For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उदास चेहरा ...

तुम आये
और मैं तुम्हें
बंद पलकों से
निहारती रही
तुम्हारी हर आहट को
मैं अपने अंदर समेटती रही
वो चुप सा
तुम्हारा उदास चेहरा
मेरी मजबूरी को कचोटता रहा
तुम्हारे हाथों के गुलाब की
इक इक पंखुड़ी
अश्कों में भीगी
मुझपर गिरती रही
मैं तुम्हारे अश्कों की आतिश में
इक शमा सी पिघलती रही
तुम ज़मीं तक
मुझपर झुकते चले गए
बेबस पुकार मुझसे टकराकर
कहीं खला में खो गयी
तुम मेरी लहद में
आ न सके
मैं अपनी लहद में
तड़पती रही
शाम का धुंधलका बढ़ता गया
और बढ़ती गयी मेरी तन्हाई भी
बंद पलकों की चिलमन से
बेबस सी मैं तुम्हें
जाते हुए निहारती रही

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 680

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 7:38pm

आदरणीया प्रतिभा जी प्रस्तुति को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार।

Comment by pratibha pande on May 26, 2016 at 6:50pm

कोमल एहसासों से ओतप्रोत ,सुन्दर रचना ,हमेशा की तरह ,  हार्दिक बधाई प्रेषित है आदरणीय सुशील सरना जी 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:49pm

आदरणीया राहिला जी प्रस्तुति में निहित भावों को आत्मीय मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:47pm

आदरणीय बशर भारतीय जी आपकी स्नेहिल प्रशंसा का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:46pm

आदरणीय  समर कबीर साहिब प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय सराहना का दिल से आभार। 

Comment by Sushil Sarna on May 26, 2016 at 1:45pm

आ. कल्पना भट्ट जी प्रस्तुति के  भावों को मान देने का हार्दिक आभार। 

Comment by Rahila on May 26, 2016 at 12:03pm
बहुत ही खूबसूरत रचना आदरणीय सर जी! बहुत, बहुत बधाई ।सादर नमन
Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:24am
वाहहह अच्छी भावपूर्ण रचना है बधाई आपको
Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 10:55pm
जनाब सुशील सरना जी आदाब,हमेशा की तरह शानदार कविता रच दी आपने,वाह बहुत ख़ूब,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 8:59pm

वाह | बहुत सुंदर पंक्तियाँ | हार्दिक बधाई आदरणीय | 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Wednesday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service