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चन्द हाइकू:
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कवि हृदय
निश्छल सा आशिक
शब्दों से प्यार।

छँटे तमस
मन पर पसरा
शब्द उजाला।

कल्पना सधे
झूठ-कपट भगे
सज्जन कवि।

शब्द साधना
विश्व की जागृति
रचनाकार।

प्रकृति प्रेम
पर्यावरण सेवा
शब्द उद्गार।

राष्ट्र भावना
बलवती अपार
करे सृजन।

समाजिकता
सोहार्द को बढ़ावा
सत्य उद्गार।

मौलिक एवम् अप्रकाशित

Views: 520

Comment

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on July 25, 2016 at 3:00pm
आदरणीय गिरिराज भंडारी जी,प्रोत्साहन के लिए सादर हार्दिक आभार

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 25, 2016 at 9:46am

आदरणीय सतविन्द्र भाई , बढिया हाइकू  रचना हुई है , हार्दिक बधाई ।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on July 23, 2016 at 5:23pm
प्रोत्साहन के लिए सादर हार्दिक आभार आदरणीया कल्पना दीदी।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on July 23, 2016 at 5:22pm
अनुमोदन के लिए आभार आदरणीया नयना आरती कानिटकर जी। नमन
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on July 23, 2016 at 5:21pm
आभार आदरणीय अशोक कुमार रक्ताले जी। परिष्कृत कर लिया है।सदर
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 22, 2016 at 5:09pm

सुंदर हाइकू हुए है आदरणीय सतविंदर जी | बधाई | 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 21, 2016 at 11:21pm

राष्ट्र भावना
बलवती अपार
करे सृजन।.........सुन्दर.

आदरणीय सतविन्द्र कुमार जी सादर, बहुत सुंदर हायकू रचे हैं. बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें. फिरभी एक हायकू में 7 की जगह ६ वर्ण ही रह गए हैं. दूसरा यह कि गुणीजन हायकू में 'पे' शब्द को मान्य नहीं करते  हैं  क्योंकि शुद्ध शब्द 'पर' है. सादर.

Comment by नयना(आरती)कानिटकर on July 21, 2016 at 9:35pm

 आ.सतविन्द्र जी और उद्गार को लेकर सुंदर हायकू.बधाई

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