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पुरानी तस्वीर ...

पुरानी तस्वीर ...

ये तुंद हवायें
रहम न खाएंगी
खिड़की के पटों पर
अपना ज़ोर अजमाएंगी
किसी के रोके से भला
ये कहां रुक पाएंगी
अाजकल की हवा
बेरोकटोक चलती है
इनको क्या गरज
इनकी बेफिक्री
किसी के
पांव उखाड़ सकती है
किसी खिड़की के
सामने की दीवार पर
सांस लेती नींव की
पुरानी तस्वीर
गिरा सकती है

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Sushil Sarna on June 24, 2016 at 2:42pm

आदरणीया प्रतिभा पांडेय जी रचना आपकी आत्मीय प्रशंसा का हार्दिक आभार।

Comment by Sushil Sarna on June 24, 2016 at 2:42pm

आदरणीया कांता रॉय जी प्रस्तुति में निहित भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by pratibha pande on June 23, 2016 at 6:56pm

इनको क्या गरज 
इनकी बेफिक्री 
किसी के 
पांव उखाड़ सकती है 
किसी खिड़की के 
सामने की दीवार पर 
सांस लेती नींव की 
पुरानी तस्वीर 
गिरा सकती है....बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ,दिल को छू लेने वाली ,हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय सुशील सरना जी 

Comment by kanta roy on June 23, 2016 at 11:09am
अाजकल की हवा
बेरोकटोक चलती है
इनको क्या गरज
इनकी बेफिक्री
किसी के
पांव उखाड़ सकती है ----- अद्वितीय सम्प्रेषण है यह । बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सुशील जी ॥
Comment by Sushil Sarna on June 22, 2016 at 1:25pm

अादरणीय सुरेश कुमार कल्याण जी प्रस्तुति को अात्मीय मान देने का हार्दिक अाभार।

Comment by Sushil Sarna on June 22, 2016 at 1:25pm

अादरणीया राजेश कुमारी जी प्रस्तुति मे निहित भावों को स्वीकृति देती अपकी अात्मीय प्रशंसा का दिल से अाभार।

Comment by Sushil Sarna on June 22, 2016 at 1:22pm

अादरणीय  Shyam Narain Verma जी प्रस्तुति के भावों को मान देने का दिल से अाभार।

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on June 21, 2016 at 4:20pm
वाह जी वाह श्री मान बहुत ही सुन्दर रचना बधाई स्वीकार करें

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 21, 2016 at 3:52pm

वाह बहुत सुन्दर तुंद हवाओं को तो बहना उन्हें किसी की क्या फिक्र ---तुंद हवाओं का  बिम्ब लेकर आज की नव पीढ़ी अर्थात नव चलन को बहुत सुन्दर तरीके  से शब्दिक किया आपने आ० सुशील सरना जी हार्दिक बधाई 

Comment by Shyam Narain Verma on June 21, 2016 at 11:03am
बहुत सुन्दर ... सादर बधाई स्वीकारें आदरणीय

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