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चलो ये मान लेते हैं... (ग़ज़ल)- बलराम धाकड़

1222, 1222, 1222, 1222

चलो ये मान लेते हैं कि दफ़्तर तक पहुँचती है।
मगर क्या वाकई ये डाक, अफ़सर तक पहुँचती है।

नज़र मेरी सितारों के बराबर तक पहुँचती है।
दिया हूँ, रोशनी मेरी हर इक घर तक पहुँचती है।

वहां कैसा नज़ारा है, चलो देखें, ज़रा सोचें,
नज़र सैयाद की चींटी के अब पर तक पहुँचती है।

शरीफ़ों की हवेली में ये आहें गूँजती तो हैं,
ज़रा धीरे भरो सिसकी, ये बाहर तक पहुँचती है।

किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी लेकिन,
नदी अपनी मशक्कत से समन्दर  तक पहुँचती है।

जुआ उसने नहीं खेला, कभी चाही नहीं सत्ता,
बताओ द्रौपदी क्यों कर के चौसर तक पहुँचती है।

तुम्हारे पैतरेबाजी से दिल्ली दूर रहती है,
हमारी चीख बस नक्सल से बस्तर तक पहुँचती है।

(मौलिक/अप्रकाशित)
--- बलराम धाकड़

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Comment by Balram Dhakar on December 30, 2017 at 12:50pm

सुख़न नवाज़ी का बहुत बहुत शुक्रिया, आदरणीया कल्पना जी। आपको ग़ज़ल पसंद आई, मेरा लिखना सार्थक हुआ।
सादर।

Comment by Balram Dhakar on December 30, 2017 at 12:49pm

धन्यवाद, आदरणीय महेंद्र जी।
सादर।

Comment by Balram Dhakar on December 30, 2017 at 12:48pm

धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण जी।
सादर।

Comment by Balram Dhakar on December 30, 2017 at 12:47pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी,ग़ज़ल में शिरक़त, सुखन नवाज़ी और हौसला अफ़जाई का बहुत बहुत शुक्रिया।
सादर।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on December 27, 2017 at 9:51pm

शरीफ़ों की हवेली में ये आहें गूँजती तो हैं,
ज़रा धीरे भरो सिसकी, ये बाहर तक पहुँचती है।

किसी से भी पता पूछा नहीं उसने कभी लेकिन,
नदी अपनी मशक्कत से समन्दर  तक पहुँचती है। बहुत खूब| हार्दिक बधाई आदरणीय बलराम जी |

Comment by Mahendra Kumar on December 27, 2017 at 10:13am

धाकड़ ग़ज़ल है आ. बलराम जी. आख़िरी शेर विशेष रूप से पसन्द आया. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 26, 2017 at 4:01pm

बेहतरीन गजल , हार्दिक बधाई बंधु ।

Comment by नाथ सोनांचली on December 26, 2017 at 9:42am

आद0 बलराम जी सादर अभिवादन। बहुत खूब। दिल के छूने वाले अशआर मिले पढ़ने को। बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर। सादर

Comment by Balram Dhakar on December 25, 2017 at 9:57pm

धन्यवाद, आदरणीय अजय जी।
सादर।

Comment by Ajay Kumar Sharma on December 25, 2017 at 9:12pm

बहुत सुन्दर गजल

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