For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हँसी दो चार दिन की है...(ग़ज़ल) //डॉ. प्राची

1222.1222.1222.1222

हैं बस दो-चार दिन आँसू, हँसी दो-चार दिन की है।
सँजोयें क्या भला, जब ज़िन्दगी दो-चार दिन की है?

भले हो काँस्य या कञ्चन ये कारागार टूटेगा
यहाँ पर श्वास केवल बंदिनी दो-चार दिन की है।

अँधेरी रात से लड़ने को इक दीपक सहेजें खुद
मिली जो रहमतों की रौशनी, दो-चार दिन की है।

पिये हर घूँट में नदिया, वही लहरों में इतराए
समंदर की भला कब तिश्नगी दो-चार दिन की है?

मेरी आँखों में गर देखो, तो पत्थर दिल पिघल जाए
मुझे मालूम है ये बेरुखी दो-चार दिन की है।

तुम्हारा झूठ चिल्लाए भले, पर सच ही जीतेगा
लबों पर है जो सबके, सनसनी दो-चार दिन की है।

तेरे पहलू में जो लाए, नहीं रेखा वो हाथों में
कहूँ कैसे ये चुभती सी कमी दो-चार दिन की है?

मौलिक और अप्रकाशित

Views: 618

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on March 17, 2016 at 11:35pm

भले हो काँस्य या कञ्चन ये कारागार टूटेगा
यहाँ पर श्वास केवल बंदिनी दो-चार दिन की है।........वाह ! बहुत खूब.

बहुत बधाई आदरणीया डॉ.प्राची सिंह जी इस सुन्दर गजल के लिए.सादर.

Comment by Ravi Shukla on March 17, 2016 at 3:12pm

आदरणीया प्राची जी बहुत बढि़या गजल है बधाई स्‍वीकार करें

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on March 17, 2016 at 3:04pm
बढ़िया डॉ प्राची सिंह जी सादर बधाई
Comment by रामबली गुप्ता on March 17, 2016 at 1:20pm
वाह वाह क्या खूब ग़ज़ल कही है। दिली मुबारकबाद कुबूल फरमाएं आ. प्राची बहन।सादर
Comment by Samar kabeer on March 16, 2016 at 6:24pm
मोहतरमा डॉ.प्राची सिंह साहिबा आदाब,बहुत बढ़िया ग़ज़ल हुई है, शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by Rahul Dangi Panchal on March 16, 2016 at 12:50pm
आदरणीया कुछ शे'र तो बहुत सुन्दर हुए है बधाई
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 16, 2016 at 10:57am

बहुत सुन्दर हार्दिक बधाई आ० प्राची बहन l

Comment by narendrasinh chauhan on March 15, 2016 at 1:50pm

बेहेतरीन ग़ज़ल, लाजवाब शेर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service