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स्वीकार कोई कैसे करे

स्वीकार तो पहले भी कहाँ था 
लेकिन तब स्थिति ऐसी कहाँ थी 
अब तक सर हिलाने की
अस्वीकारने की  भी अनुमति कहाँ थी 
 सर को झुकाये रहता था भार 
निरन्तर हर बार लगातार 
सर को उठने नहीं देता था भार 
वर्जनाओं का  विडम्बनाओं का 
सम्भावित असहनीय सज़ाओं का 
दहलीज का ,आरोपित तमीज़  का 
गलती गलाती  दुर्गंध उपजाती 
सम्बन्धों की सियासतों का 
स्वप्रभुओं की विरासतों का 
सर को झुकाये रखता था भार 
निरन्तर हर बार लगातार 
स्वीकार तो पहले भी कहाँ था 
लेकिन तब स्थिति ऐसी कहाँ थी 
जब अतियों की अति हो जाए  
सतियां  तक  सती  हो जाए  
जग जाहिर सत्य परीक्षा परिणाम हों 
नित नयी परीक्षा के आयाम हों
एकलव्य  शर-संधान वंचित रहे 
कर्ण वंश - प्रश्न- दंश संचित रहें
त्याग -राग- विराग  बेमानी सिद्ध हों  
षडयन्त्र लांछन परित्याग नित्यप्रति
अहिल्या श्राप निरंतर अवरुद्ध हों 
तो  कितना कोई  पथराये 
जब अतियों की अति हो जाए 
जब हास्यस्पद बलियों के बलिदान हो 
होरी के निरर्थक गोदान हो  
सार्वजनिक सब निजी होने लगे 
खलिहान नीवं  निज खोने लगे
तो शेष रह ही  क्या  जाता है  
जिसे स्वीकार किया जाए 
अथवा अस्वीकार भी 
तो यही सही युग -चीत्कार यह 
अब आखिरी एक हुंकार यह 
कि अब नहीं स्वीकार यह 
मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 581

Comment

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Comment by amita tiwari on December 15, 2016 at 11:24pm

आ०  समीर जी ,सुरेन्द्र जी  ,मिथिलेश जी,भंडारी जी ,विजय जी ,राजेश कुमारी जी ,  

आप की उत्साहजनक टिप्पणियों  के लिए 

ह्रदय से आभार 

सादर 

अमिता 

Comment by नाथ सोनांचली on December 6, 2016 at 3:46am
आदरणीया अमिता तिवारी जी भाव पूर्ण कविता, बधाई स्वीकार करें।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 4, 2016 at 10:30pm

आदरणीया अमिता जी, बहुत बढ़िया और भावपूर्ण प्रस्तुति हुई है. हार्दिक बधाई. सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 4, 2016 at 9:41pm

आदरनीया बहुत सुन्दर भाव पूर्ण रचना हुई है , हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on December 3, 2016 at 6:33pm

उत्तम भावपूर्ण प्रस्तुति। हार्दिक बधाई।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 3, 2016 at 5:10pm

आद० अमिता तिवारी जी ,आज की सामाजिक विसंगतियों से उपजे भावों से ओतप्रोत  बहुत अच्छी प्रस्तुति है बहुत बहुत बधाई 

Comment by Samar kabeer on December 3, 2016 at 4:50pm
मोहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब,बहुत ही भावपूर्ण कविता लिखी है आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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