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हाँ, तुमने प्यार सिखाया था:-मोहित मुक्त

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

सूखे तटबंधों को तुमने ,
प्रेम सलिल से सिंचित करके ,
वैरागी बंजर अंतर में ,
आसक्ति के अंकुर बोकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

जीवन के भूसर रंगों को ,

प्रेम वर्ण से हरित रंजित कर ,
अनल जलन से पीड़ित को ,
हिमानिल सा तन-मन छू-छूकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

चिर तृषार्त कोरे हृदय को ,
मधु-द्राक्षासव पान कराकर ,
रस-वंचित सूखे नीड़ ऊपर,
नव-कुसुम की कली खिलाकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Mohit mishra (mukt) on September 15, 2017 at 10:47am
आदरणीय गिरिराज जी रचना पर उपस्थिती से मन प्रसन्न हो गया । आपकी बात सर आँखो पर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 15, 2017 at 10:35am

आदरनीय मोहित भाई , अच्छी लगी आपकी कविता , हार्दिक बधाइयाँ ।  आदरणीय समर भाई जी से मै भी सहमत हूँ ,... प्रीत जगाई थी .. कहना चाहिये ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 11:01pm

सम्मानीय  ARUNESH KUMAR 'Arun जी कविता पर ध्यान देने और गहन अवलोकन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद 

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 10:59pm

आदरणीय समर सर रचना का अवलोकन करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। तुमने के अनुसार मैंने जगाया शब्द प्रयोग किया। प्रीत स्त्रीलिंग है पर यहाँ कर्ता नहीं है. बाकि आप मार्गदर्शन करें तो अत्यंत हर्ष होगा। सादर 

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 10:56pm

आदरणीय आरिफ जी स्नेहाशीष के लिए शुक्रिया। आपकी बात का ध्यान रखूँगा 

Comment by ARUNESH KUMAR 'Arun' on September 12, 2017 at 8:41pm

कविता बहुत अछी लिखी है। आदरणीय आपने संस्कृतनिष्ठ श्ब्दो  का प्रयोग किया है। बहुत अच्छा।

Comment by Samar kabeer on September 12, 2017 at 2:40pm
जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
'तुमने प्रीत जगाया था',या 'तुमने प्रीत जगाई थी'?
Comment by Mohammed Arif on September 12, 2017 at 2:06pm
प्रिय मोहित जी आदाब, प्रेम के रंग में सराबौर बेहतरीन रचना । इस हेतु हार्दक बधाई स्वीकार करें । कठिन शब्दों से बचर भी आप अपने पनी बात सरलता से कह सकते हैं ।
Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 1:35pm

आदरणीय श्वेता जी धन्यवाद 

Comment by Sweet Panday on September 12, 2017 at 1:08pm
बहुत अच्छी कविता है

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