For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शंका और विश्वास के दोराहे पर 

मन में पीली धुंधली उदास गहरी

बेमाप वेदना यथार्थों की लिए

स्वीकार कर लेता हूँ सभी झूठ 

कि जाने कब कहाँ किस झूठ में भी

किसी की विवशता दिख जाए, या

मिल जाए उसकी सच्चाई का संकेत

कि जानता हूँ मैं, यह ठंडी पुरवाई

यह फैली हुई धूप नदी-झील-तालाब

सब कहते हैं  ...

वह कभी झूठी नहीं थी

ऊँची उठती है कोई उभरती कराह

स्वपनों के अनदेखे विस्तार में

विद्रोह करते हैं मेरे अन्त:स्वर

बुलबुलों-से फूट जाते हैं मेरे संक्ल्प

और लौट आता हूँ मैं उसी द्वार पर

झंकृत हुए थे जहाँ मेरी सूनी सितार के तार

और फिर कुछ हुआ, बहुत बुरा हुआ

वह तार नियति ने निर्दयता से कस दिए इतने

कि तकलीफ़ भरी छाती में है अभी तक

कोई गड्ढा गहरा ...

चारों तरफ़ बेचैनी !

झूठ ? कैसा झूठ ? ... दोष मेरा ही होगा 

 ------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 91

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on March 16, 2017 at 2:31pm

वह तार नियति ने निर्दयता से कस दिए इतने
कि तकलीफ़ भरी छाती में है अभी तक
कोई गड्ढा गहरा ...
चारों तरफ़ बेचैनी !
झूठ ? कैसा झूठ ? ... दोष मेरा ही होगा
वाह अंतर्द्वंद की अप्रतिम प्रस्तुति सर .... हमेशा की तरह दिल को छूती इस दिलकश प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई सर. .

Comment by vijay nikore on March 14, 2017 at 3:12pm

रचना की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी।

Comment by vijay nikore on March 14, 2017 at 3:09pm

रचना की सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह जी।

Comment by vijay nikore on March 12, 2017 at 3:20pm

रचना पर आपसे इतना मान मिलना म्रेरे लिए पारितोषक है। आपका हार्दिक आभार, आदरणीय समर भाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 9, 2017 at 11:37am

आदरनीय बड़े भाई विजय जी , सच्चा प्यार विवश ही होता है शयद , और इसीलिये कभी इससे इतर सोच ही नही पाता है । आपकी कविता मुझे एक विवश प्रेम की आत्मकथा लगी । बहुत खूब ... हार्दिक बधाइयाँ

Comment by Mahendra Kumar on March 8, 2017 at 9:34pm
हमेशा की तरह एक और बढ़िया कविता। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए आदरणीय विजय जी। सादर।
Comment by Mohammed Arif on March 8, 2017 at 4:34pm
आदरणीय विजय निकोरे जी आदाब, बहुत बेबाकी से आच्छादित कविता की प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकार करें ।
Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 8, 2017 at 4:19pm
आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन, बहुत ही प्रभावशाली सर्जना हुयी है, आपको बधाई निवेदित हैं
Comment by Samar kabeer on March 8, 2017 at 3:43pm
जनाब विजय निकोर जी आदाब,हमेशा की तरह बहुत प्रभावशाली कविता लिखी है आपने,कुछ झूट ऐसे भी होते हैं जिन्हें बोलने के लिये हम विवश होते हैं,और उस झूट में सच का जो संकेत छुपा होता है उसे साधारण आदमी नहीं संजः पाता, ये तो कवि की पैनी नज़र ही होती है जो उसे सात पर्दों के पीछे भी पहचान लेती है ।
बहुत ख़ूब वाह वाह इस बेश क़ीमती कविता के लिये दिल से ढेरों बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Seema mishra commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )
" आदरणीय गिरिराज जी शानदार ग़ज़ल, मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ| सादर "
24 minutes ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post ग़ज़ल (इंसानियत)
"आदरणीय वासुदेव भाई , गज़ल अच्छी हुई है ,  आपने बहर निभाने मे  सफल रहे आप । शब्दों का चुनाव…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय सतविन्द्र भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभार ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल -तड़प तड़प के क्यूँ वो बाहर निकले हैं - ( गिरिराज )
"आदरणीय वासुदेव भाई , हौसला अफज़ाई का तहे दिल से शुक्रिया ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल....अब कहाँ गुम हुये आसरे भीड़ में
"आदरनीय बृजेश भाई , अच्छी गज़ल कही है आपने , हार्दिक बधाइयाँ स्वीकार करें । मेरा सोचना है कि .. अगर…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"आदरनीय नवीन भाई , खूबसूरत गज़ल के लिये बधाइयाँ आपको । आ,रवि भाई की बातों का ख्याल कीजियेगा । -- कुछ…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी posted a blog post

ग़ज़ल -चुप कह के, क़ुरआन, बाइबिल गीता है - ( गिरिराज )

22   22   22   22   22   2हर चहरे पर चहरा कोई जीता हैऔर बदलने की भी खूब सुभीता है सांप, सांप को…See More
4 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

ई-मौजी ...

ई-मौजी ...आज के दौर में क्या हम ई-मौजी वाले स्टीकर नहीं हो गए ?भावहीन चेहरे हैं संवेदनाएं…See More
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sushil Sarna's blog post एक शब्द ....
"आदरनीय सुशील भाई , खूब सूरत दार्शनिक कविता के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Mohit mukt's blog post अरे पगली (याचना} (कविता ):- मोहित मुक्त
"आदरनीय मोहित भाई , प्रेम भाव से ओत प्रोत कविता के लिये बधाई । शब्दों की वर्तनी का ख्याल कीजिये ...…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post दशा और दिशा [लघुकथा] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"बहुत खूब ... मै इस् विधा की बारीकैयाँ नही समझ सकता .. बात बहुत अच्छी लगी । बधाई"
4 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service