For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था:-मोहित मुक्त

हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

सूखे तटबंधों को तुमने ,
प्रेम सलिल से सिंचित करके ,
वैरागी बंजर अंतर में ,
आसक्ति के अंकुर बोकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

जीवन के भूसर रंगों को ,

प्रेम वर्ण से हरित रंजित कर ,
अनल जलन से पीड़ित को ,
हिमानिल सा तन-मन छू-छूकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

चिर तृषार्त कोरे हृदय को ,
मधु-द्राक्षासव पान कराकर ,
रस-वंचित सूखे नीड़ ऊपर,
नव-कुसुम की कली खिलाकर ,
तुमने प्रीत जगाया था ,
हाँ, तुमने प्यार सिखाया था।

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 89

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 15, 2017 at 10:47am
आदरणीय गिरिराज जी रचना पर उपस्थिती से मन प्रसन्न हो गया । आपकी बात सर आँखो पर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on September 15, 2017 at 10:35am

आदरनीय मोहित भाई , अच्छी लगी आपकी कविता , हार्दिक बधाइयाँ ।  आदरणीय समर भाई जी से मै भी सहमत हूँ ,... प्रीत जगाई थी .. कहना चाहिये ।

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 11:01pm

सम्मानीय  ARUNESH KUMAR 'Arun जी कविता पर ध्यान देने और गहन अवलोकन के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद 

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 10:59pm

आदरणीय समर सर रचना का अवलोकन करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया। तुमने के अनुसार मैंने जगाया शब्द प्रयोग किया। प्रीत स्त्रीलिंग है पर यहाँ कर्ता नहीं है. बाकि आप मार्गदर्शन करें तो अत्यंत हर्ष होगा। सादर 

Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 10:56pm

आदरणीय आरिफ जी स्नेहाशीष के लिए शुक्रिया। आपकी बात का ध्यान रखूँगा 

Comment by ARUNESH KUMAR 'Arun' on September 12, 2017 at 8:41pm

कविता बहुत अछी लिखी है। आदरणीय आपने संस्कृतनिष्ठ श्ब्दो  का प्रयोग किया है। बहुत अच्छा।

Comment by Samar kabeer on September 12, 2017 at 2:40pm
जनाब मोहित मुक्त जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
'तुमने प्रीत जगाया था',या 'तुमने प्रीत जगाई थी'?
Comment by Mohammed Arif on September 12, 2017 at 2:06pm
प्रिय मोहित जी आदाब, प्रेम के रंग में सराबौर बेहतरीन रचना । इस हेतु हार्दक बधाई स्वीकार करें । कठिन शब्दों से बचर भी आप अपने पनी बात सरलता से कह सकते हैं ।
Comment by Mohit mishra (mukt) on September 12, 2017 at 1:35pm

आदरणीय श्वेता जी धन्यवाद 

Comment by Sweet Panday on September 12, 2017 at 1:08pm
बहुत अच्छी कविता है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Rakshita Singh posted a blog post

तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...

तुम्हारे इश्क ने मुझको, क्या क्या बना दिया... कभी आशिक,कभी पागल- कभी शायर बना दिया।।अब इतने नाम हैं…See More
2 minutes ago
Mohammed Arif posted a blog post

कविता--फागुन

फागुनअलसाई हुई भोर कोफागुनी दस्तक कीगंध ने महका दियामेरे अंदर भी बीज अंकुरित होने लगेतुम्हारे…See More
2 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'

1222 1222 1222 1222 अभी ये आँख बोझिल है निहाँ कुछ बेक़रारी है न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी…See More
2 minutes ago
KALPANA BHATT ('रौनक़') posted a blog post

एक और रत्नाकर(लघुकथा)

रत्नाकर जंगलों में भटकता, और आने-जाने वालों को लूटता | यही तो उसका पेशा था| नारद-मुनी भेस बदलकर…See More
3 minutes ago
Mohammed Arif is now friends with Ramavtar Yadav, Sahar Nasirabadi, vijay nikore, Sushil Sarna and 5 more
41 minutes ago
पीयूष कुमार द्विवेदी is now a member of Open Books Online
3 hours ago
Rakshita Singh commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दबे  पाप  ऊपर  जो  आने  लगे  हैं- गजल
"आदरणीय लक्ष्मण जी, नमस्कार। बहुत ही सुन्दर रचना, हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
6 hours ago
Rakshita Singh commented on Rakshita Singh's blog post तुम्हारे इश्क ने मुझको क्या क्या बना दिया ...
"आदरणीय नादिर जी, बहुत बहुत आभार। आपके द्वारा बताई त्रुटी को मैं शीघ्र ही सुधार लेती हूँ।"
7 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on KALPANA BHATT ('रौनक़')'s blog post धरती पुत्र (लघुकथा)
"बेहतरीन विषय और कथा.."
14 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Anita Maurya's blog post बोल देती है बेज़ुबानी भी
"बहुत खूब"
14 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...न जाने कैसे गुजरेगी क़यामत रात भारी है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"शुक्रिया आदरणीय श्याम नारायण जी...सादर"
17 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post तुम्हारी कसम....
"आ. भाई सुशील जी, बेहतरीन रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
17 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service