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तरही ग़ज़ल (है अजब चीज मुहब्बत मुझे मालूम न था)

ख़ुद से हो जाएगी नफरत मुझे मालूम न था
है अजब चीज़ मुहब्बत, मुझे मालूम न था ||

गम से हो जायेगी उल्फ़त मुझे मालूम न था
ऐसी होगी मेरी क़िस्मत मुझे मालूम न था ||

दूध में कोई नहाये कोई भूखा ही रहे
ऐसे होती है सियासत मुझे मालूम न था ||

ख़्वाब में रोज़ ही मिलते थे मग़र, यार मेरे
ख़्वाब होगा ये हक़ीक़त मुझे मालूम न था ||

वहम इक पाल लिया था मेरे दिल ने यूँ ही
थी उसे हँसने की आदत मुझे मालूम न था ||

यार कहता था ग़ज़ल वक़्त बिताने को कभी
आगे लग जायेगी ये लत मुझे मालूम न था ||

हुस्न की बिजली गिरी और हुए लोग तबाह
*यूँ भी आती है कयामत मुझे मालूम न था*||

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on September 6, 2017 at 4:18am
आद0 बृजेश कुमार ब्रज जी सादर अभिवादन, आपकी प्रशंसा से अभिभूत हो।।हृदय से आभार आपका।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 5, 2017 at 11:11pm
वाह वाह आदरणीय सुरेन्द्र जी इस खूबसूरत ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई..
Comment by नाथ सोनांचली on September 5, 2017 at 5:06pm
आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिये हृदय से आभार।
Comment by नाथ सोनांचली on September 5, 2017 at 5:04pm
आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और प्रोत्साहन के लिए हार्दिक आभार।
Comment by Mahendra Kumar on September 5, 2017 at 4:10pm

वहम इक पाल लिया था मेरे दिल ने यूँ ही
थी उसे हँसने की आदत मुझे मालूम न था ...वाह!

बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है आपने आ. सुरेन्द्र जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 5, 2017 at 4:05pm
दूध में कोई नहाये कोई भूखा ही रहे

बहुत खूब ..आ. भाई सुरेंद्र जी हार्दिक बधाई ।
Comment by नाथ सोनांचली on September 5, 2017 at 3:21pm
आद0 समर साहब सादर प्रणाम, दाद और मुबारकबाद के लिए शुक्रिया। आपको पसंद आई, लिखना सार्थक हुआ।
Comment by Samar kabeer on September 5, 2017 at 2:09pm
जनाब सुरेन्द्र नाथ सिंह जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by नाथ सोनांचली on September 5, 2017 at 1:23pm
भाई आद0 मोहम्मद आरिफ जी सादर आभार, शैर पसंद आया, लिखना सार्थक हुआ
Comment by Mohammed Arif on September 5, 2017 at 10:55am
दूध में कोई नहाये कोई भूखा ही रहे
ऐसे होती है सियासत मुझे मालूम न था || वाह! क्या ख़ूब शेर हुआ है । बहुत ही प्रासंगिक
।शेर दर शेर दाद के साथ मुबारकबाद आदरणीय सुरेंद्रनाथ जी ।

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