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 नन्हीं चींटी

श्रमजीवी नन्हीं चींटी को 

दीवारों पर चढ़ते देखा

रेखाओं सी तरल सरल को

बाधाओं से लड़ते देखा ll

श्रमित न होती भ्रमित न होती

आशाओं की लड़ी पिरोती

कभी फिसलती कभी लुढ़कती

गिर गिर कर पग आगे रखती ll

सहोत्साह नित प्रणत भाव से

दुर्धर पथ पर बढ़ते देखा ll

मन में नहीं हार का भय है

साहस धैर्य भरा निर्णय है

लाख गमों को दरकिनार कर

एक लक्ष्य जाना है ऊपर ll

झंझावातों पथ काँटो से

बारम्बार गुजरते देखा ll

हमें सीख देती है प्रतिपल

निश्छल कर्म करें हम अविरल

नीचे गिरकर ना घबराएं

मन में दृढ़ संकल्प जगाएं ll

हिम्मत से जो सदा काम ले

पल में उसे उबरते देखा

मुश्किल राह सँवरते देखा ll

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on June 4, 2018 at 3:26pm
आदरणीय निकोर साहब जी आपका दिल से आभार सादर
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on June 4, 2018 at 3:24pm
आदरणीय आरिफ साहब सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से मन प्रसन्न हुआ आपका दिल से आभार
Comment by vijay nikore on June 4, 2018 at 2:01pm

सुन्दर रचना के लिए बधाई

Comment by Mohammed Arif on June 1, 2018 at 10:16am

आदरणीय छोटे लाल जी आदाब,

                            नन्हीं चींटी के माध्यम से सकारात्मक सोच का संदेश देती अच्छी रचना । मुझे अपनी प्राथमिक पाठशाला की कविता की याद आ गई । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on May 31, 2018 at 7:58am

आदरणीय वर्मा जी आपके उत्साह वर्धन से मन खुश हुआ आपको दिल से धन्यवाद सादर

Comment by Shyam Narain Verma on May 30, 2018 at 3:37pm
वाह बेहद खूबसूरत प्रस्तुति … हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

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