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नेम प्लेट ...

कुछ देर बाद
मिल जाऊंगा मैं
मिट्टी में
पर
देखो
हटाई जा रही है
निर्जीव काल बेल के साथ
लटकी
मेरी ज़िंदा
मगर
उखड़े उखड़े अक्षरों की
एक अजीब सी
चुप्पी साधे
पुरानी सी 
नेम प्लेट

मुझसे पहले 

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 1065

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Comment by Sushil Sarna on August 31, 2017 at 5:01pm

आदरणीय फूल सिंह जी सृजन के भावों को आत्मीय प्रशंसा से शोभित करने का दिल से आभार। 

Comment by PHOOL SINGH on August 31, 2017 at 4:08pm

बेहतरीन रचना

Comment by Sushil Sarna on August 3, 2017 at 5:37pm

आदरणीय C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार।

Comment by C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" on August 1, 2017 at 1:39pm

सच्चाई को खूबसूरती से बयाँ करती इस भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई सुशील सरना जी | 

Comment by Sushil Sarna on July 24, 2017 at 3:22pm

आदरणीय  vijay nikore   जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। 

Comment by vijay nikore on July 24, 2017 at 11:44am

बहुत खूब ! सुन्दर भावाभिव्यक्ति । हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on July 22, 2017 at 7:15pm

आदरणीय Mahendra Kumar   जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से आभार। 

Comment by Mahendra Kumar on July 20, 2017 at 9:26pm

बहुत ही बढ़िया प्रस्तुति है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:38pm

आदरणीय सौरभ सर , आपको सप्रेम प्रणाम ... एक मुद्दत के बात आप का आना तृषित हृदय को तृप्ति का आभास दे गया। हार्दिक आभार। सृजन को अपने आत्मीय प्रशंसात्मक शब्दों से अलंकृत करने का दिल से आभार। इंगित त्रुटि वास्तव में टंकण त्रुटि है। इस ओर मेरा ध्यान आकर्षित करने का हार्दिक आभार। मैं इसे अभी एडिट कर पुनः प्रेषित करता हूँ। अनुजों पर अपना स्नेह बनाएं रखें। आपके प्रश्न का उत्तर यहां पर नहीं है। सादर ....

Comment by Sushil Sarna on July 17, 2017 at 4:38pm

आदरणीय समर कबीर साहिब,. आदाब ... सृजन आपकी सहमति देती प्रशंसात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभारी है। 

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