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ग़ज़ल(रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक)

221 1221 1221 122

रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक,
खुशियों का ये दे सबको असर ईद मुबारक।

घुल आज फ़िज़ा में हैं गये रंग नये से,
कहती है ये खुशियों की सहर ईद मुबारक।

पाँवों से ले सर तक है धवल आज नज़ारा,
दे कर के दुआ कहता है हर ईद मुबारक।

सब भेद भुला ईद गले लग के मनायें,
ये पर्व रहे जग में अमर ईद मुबारक।

ये ईद है त्योहार मिलापों का अनोखा,
दूँ सब को 'नमन' आज मैं कर ईद मुबारक।

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on June 27, 2017 at 11:43am
वाह वाह आदरणीय बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल
Comment by Samar kabeer on June 27, 2017 at 10:51am
जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,ईद के मौक़े पर अच्छी ग़ज़ल से नवाज़ा आपने मंच को,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।
Comment by Mahendra Kumar on June 27, 2017 at 9:04am

"रमजान गया आई नज़र ईद मुबारक, खुशियों का ये दे सबको असर ईद मुबारक।" वाह! ईद पर बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही है आपने आ. बासुदेव जी. मेरी तरफ से हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Mohammed Arif on June 26, 2017 at 8:43pm
आदरणीय वासुदेव जी आदाब, सबसे पहले आपको ईद की दिली मुबारकबाद । हर शे'र असरदार । ईद का बेहतरीन चित्रण । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 26, 2017 at 7:00pm

वा वाह क्या बात कही खूब गजल में

त्यौहार असरदार तुम्हे ईद मुबारक

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