For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं

मफ़ाइलुन फ़इलातुन मफ़ाइलुन फ़ेलुन/फ़इलुन

ये काम आज के एह्ल-ए-जदीद करते हैं
ग़ज़ल के मुँह पे तमांचा रसीद करते हैं

लगे हुए तो हैं पैहम इसी तग-ओ-दौ में
हमें वो देखिये किस दिन शहीद करते हैं

ये नफ़रतें तो महज़ आरज़ी हैं,सच ये है
यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं

मुसालहत की अगर आरज़ू है तुमको भी
तो आओ बैठ कर गुफ़्त-ओ-शुनीद करते हैं

वफ़ा से दूर तलक जिन को वास्ता ही नहीं
ये लोग उनसे इसी की उमीद करते हैं

तू भूल से भी "समर" मेरा ज़िक्र मत करना
वो मेरे नाम से नफ़रत शदीद करते हैं

____

एह्ल-ए-जदीद :- नई बात लिखने वाले
तमांचा रसीद :- चाँटा मारना
पैहम :- मुसलसल
तग-ओ-दौ :- कोशिश
आरज़ी :- कुछ दिन के लिये
मुसालहत :- समझौता
गुफ़्त-ओ-शुनीद :- बात चीत
शदीद :- सख़्त

--समर कबीर
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1194

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 10, 2017 at 11:16pm
आ. भाई समर जी इस सुन्दर गजल के लिए भहुत बहुत बधाई।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on July 10, 2017 at 11:07pm
बहुत ही शानदार और सीख देती हुई ग़ज़ल के लिए आपका हार्दिक आभार आदरणीय..सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 10, 2017 at 3:01pm

आदरनीय समर भाई , बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने .. कहन में हम जैसों के सीखने के लायक बहुत कुछ है । आपको हार्दिक बधाइयाँ ।

पर हाँ ... मतले के विचारों से मै सहमत नहीं हूँ ... लेकिन विचार आपकी स्वतंत्रता है ... कहन के लिये बधाइयाँ ।

 एक शेर कहने की कोशिश की है .. ज़दीद ..और रवायती गज़ल पर ..

हरेक चीज़ नयी हो गयी है ख़ुद की , तब

गज़ल रवायतों की बेड़ियाँ ही क्यूँ पहने ?

Comment by नाथ सोनांचली on July 10, 2017 at 1:53pm
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब, बेहतरीन ,उम्दा और ग़ज़ल लेखन की प्रेरणा देती ग़ज़ल । हर शे'र बहुत कुछ कहता है । कुछ शे'र तो बहुत लाजवाब हैं-

ये काम आज के एह्ल-ए-जदीद करते हैं
ग़ज़ल के मुँह पे तमांचा रसीद करते हैं
मतले में बेहतरीन कटाक्ष के साथ एक इशारा भी

बहुत बहुत नमन वन्दन सँग मुबारकबाद पेश करता हूँ, सादर।
Comment by Shyam Narain Verma on July 10, 2017 at 12:07pm
बेहद उम्दा ...बहुत बहुत बधाई आप को आदरणीय | सादर 
Comment by Mohammed Arif on July 10, 2017 at 10:31am
आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब आदाब, बेहतरीन ,उम्दा और ग़ज़ल लेखन की प्रेरणा देती ग़ज़ल । हर शे'र बहुत कुछ कहता है । कुछ शे'र तो बहुत लाजवाब हैं-
ये नफ़रतें तो महज आरज़ी है, सच ये है
यहाँ के लोग महब्बत शदीद करते हैं ।
शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
10 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
21 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service