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आँसू बहते आँख से

आँसू बहते आँख से, कौन जुगत हो बंद ?

जहाँ कुशल नलसाज के, असफल सारे फंद।  

असफल सारे फंद, काम ना कोई आये।    

केवल साँचा मीत, उसे तब कर दिखलाये।।    

सत्य जगत में मीत, वही कहलाता धाँसू।     

कर देता जो बंद, आँख से  बहते आँसू।।     

 

-    मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Satyanarayan Singh on March 8, 2017 at 10:48pm

सादर धन्यवाद आदरणीय

Comment by narendrasinh chauhan on March 8, 2017 at 5:56pm

खूब सुन्दर 

Comment by Satyanarayan Singh on March 7, 2017 at 11:12pm
सादर धन्यवाद आदरणीय महेंद्र कुमार जी
Comment by Mahendra Kumar on March 7, 2017 at 10:17pm
आ. सत्यनारायण जी, बढ़िया लगी रचना आपकी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए। सादर।
Comment by Satyanarayan Singh on March 6, 2017 at 11:51am

आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह जी सादर आभार 

Comment by Satyanarayan Singh on March 6, 2017 at 11:50am

आदरणीय आशुतोष जी सादर आभार 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on March 6, 2017 at 10:49am

आदरणीय सत्यनारायण जी शानदार कुण्डलियाँ हेतु सादर 

Comment by नाथ सोनांचली on March 6, 2017 at 9:54am
आद सत्यनारायन सिंह जी सादर अभिवादन। अच्छी कुण्डलिया कही आपने, बधाई

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