For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

वार हर बार (लघुकथा)

"मुझे हमेशा लगता है कि कोई मुझे जान से मारने की कोशिश कर रहा है!"

"मुझे हमेशा लगता है कि कोई मुझे जड़ से ख़त्म करने की कोशिशें कर रहा है!"

"मुझे हमेशा लगता है कि कोई मुझे अपनी नौकरी से हटाने के की कोशिश कर रहा है या फिर मेरा तबादला कराने की कोशिशें कर रहा है!"

"हां, मुझे तो हमेशा यह भी लगता है कि मेरे अपनों को सता-सता कर या मुझे ब्लैकमेल कर मुझे दिग्भ्रमित करने की कोशिशें की जा रही हैं!"

दुनिया के मंच पर भिन्न-भिन्न किरदारों की अदायगी देख कर 'ईमानदारी' ने आंसू बहाते हुए चीख-चीख कर चारों ओर स्वर‌ मुखरित करते हुए कहा।

पास ही मौजूद 'बेईमानी' ने मुस्कराते हुए कहा - "मुझे भी तो हर पल यही लगता है! आजकल भी यही सब कहने को मन होता है! लेकिन तुम में और मुझ में एक अंतर तो है!"

"अच्छा! वह अंतर क्या है?" ईमानदारी ने चौंककर पूछा।

"मुझे मुसीबतों से छुटकारा पाने के लिए हज़ारों हम जैसों का सहारा तुरंत ही मिल जाता है! उन्नति ही पाकर हम शान से जिये चले जाते हैं और तुम हो कि हर पल परेशां रहती हो, मर-मर के जीती हो; क्योंकि तुम्हें तुम्हारे जैसे हज़ारों या तो दगा दे जाते हैं या फिर बिक जाते हैं!" बेईमानी ने ठहाके लगा कर कहा।


(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 115

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 30, 2018 at 11:11pm

मेरी इस ब्लॉग पोस्ट पर समय देकर इतना प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब डॉ. आशुतोष मिश्रा जी, जनाब विजय निकोरे साहिब और जनाब बृजेश कुमार'ब्रज'जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 27, 2018 at 4:27pm

बहुत उम्दा और सटीक लेखन...

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2018 at 11:29am

आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी बिलकुल सही कहा है आपने इमानदारी की राह पर चलने वाले बहुत बिवश हैं ..इस रचना के लिए ढेर सारी बधाई स्वीकार करें सादर 

Comment by vijay nikore on April 26, 2018 at 2:07am

वाह, क्या अनोखा प्लाट है आपकी लघु कथा का   ... बहुत ही प्रभावशाली व्यंग भी है। इस सशक्त लघु कथा के लिए दिल से बधाई, भाई शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 25, 2018 at 11:00pm

रचना पर समय देकर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए हार्दिक धन्यवाद आदरणीय तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब और आदरणीया नीलम उपाध्याय जी।

Comment by Neelam Upadhyaya on April 25, 2018 at 11:05am

आदरणीय शेख शहजाद उस्मानी जी । सच है, हर तरफ बेईमानी का ही बोलबाला है । कटाक्ष करती हुयी बेहतरीन रचना । बधाई ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 24, 2018 at 9:37pm

जनाब शेख़ शहज़ाद साहिब ,बेहतर संदेश देती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 24, 2018 at 8:44pm

अपने विचार और राय यहां साझा करने, अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, जनाब समर कबीर साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब और जनाब श्याम नारायण वर्मा साहिब।

Comment by Samar kabeer on April 24, 2018 at 6:39pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी साहिब आदाब,बहुत उम्दा लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on April 24, 2018 at 11:59am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                  ईमानदारी और बेईमानी को आधार बना बहुत ही कटाक्षपूर्ण प्रतीकात्मक लघुकथा । आजकल बेईमानी का ही। तो बोलबाला है । सच दबा कुचला और दुर्दिन अवस्था में जीवन बिता रहा है । वह समाज से नकार दिया गया है । लगता है जैसे बेईमानी को सामाजिक मान्यता मिल गई है । हार्दिक बधाई स्वीकार करें इस सशक्त रचना पर ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Ram Awadh VIshwakarma commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"बहुत खूबसूरत ग़ज़ल है। सभी शेर बोलते हुये हैं। आदर्णीय बधाई"
5 hours ago
Ram Awadh VIshwakarma commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आदरणीय सत्ताधीशों द्वारा ठगी गई भोलीभाली जनता का दुख दर्द बयान करती हुई सार्थक ग़ज़ल कहने के लिये…"
5 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा / दिनेश कुमार
"हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश सर जी, । प्रयासरत रहूँगा।"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दोस्तों वक़्त के रहबर का तमाशा देखो)
"मुहतरमा राजेश कुमारी साहिबा , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
6 hours ago
Nand Kumar Sanmukhani commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"पांच बरस के बाद भी बेचारी जनता कहां कुछ बोल-समझ पाती है। कुर्सी के खिलाड़ी ऐसे-ऐसे स्वांग रचते हैं,…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on ram shiromani pathak's blog post ग़ज़ल(2122 1212 22)
"आ. राम शिरोमणि जी,ग़ज़ल के लिए बधाई... और थोडा वक़्त दीजिये ..कई मिसरे और निखरेंगे सादर "
6 hours ago
दिनेश कुमार commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता / दिनेश कुमार / इस्लाह हेतु.
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश सर जी। कुछ कमियां भी बत…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा / दिनेश कुमार
"अब भी रातों को मेरी नींद उचट जाती हैआह इक चाँद को छूने का वो सपना मेरा.विशेष बधाई इस शेर के …"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- बाद मरने के भी दुनिया में हो चर्चा मेरा / दिनेश कुमार
"बहुत अच्छे आ. दिनेश जी आप की ग़ज़लें दिन प्रतिदिन बेहतर होती जा रहीं हैं.. बरकरार…"
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल --- मैं अपने काम अगर वक़्त पर नहीं करता / दिनेश कुमार / इस्लाह हेतु.
"आ. दिनेश जी अच्छी ग़ज़ल हुई है ..सभी अशआर भरपूर हैं..बहुत बहुत बधाई "
6 hours ago
Nilesh Shevgaonkar commented on Er. Ganesh Jee "Bagi"'s blog post ग़ज़ल (गणेश जी बागी)
"आ. बाग़ी जी,ग़ज़ल के लिए बधाई... जिसके लिए कही है वो भी हम-काफिया है ;)))))) ....................दी…"
6 hours ago
Mohammed Arif commented on rajesh kumari's blog post लाएँगी खुशियाँ तभी जीवन में उल्लास (गीत )
"आशा, विश्वास, उल्लास, हास परिहास और जीने का जज़्बा जगाता बहुत भी बेहतरीन गीत के लिए हार्दिक बधाई…"
7 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service