For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अवलम्बन (लघुकथा)

'भीड़' से हासिल अपने अनुभवों के मुताबिक़ मरियल से बुज़ुर्ग मियां-बीवी अपने कटोरे लेकर बहुचर्चित धरने वाली जगह पर कुछ मिलने की उम्मीद से पहुंचे। काफी देर तक भीड़ और अपने खाली कटोरों को ताकते हुए वे मंचीय भाषण सुनते रहे। फिर निराश होकर वहां से लौटने लगे।
"चलो मियां, किसी बड़े मंदिर या गुरुद्वारे की तरफ़ चलते हैं!" अपनी अधनंगी से पोती को गोदी में लेते हुए बीवी ने शौहर से कहा।
"हां चलो, वहीं धरना देते हैं! भूखे रहने और बोलते रहने पर भी इनकी  कोई नहीं सुनता!" शौहर ने भूखे पेट आगे क़दम बढ़ाते हुए कहा।
"ऊपर वाले पर भी इनका भरोसा ख़त्म! बड़ी-बड़ी बातें करवा लो, बस!"
"हमारी ज़रूरतें, प्यास और भूख तो बस ऊपर वाले को दिखाई देती है। वही आसरा है; बिना भाषण दिए वह हमारी सुन लेता है।" बीवी के कंधे का सहारा लेकर शौहर ने कहा।
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 770

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 13, 2018 at 2:51am

इतने बढ़िया शब्दों में मेरी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब विजय निकोरे साहिब और जनाब तस्दीक़ अहमद ख़ान साहिब।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 11, 2018 at 6:36pm

जनाब शहज़ाद उस्मानी साहिब ,दिल की गहराइयों को छूती सुन्दर लघुकथा हुई है ,मुबारक बाद क़ुबूल फरमायें।

Comment by vijay nikore on April 11, 2018 at 11:56am

आपकी यह लघु कथा पढ़ी.. सच हैरान रह गया कि कैसे आपने यथार्थ को इतने कम कम शब्दों में प्रस्तुत किया है। हार्दिक बधाई इस रचना पर, आदरणीय शैख शहज़ाद उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 11, 2018 at 4:03am

बिल्कुल सही कहा आप सभी ने।‌ रचना पर समय देकर इसकी गहराई तक जाकर अनुमोदन कर अपने विचार साझा करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीलम उपाध्याय जी, जनाब समर कबीर साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब और जनाब  श्याम नारायण वर्मा साहिब।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 11, 2018 at 1:22am

बिल्कुल सही कहा आप सभी ने।‌ रचना पर समय देकर इसकी गहराई तक जाकर अनुमोदन कर अपने विचार साझा करने और हौसला अफ़ज़ाई के लिए तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीलम उपाध्याय जी, जनाब समर कबीर साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब, जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब और जनाब  श्याम नारायण वर्मा साहिब।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 11, 2018 at 1:19am

//एक जरूरतमन्द की जरूरत देखने-सुनने का समय किसी के पास नहीं है// ...

//बेबस लाचार और भूखों का एकमात्र सहारा तो बस नीली छतरी वाला ही है । भाषण देने वाले ..भूख-ग़रीबी का तांडव देखते हैं ।//...//समर्थ लोग भी केवल बातों से ही लोगों को बहलाते रहते हैं

Comment by Samar kabeer on April 10, 2018 at 6:04pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत ख़ूब वाह, बहुत उम्दा लघुकथा,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on April 10, 2018 at 4:12pm

आदरणीय शेख उस्मानी जी आदाब,

                              बहुत ही ताज़गीपूर्ण कथानक । बेबस लाचार और भूखों का एकमात्र सहारा तो बस नीली छतरी वाला ही है । भाषण देने वाले हरामी-कमीने बराबर राशन भी नहीं देते हैं । भूख-ग़रीबी का तांडव देखते हैं । दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें इस शानदार-दमदार लघुकथा के लिए ।

Comment by Shyam Narain Verma on April 10, 2018 at 10:30am
बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय, हार्दिक बधाई स्वीकारें
Comment by TEJ VEER SINGH on April 9, 2018 at 1:08pm

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन लघुकथा। गरीब और कमजोर तबके के प्रति समाज में दिन प्रति दिन बढ़ती उदासीनता का सटीक वर्णन।समर्थ लोग भी केवल बातों से ही लोगों को बहलाते रहते हैं।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service