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बदजुबानी क्या कहें-ग़ज़ल ( लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’ )

2122    2122    2122    212
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प्यार के  इस  माह  की यारो  कहानी क्या कहें
बिन किसी  के थम  गयी है जिंदगानी क्या कहें /1

यूँ  कभी  खुशियों के मौसम भी छलकती आँख थी
दर्द  से  हट  आँसुओं  के  अब  तो  मानी  क्या कहें /2

आजकल बैसाखियों पर वक्त जाने क्यों हुआ
थी कभी किससे जवाँ वो इक रवानी क्या कहें /3

आप कहते  हो  अकेलापन  सताता  है  बहुत
साथ  अपने  तो सदा  यादें  पुरानी  क्या कहें /4

खुश रहे बस हो  कहीं भी सीख ये तहजीब की
बेबफा  के  वास्ते  अब  बदजुबानी  क्या  कहें /5

वक्त ले  आया हमें  भी यार  इस फुटपाथ पर
वैसे हम भी  थे कभी  यूँ  खानदानी  क्या कहें /6

देखते   लाचार   भौंरे  सूना  छत्ता  हो  गया
छोड़  बैठी  है  सिंहासन  राज रानी  क्या कहें /7

मौलिक व अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी ‘मुसाफिर’

Views: 507

Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 25, 2016 at 11:25am

आ० भाई जय नित जी उपस्थिति व् प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 25, 2016 at 11:25am

आ० भाई गिरिराज जी प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद .

Comment by जयनित कुमार मेहता on February 24, 2016 at 11:23pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने।

बधाई!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 24, 2016 at 4:36pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , अच्छी ग़ज़ल हुई है , दिल से बधाइयाँ स्वीकार करों ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2016 at 11:18am

आ० भाई पंकज जी , इस सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2016 at 11:17am

आ० भाई समर कबीर जी उपस्थिति से ग़ज़ल का मन बढ़ने के लिए हार्दिक आभार l

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 24, 2016 at 11:17am

आ० भाई सुशील जी , ग़ज़ल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए तहेदिल से सुक्रिया l

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on February 23, 2016 at 3:37pm
देखते   लाचार   भौंरे  सूना  छत्ता  हो  गया
छोड़  बैठी  है  सिंहासन  राज रानी।।


हर अशआर खूब, पर ये तो बहुत खूब, सादर बधाइयाँ
Comment by Samar kabeer on February 23, 2016 at 3:20pm
जनाब लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'जी आदाब,इस बढ़िया ग़ज़ल के लिये दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं !
Comment by Sushil Sarna on February 23, 2016 at 1:37pm

प्यार के इस माह की यारो कहानी क्या कहें
बिन किसी के थम गयी है जिंदगानी क्या कहें /1

यूँ कभी खुशियों के मौसम भी छलकती आँख थी
दर्द से हट आँसुओं के अब तो मानी क्या कहें /2

वाह आदरणीय वाह खूबसूरत अहसासों के दिलकश अशआर ..... इस बेहतरीन ग़ज़ल की प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें सर।

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