For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ना जाने दिल क्यों खोजता है (कविता):- मोहित मुक्त

ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|

वो खुशबु तेरे बालों की,
वो लाली तेरे गालों की,
दृग कजरारे तेज कटार से ,
लब पगे है जो रसधार से,
चंचल मीठी मुस्कान को ,
ज्यो साधु खोजे भगवन को ,
तुम ईष्ट हो या प्रेयसी,
मन दो पल रुक से सोचता है|
ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|

वो लम्हे कितने प्यारे थे,
आप जो साथ हमारे थे,
थोड़ी बहुत ख़ामोशी थी,
बस पत्तों की सरगोशी थी,
जब सांसे अपनी टकराती थी,
क्या अदा से तुम शर्माती थी,
तब मस्त हो बरसा था सावन ,
हो उन्मुक्त हंसा था जैसे गगन ,
हंस के खिले थे बसंती फूल ,
मखमल जैसे बन गए थे शूल ,
जाने पतझङ फिर क्यों आया,
मन दो पल रूक ये सोचता है|
ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|

क्यूँ लम्हे ना थम जाते हैं?
क्यूँ वापस लौट ना आते हैं?
क्यूँ खोता है प्यार यहाँ ?
क्यूँ लुटता है संसार यहाँ?
क्यूँ दर्द दिलों में होता है ?
क्यूँ कोई अपना खोता है ?
क्यूँ रूह दीवानी हो जाये ?
क्यूँ साँस बेगानी हो जाये?
क्यूँ पागल दिल मचलता है?
क्यूँ अधूरापन सा खलता है?
तुम छोड़ मुझे क्यों चली गयीं?
मन दो पल रुक से सोचता है |
ना जाने दिल क्यों ढूंढता है|
ना जाने दिल क्यों ढूंढता है...


;-मौलिक और अप्रकाशित

Views: 93

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Mohit mukt on March 21, 2017 at 6:45pm

आदरणीय  गिरिराज भंडारी जी रचनावलोकन और प्रोत्साहन के लिए तहे दिल से शुक्रिया 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 21, 2017 at 3:27pm

आदरनीय मोहित भाई , अच्छी भाव पूर्ण कविता रची है .... हार्दिक बधाई ।

Comment by Mohit mukt on March 20, 2017 at 10:40pm

आदरणीय सतविंद्र जी रचना पढ़ने और उत्साह वर्धन के लिए  धन्यवाद् 

Comment by सतविन्द्र कुमार on March 20, 2017 at 8:33pm
हारदिक बधाई आदरणीय मोहित मुक्त जी,इस सुन्दर प्रस्तुति के लिए
Comment by Mohit mukt on March 20, 2017 at 9:13am

माननीय  Sheikh Shahzad Usmani जी प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on March 19, 2017 at 3:30pm
जज़्बात के सवालात कविता के माध्यम से! बहुत सुंदर रचना हेतु सादर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ आपको आदरणीय मोहित मुक्त जी।
Comment by Mohit mukt on March 18, 2017 at 6:51pm

माननीय आरिफ जी उत्साह वर्धन के लिए शुक्रिया | आपकी बात का ख्याल रखूँगा सदर 

Comment by Mohammed Arif on March 18, 2017 at 6:38pm
आदरणीय मोहित मुक्त जी आदाब, आपकी ओबीओ पर पहली रचना से परिचित हो रहा हूँ , आपके प्रयास की जितनी प्रशंसा की जाय कम है । आपकी रचना प्रेम के रंग से सराबोर है । सुंदर भावों की बगिया खिली है । सभी पुष्प अपनी महक और छटा बिखेर। रहे हैं । काश, आपके ये भाव किसी गीत या ग़ज़ल में आबद्ध होते तो रचना में निखार आ जाता । ख़ैर आपका प्रयास अच्छा है । बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Saurabh Pandey's blog post ग़ज़ल : भइ, आप हैं मालिक तो कहाँ आपसे तुलना
"वाहहह आ0 सौरभ जी ईद के पावन मौके पर क्या जानदार ग़ज़ल कही है। एक एक शेर लाजबाब। शेर दर शेर दाद हाजिर…"
16 minutes ago
Mahendra Kumar replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"वो चाँद मेरा आता है बस ईद के ही दिन दुनिया के जिसने सीख लिए हैं चलन तमाम ईद के मुक़द्दस अवसर आपको और…"
24 minutes ago
surender insan posted a blog post

ग़ज़ल

उसकी मौज़ में रहता हूँ।मैं दरिया सा बहता हूँ।।ख़ुद हो शेर अगर आमद।तभी ग़ज़ल कहता हूँ।।सच्ची बात कहूँ जब…See More
3 hours ago
Mohammed Arif replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"अपनों से गले मिलने ईद आ गई देखो,घर-आँगन में ख़ुशियाँ छा गई । ओबीओ साहित्यिक परिवार के समस्त सदस्यों…"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post क़दम उठाने से पहले विचार करना था
"जनाब भाई विजय निकोर जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और सुख़न नवाज़ी के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।"
4 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post क़दम उठाने से पहले विचार करना था
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।"
4 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
" बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय  सुनील प्रसाद(शाहाबादी) जी ! सादर "
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज जी ,रचना पर आपके समर्थन के लिए आपका आभार ! सादर "
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव सर ,आपकी सीख से काफी कुछ समझ आ गया है , पुनः…"
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"आदरणीया  rajesh kumari जी ,हार्दिक आभार आपका ,आपकी बातों को संज्ञान में लेते हुए…"
10 hours ago
Hari Prakash Dubey commented on Hari Prakash Dubey's blog post कागज़ की नाव :कहानी
"सहमत आदरणीय  Ravi Prabhakar सर ! सादर"
10 hours ago
surender insan commented on दिनेश कुमार's blog post ग़ज़ल -- भले मैं कभी मुस्कुराया नहीं ( दिनेश कुमार )
"वाह वहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है जी। शेर दर शेर दिली दाद कबूल फरमाये जी।"
10 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service