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ग़ज़ल नूर की- बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ 
.
बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना,
बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना.
.
नज़र मिलते ही उस का झेंप कर नज़रें चुरा लेना,
मचलती मौज का जैसे किसी साहिल को पा लेना.
.
बहुत वादे वो करता है मगर सब तोड़ देता है,
ये दावा भी उसी का है कि मुझ को आज़मा लेना.
.
मलंगों सी तबीयत है सो अपनी धुन में रहता हूँ   
पिये हैं रौशनी के जाम फिर ग़ैरों से क्या लेना.
.
मिलन होगा मुकम्मल जब मिलेगी बूँद सागर से
उस इक पल दरमियाँ से तुम बदन अपना हटा लेना.
.
निलेश "नूर"
मौलिक / अप्रकाशित 

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Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:21am

धन्यवाद आ. लक्ष्मण धामी जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:20am

धन्यवाद आ. हर्ष जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 29, 2018 at 10:20am

धन्यवाद आ. बृजेश जी 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 29, 2018 at 10:03am

आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल हुई है , हार्दिक बधाई।

Comment by Harash Mahajan on April 28, 2018 at 2:39pm

वाह आदरणीय नूर साहब दिल को छू गयी आपकी पेशकश ।

आपने जो मतला पेश किया है :

"बहुत आसाँ है दुनिया में किसी का प्यार पा लेना, 
बहुत मुश्किल है ऐबों को मगर उस के निभा लेना."

इस शेर पर मुझे असल रिश्ते को संभाल के रखने का फार्मूला याद आ गया ।जिसमें हम कहा करते थे कि दोस्ती में पॉज़िटिव और नेगेटिव सब अपनाओ तभी रिश्ता ठीक रहता है ।

हर सगर उम्दा ।

दाद ।

सादर ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on April 27, 2018 at 4:35pm

वाह आदरणीय नीलेश जी खूबसूरत ग़ज़ल कही...लेकिन प्यार पा लेना इतना भी आसान नहीं है...सिर्फ मजाक में लें।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 26, 2018 at 11:48pm

धन्यवाद आ. श्याम जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on April 26, 2018 at 11:48pm

धन्यवाद आ. डॉ आशुतोष जी 

Comment by Shyam Narain Verma on April 26, 2018 at 4:15pm
बहुत खूबसूरत अशआर ...दिल से बधाई 
Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 26, 2018 at 10:24am

आदरणीय भाई निलेश जी आजकल एक के बाद एक उम्दा ग़ज़लें पढने को मिल रही हैं ..रचना पर हार्दिक शुभकामनाओं के साथ सादर 

कृपया ध्यान दे...

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