For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

माँ के हाथों से जब खाया जाता है (ग़ज़ल)

अरकान-फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फ़ा

ऐसे रिश्ता यार निभाया जाता है
वक़्त पड़े तो ग़म भी खाया जाता है ।।

भूख लगी हो और न हो कुछ खाने को
बच्चे का फिर दिल बहलाया जाता है।।

लाख छुपाने से भी जब ये छुप न सके
फिर क्यों यारो इश्क़ छुपाया जाता है।।

तब होती है घर में बरकत ही बरकत
मुफ़लिस को महमान बनाया जाता है ।।

रुखा सूखा खाना लज़्ज़त दार लगे
माँ के हाथों से जब खाया जाता है ।।

चुंगल में सेठों के जो इक बार फँसे
सदियों तक फिर कर्ज चुकाया जाता है ।।

फूलों की ख़ुशबू का कोई जुर्म नहीं
भवरों पर इल्ज़ाम लगाया जाता है ।।

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 82

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by surender insan on January 12, 2018 at 2:49pm

वाह वाह बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करे भाई सुरेन्द्र जी।

Comment by Kalipad Prasad Mandal on January 12, 2018 at 9:45am

आ सुरेन्द्र नाथ सिंह जी बहुत सुन्दर ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 11, 2018 at 12:02pm

आ. भाई सुरेंद्र जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 10, 2018 at 10:05pm

वाह आदरणीय क्या शानदार ग़ज़ल कही..सादर

Comment by Samar kabeer on January 9, 2018 at 11:12pm

जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबफ पेश करता हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on January 9, 2018 at 9:27pm

वाह्ह्ह बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है भैया शेर दर शेर दाद स्वीकारें 

होती है घर में बरकत ही बरकत जब 

मुफ़लिस को महमान बनाया जाता है ।।--ऐसा करने से मफ्हूम ज्यादा साफ़ होगा 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 9, 2018 at 11:06am

आद0 मोहित मुक्त जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और हौसला अफजाई का बहुत बहुत आभार।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 9, 2018 at 11:05am

आद0 श्याम नारायण वर्मा जी सादर धन्यवाद

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on January 9, 2018 at 11:04am

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया। सादर

Comment by Mohit mishra (mukt) on January 8, 2018 at 10:02pm

बेहतरीन ग़ज़ल आदरणीय। बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, प्रदत्त विषय पर सुंदर रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post मकर संक्रान्ति (दोहा छंन्द)
"आ. भाई सुरेंद्र जी सुंदर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छंद आधारित गीत     नहीं राह पर चल रही जिंदगी | गगन के तले पल रही जिंदगी…"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आद0 सौरभ पांडेय जी सादर अभिवादन। आपका भी हार्दिक स्वागत है। सादर"
6 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"शक्ति छन्द सड़क के किनारे पड़ी बेटियाँ कहीं से उन्हें ना मिले रोटियाँ ग़रीबी विवशता रुलाती उन्हें सदा…"
6 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी आपका भी हार्दिक स्वागत है और इस आयोजन के लिए मेरी शुभकामनाएँ"
7 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रथम प्रस्तुति ... भुजंगप्रयात ...................................   कहीं खूब वर्षा हरा ही…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 81 in the group चित्र से काव्य तक
"चित्र से काव्य तक छंदोत्सव में आपका हार्दिक स्वागत है"
7 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आदरणीया राजेश कुमारी जी आदाब,                    …"
8 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"जनाब नीलेश साहिब , अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ"
8 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
" बहुत खूबसूरत गजल"
9 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की--ये अजब क़िस्सा रहा है ज़िन्दगी में
"वाह शानदार"
9 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service