For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

***असली कीमत***(लघुकथा)राहिला

उस जबरदस्त भूकंप के शांत होने पर शुभा ने खुद को अपनी नन्ही बिटिया के साथ जाने कितने ही नीचे मलवे में दबा पाया।भाग्य से छत का एक बड़ा सा हिस्सा कुछ ऐसे गिरा कि एक गार सी बन गयी।और चंद सांसे उधार मिल गयी ।दोनों सहमी सी ,आपस में सिमटी हुई मदद की उम्मीद में एक दूसरे का सहारा बनी हुई थीं।लेकिन जब काफी समय गुजर गया और किसी का हाथ मदद के लिए आता नहीं दिखाई पड़ा तो घोर निराशा ,डर और सामने बाहें फैलाये मौत को देख कर आंखों से बेबसी बरस पड़ी ।
"मम्मा!भूख लगी है।"नन्ही रिया ने उस का ध्यान खींचा।
"हां बेटा अभी देती हूँ।"आदतन उसके मुंह से निकल गया।परन्तुअगले ही पल यथार्थ को देख,वह रो पड़ी और रिया को कस कर कलेजे से लगा लिया।तभी उसकी निगाह कोने में पड़े कचड़े के डिब्बे पर पड़ी ,सुबह रसोई में ही तो थी जब ये हादसा हुआ ।याद आया उसने रात का बचा हुआ कुछ खाना डाला था इसमें।लपक कर उसने डिब्बे को खोला ।कुछ रोटियां ही थीं जो खराब नहीं हुई थीं ।
पूरे दो दिन तक उन बासी रोटीयों का एक -एक निवाला अमृत बन कर रिया को जीवन देता रहा ।अंत में मदद की रोशनी ने जैसे ही उस ज़िंदा कब्र में प्रवेश किया ,तो खुशी से पूरी तरह लस्त और बेहाल शुभा अपनी सारी शक्ति बटोर कर चिल्लाई।
"हेल्प...हेल्प..।"
और आख़िरकार ज़िन्दगी जीत गयी।
"ये कोई कहानी नहीं ,बल्कि मेरी आपबीती है।मैं शर्मिंदा हूँ अन्न के हर उस कण से,जिसको मैंने कचरे के डिब्बे में डाल कर अपमान किया था ।उस एक -एक अन्न के कण की असली कीमत मुझे उस दिन पता चली ।जिसकी बदौलत आज मेरी बच्ची मेरे पास सही सलामत है वरना....!" कहते -कहते हाथ में पकड़ा हुआ रूमाल आँखों की नमी को सोखने लगा ।
"तो इसलिए आपने इस विशेष कुकिंग क्लासेज की शुरुआत की?"
"जी हाँ!तब ही से मैंने सोच लिया था कि किसी भी हालत में बचा हुआ खाना ना फैंकूँगी और ना ही फैंकने दूंगी।बस इसी दिशा में शुरुआत हो गयी बचे खाने से नये-नये व्यंजन बनाने की कुकिंग क्लास की। " एक साक्षात्कार के दौरान शुभा ने पत्रकार से कहा।

Views: 301

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rahila on July 11, 2017 at 6:56am
आदरणीय रवि सर जी!आपको रचना पसंद आई ।बहुत शुक्रिया।सादर
Comment by Rahila on July 11, 2017 at 6:55am
आदरणीय रोहित जी!,आदरणीय आरिफ़ साहब,आदरणीया राजेश दीदी!,आदरणीय मिश्रा सर जी! आप सब का बहुत आभार रचना को सराहने हेतु और विचार रखने के लिए।सादर
Comment by Ravi Prabhakar on June 18, 2017 at 11:32am

आदरणीय राहिला जी, अन्‍न का आदर करने का सार्थक संदेश प्रेषित करती लघुकथा अच्‍छी लगी। लघुकथा की प्रैजेंटेशन ने बहुत प्रभावित किया। 

"मम्मा!भूख लगी है।"नन्ही रिया ने उस का ध्यान खींचा।
"हां बेटा अभी देती हूँ।"आदतन उसके मुंह से निकल गया।

ये संवाद बहुत ही स्‍वभाविक है इसलिए यह विशेष रूप में प्रभावित करने में सफल रहा।

लघुकथा के अंत में -

"जी हाँ!तब ही से मैंने सोच लिया था कि किसी भी हालत में बचा हुआ खाना ना फैंकूँगी और ना ही फैंकने दूंगी।बस इसी दिशा में शुरुआत हो गयी बचे खाने से नये-नये व्यंजन बनाने की कुकिंग क्लास की। "

यह लघुकथा को एक अलग ही ऊँचाइयों पर ले गया।

सादर शुभकामनाएं ।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 14, 2017 at 3:49pm

आदरणीया राहिला जी आपकी लघुकथाओं का अलहदा अंदाज बहुत भाता है शानदार सन्देश को जिस खूबी से आपने प्रेषित किया है काबिले तारीफ़ है इस शानदार रचना के लिए ढेर सारी बधाई सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 14, 2017 at 9:29am

बहुत सुन्दर सार्थक संदेशप्रद लघु कथा  है सभी को खाने के एक एक कण की कीमत जाननी चाहिए .बहुत बहुत बधाई इस सुन्दर प्रस्तुति हेतु प्रिय राहिला जी 

Comment by Mohammed Arif on June 13, 2017 at 6:38pm
आदरणीया राहिला जी आदाब, संदेशप्रद कथा । हार्दिक बधाई स्वीकार करें । वर्तनीगत ढेरों अशुद्धियाँ सर्वत्र व्याप्त है । देखिएगा ।
Comment by रोहित डोबरियाल "मल्हार" on June 13, 2017 at 11:39am

वाकई लोग खाने की असली कीमत नही जानते ,.......अपने हृदय की गहराई से यह लेख लिखा है ....बहुत खूब सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Tasdiq Ahmed Khan commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"मुहतरम जनाब समर साहिब आदाब, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है , मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l "
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब , ग़ज़ल में आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I "
1 hour ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल पर आपकी खूबसूरत प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत…"
1 hour ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 लक्ष्मण धामी साहब ग़ज़ल तक आने के लिए तहेदिल से शुक्रिया ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई नवीन जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 महेंद्र कुमार साहब आपकीं बात से भी सहमत हो गया । हार्दिक आभार ।"
2 hours ago
Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आ0 कबीर सर बहुत बहुत आभार के साथ नमन । मैं आपसे सहमत हो गया सर । "
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Samar kabeer's blog post 'वतन को आग लगाने की चाल किसकी है'
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । इस बेहतरीन गजल के लिए कोटि कोटि हार्दिक बधाईयाँ।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on विनय कुमार's blog post अपनों का दर्द- लघुकथा
"आ. भाई विनय जी, अच्छी कथा हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
2 hours ago
सुचिसंदीप अग्रवालl commented on सुचिसंदीप अग्रवालl's blog post हास्य कुंडलिया
"आ लक्ष्मण मुसाफ़िर जी, अतिशय आभार आपका।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post ग़ज़ल (दिल ने जिसे बना लिया गुलफाम दोस्तो)
"आ. भाई तस्दीक अहमद जी, सुंदर गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

मेरे आसमान का चाँद ...

आसमान का चाँद :शीत रैन की धवल चांदनी में बैचैन उदास मन बैठ जाता है उठकर करने कुछ बात आसमान के चाँद…See More
4 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service