का ।

आश जो हर मन जगाये, आज कारक हर्ष का ।।

कर्म को मुखरित करे वह, लक्ष्य नव उत्कर्ष का ।

शोध अभिनव जो कराये, साक्ष्य दृढ निष्कर्ष का ।१।…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on December 28, 2014 at 7:00pm — 3 Comments

मस्त वर्षा ऋतु निराली !

मस्त वर्षा ऋतु निराली !

 

मस्त वर्षा ऋतु निराली, मेघ बरसे साँवरा ।

भीगती है सृष्टि सारी, देख मन हो बाँवरा ।।

झूमता सावन लुभाता, शोर करती है हवा ।

मग्न होकर मोर नाचें, गीत गाते हैं…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on July 27, 2014 at 7:30pm — 10 Comments

वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

अवनी अम्बर जीव चराचर

सुख पा सब हर्षाये   

वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

        

प्रियतम को आमंत्रित करने  

मेघ दूत बन आये   

नील गगन के मुख मंडल पर

श्वेत श्याम घन छाये

वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

 

बहे पवन मदमस्त झूम के  

पुरवा मन अलसाये

प्रेम मिलन संकेत सरित ने

अर्णव संग जताये  

वर्षा प्रेम सुधा बरसाये

 

छैला दिनकर आज धरा से     

छिप छिप नैन लड़ाये  

प्रेम जलज बिहँसे इस जग…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on July 27, 2014 at 1:00pm — 12 Comments

उम्मीदों का जन आदेश

उम्मीदों का जन आदेश

 

उम्मीदों का जन आदेश, करे उजागर मन आवेश।

 मतदाता के मन की राज, बूझ रहे हैं पंडित आज।१।

 

घोषित होते ही परिणाम, दिग्गज आज हुए गुमनाम।…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on May 24, 2014 at 10:00pm — 12 Comments

जेठ की तपती दुपहरी!

जेठ की तपती दुपहरी!

जेठ की तपती दुपहरी, लगे नीरव शांत।

धूप झुलसा रही काया, स्वेद से मन क्लांत।।

शाख पर पक्षी विकल है, गेह में मनु जात।

सूर्य अम्बर आग उगले, जीव व्याकुल गात।१।

जल भरी ठंडी सुराही, पान कर मन तुष्ट।

दूध माखन और मठठा, तन करे है पुष्ट।।

पना अमरस संग चटनी, भा रहे पकवान।

कर्ण को मधुरिम लगे फिर, आज कोयल गान।२।

गूँजता अमराइयों में, बिरह पपिहा राग।

गाँठकर छाया दुपहरी, पढ़ रही निज भाग।।

कृष हुई सरिता निराली, सूख मंथर…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on May 20, 2014 at 6:00pm — 33 Comments

ऋतु गर्मी की आई

ऋतु गर्मी की आई

छन्न पकैया छन्न पकैया, ऋतु गर्मी की आई|

आँधी धूल उडाते चलती, बहे गर्म लू भाई|१|

छन्न पकैया छन्न पकैया, नीम सिरिष हैं फूले |

हवा सुगंध बिखेरे उनकी, खुशबू से मन झूले|२|…

Continue

Added by Satyanarayan Singh on May 2, 2014 at 9:30pm — 24 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह वाह लक्ष्मण जी .. आज तो ग़ज़ब कर दिए आप .. बहुत ख़ूब.. एक दो साधारण सुझाव ,,.दूर रह कर  याद…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
5 hours ago
अजेय updated their profile
14 hours ago
अजेय commented on अजेय's blog post ग़ज़ल (और कितनी देर तक सोयेंगें हम)
"आपकी आमद से मन को अतीव प्रसन्नता हुई समर साहब। आपका बहुत बहुत शुक्रिया। जी मुख्य ग़ज़ल से इस शेर को…"
14 hours ago
Chetan Prakash commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"साफ सुथरी हिन्दी ग़ज़ल, बधाई ! उद्धरणीय हो सकती थी, मकते के साथ।"
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post शूल सम यूँ खुरदरे ही रह गये जीवन में सच-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"जनाब लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।"
16 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (मैं जो कारवाँ से बिछड़ गया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद जिज्ञासा और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से…"
16 hours ago
सालिक गणवीर posted blog posts
17 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post कल कहा था आज भी कल भी कहो..( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिये ह्रदय तल से आभार. नया मतला कहने की…"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएं : जिन्दगी पर
"आ. भाई सुशील सरना जी, सादर अभिवादन । अच्छी क्षणिकाएँ हुई हैं । हार्दिक बधाई ।"
17 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service