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कुएं में लोकतन्त्र

एक कुआं था
बहुत बड़ा कुआं
शीतल जल से पूर्ण
वहाँ रहते थे अनेकों मेढक
कुएं के मालिक ने कुएं में
डाल दिये कुछेक साँप
एवं फूंका मंत्र
जिससे उस कुएं में कायम हो गया लोकतन्त्र
एक मोटा मेढक बना उसका प्रधान
उसने कराया कुएं में सर्वे
और पाया कि साँपों की संख्या वहाँ है कम
मोटा मेढक और उसके चमचे हुए बहुत हैरान
उन्होने बनाया एक नियम
जिससे हो सके साँपो का उत्थान
सभी साँपो को मिले एक मेढक खाने को रोज
ऐसा हुआ प्रावधान
कहा गया बहुत जरूरी है
साँप का विकास
तभी तो बना रहेगा प्रगतिशील होने का
एहसास
धीरे धीरे साँप खा गए सारे मेढक
और अंत में उस मोटे मेढक को भी.....
अब उस कुएं में बचे हैं सिर्फ साँप
अनेक साँप
वे खा रहे हैं एक दूसरे को
कुएं का मालिक माँज रहा है
अपनी बाल्टी
वह मुस्कुरा रहा है
बैठकर कुएं की मुंडेर पर
साँपो की लड़ाई जारी है ....
........ नीरज कुमार नीर ....

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment

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Comment by Neeraj Neer on January 23, 2016 at 8:37pm

आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी कथ्य के प्रति अपना समर्थन देने एवं इसे स्वीकार करने  हेतू सादर आभार .... सराहना करके उत्साह वर्धन हेतू सादर नमन ... 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 23, 2016 at 7:13pm

आदरणीय नीर जी आपकी उर्वर कल्पना को प्रणाम . 

Comment by Neeraj Neer on January 22, 2016 at 8:24pm

आदरणीय सत्विन्दर जी बहुत आभार इस उत्साहवर्द्धन के लिए 

Comment by Neeraj Neer on January 22, 2016 at 8:23pm

आपका आभार श्री शेख शहजाद उस्मानी साहब 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 22, 2016 at 5:33pm
वाह्ह्ह्ह्!समसामयिक रचना।ज़बरदस्त सन्देश।हार्दिक बधाई आदरणीय।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on January 22, 2016 at 3:14pm
प्रतीकों के माध्यम से देशवासियों को दर्पण दिखाने में समर्थ बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय नीरज कुमार नीर जी।
Comment by Neeraj Neer on January 22, 2016 at 3:06pm

आभार आपका आदरणीय गिरिराज भण्डारी साहब 

Comment by Neeraj Neer on January 22, 2016 at 3:01pm

आभार आदरणीय समर कबीर साहब इस उत्साहवर्धन के लिए ............... 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2016 at 9:53pm

क्या बात है , नीरज भाई , आज कीस देश की स्थिति पर खूब रचना हुई है , दिल से बधाइयाँ आपको ।

Comment by Samar kabeer on January 21, 2016 at 3:06pm
जनाब नीरज कुमार नीर जी आदाब,इस प्रस्तुति के लिये बधाई आपको |

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