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ग़ज़ल (ख़ौफे ख़ुदा नहीं है )

मफऊल -फाइलातुन -मफऊल -फाइलातुन


मेरे हबीब इस में तेरी खता नहीं है |
इल्ज़ामे बे वफ़ाई किस पर लगा नहीं है |

ओ प्यार के मुसाफिर इस पर भी ग़ौर कर ले
यह राहे ग़म है इस में कोई मज़ा नहीं है |

माली तेरी कमी से गुलशन में है तबाही
तू अब भी कह रहा है तुझको पता नहीं है |

दीदार मैं अभी तक चहरे का कर रहा हूँ
ठहरो अभी न जाओ यह दिल भरा नहीं है |

ग़मदीदा दिलसे उल्फ़त तुझसे न निभ सकेगी
कर तर्के इश्क़ कुछ भी अब तक हुआ नहीं है |

मेरे गुनाह पर तू मत कर इताब यारब
दुनिया के रंगो बू में कोई पारसा नहीं है |

करता है वो ही अपने दिलबर से बे वफ़ाई
तस्दीक़ जिसके दिल में ख़ौफे खुदा नहीं है |

इताब --नाराज़गी
(मौलिक व अप्रकाशित )

Views: 810

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 20, 2017 at 6:10pm

जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 20, 2017 at 9:16am
आदरणीय तस्दीक जी बड़ी उम्दा ग़ज़ल कही है बधाई..
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 20, 2017 at 9:15am

जनाब आशुतोष साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 19, 2017 at 10:43pm
आदरणीय तस्दीक़ जी बहुत उम्दा ग़ज़ल हुयी है।मेरे उर्दू के शब्द ज्ञान का इजाफा इस मंच से ही हुआ है आप ऐसे शब्दों के अर्थ भी लिख दिया करें तो मिहरबानी होगी। यह मेरा आपसे ही नहीं सभी बिद्वत जानो से निवेदन है दिवाली की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कर रहा हूँ इस शानदार रचना पर भी हार्दिक बधाई सादर
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 18, 2017 at 5:16pm
मुहतरम जनाब समर कबीर साहिब आदाब, आपकी ग़ज़ल में शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ,महरबानी
Comment by Samar kabeer on October 18, 2017 at 2:56pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल हे,बधाई आपको ।
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 18, 2017 at 1:51pm
जनाब नीलेश साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on October 18, 2017 at 11:35am

बहुत ख़ूब आ तस्दीक़ साहब ..बधाई 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on October 17, 2017 at 9:53pm
जनाब अफ़रोज़ साहिब ,ग़ज़ल में आपकी शिरकत और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Afroz 'sahr' on October 17, 2017 at 8:08pm
जनाब तस्दीक़ साहिब इस रचना पर बहुत बधाई आपको

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