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बिटिया की ग़ज़ल ,,मनोज अहसास,,,

ज़रा सा मुस्कुरा दो तो बड़ी हो जाओगी बिटिया
तुम्हीं जुगनू,तुम्हीं खुशबू, तुम्हीं हो चाँदनी बिटिया

किताबें कितनी सुन्दर हैं कहीं चंदा,कहीं तारे
लो अपने बस्ते में भर लो ये सारी रौशनी बिटिया

सुबह उठकर चली जाती हो जैसे रोज़ पढ़ने तुम
किसी दिन बच्चों को तुम भी पढाओगी मेरी बिटिया

चलो आओ चलें पढ़ने नए कुछ खेल भी खेलें
सरल हैं ये सभी चीज़े नहीं मुश्किल कोई बिटिया

नए रस्ते ,बड़ी मंज़िल ,घना उल्लास और साहस
बसा लो इनको जीवन में रहो संवरी सजी बिटिया

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 24, 2016 at 6:10am
अच्छी ग़ज़ल हूई है मनोज जी हार्दिक बधाई स्वीकार करें सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 23, 2016 at 8:51pm

बहुत  प्यारी ग़ज़ल हुई मनोज कुमार जी बधाई लीजिये 

Comment by मनोज अहसास on August 23, 2016 at 5:42pm
Bahut bahut aabhar
Shukriya

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 23, 2016 at 11:18am

आदरनीय , गज़ल अच्छी हुई है , मुबारक बाद कुबूल करें । बहर लिखना न भूला करें कृपया ।

Comment by मनोज अहसास on August 22, 2016 at 10:25pm
Bahut bahut aabhar aadrniya abha Ji
Sadar
Comment by Abha saxena Doonwi on August 22, 2016 at 10:13pm

वाआआआआआअह बहुत उम्दा ग़ज़ल ..बधाई 

Comment by मनोज अहसास on August 22, 2016 at 8:38pm
बहुत बहुत
आभार
आदरणीय कबीर साहब
आपका आशीर्वाद मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं
सादर
Comment by Samar kabeer on August 22, 2016 at 3:29pm
जनाब मनोज कुमार'अहसास'साहिब आदाब,बहुत उम्दा और मुरस्सा ग़ज़ल हुई है,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं ।

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