For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गुलाब आँखें(संशोधित)......................‘जान’ गोरखपुरी

२१२२ २१२२ १२१२२


मेरी दुनिया रहने दो अपनी ख़्वाब आँखें
दो जहाँ हैं मेरी ये दो गुलाब आँखें


***


अब तू सम्हल जिंदगी होश खो चुके हम
साकिया ने है पिला दी शराब आँखे


**


ढूंढ लेंगे हम.....रहो पास तुम अगर बैठे
सब सवालों का देती हैं जव़ाब आँखें


***


मेरी मोहब्बत इबादत नफ़स-नफ़स है
रखती हर पल हैं मेरा सब हिसाब आँखें


**


तुम पलक के मस्त पन्ने उलटते जाओ
पढ़ रहा हूँ मै तुम्हारी किताब आँखें

*****************************************
मौलिक व् अप्रकाशित (c) ‘जान’ गोरखपुरी
*****************************************

Views: 793

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 31, 2015 at 6:06pm
आ० हरी प्रकाश दुबे सर!आभार!
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 30, 2015 at 10:37pm

आ० rajesh kumari जी आपकी विस्तृत समीक्षा पाकर अभिभूत हूँ!धीरे धीरे सुधार की ओर तत्पर हूँ! आपके अमूल्य सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार! इसी प्रकार मार्गदर्शन करते रहें!मेरा सौभाग्य होगा! सादर!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 30, 2015 at 10:34pm

आदरणीया pratibha tripathi जी सराहना हेतु बहुत बहुत शुक्रिया!!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 30, 2015 at 10:33pm

आ० Shyam Narain Verma जी उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 30, 2015 at 10:32pm

आदरणीय गोपाल सरजी रचना पर आपकी सार्थक प्रतिकिया पाकर मन ख़ुश हुआ!आपके बताये अनुसार कमी को सुधारने  का प्रयास करूँगा!!बहुत बहुत आभार!आदरणीय!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 30, 2015 at 10:30pm

कंप्यूटर में तकनीकी ख़राबी और समय की कमी के कारण आप सभी के टिपण्णी पर समय पर अपनी प्रतिक्रिया न दे पाने का मुझे खेद है!

Comment by Hari Prakash Dubey on March 30, 2015 at 8:15pm

सुन्दर प्रयास ,भाई क्रृष्ण मिश्र जी ,,बाकी आदरणीया राजेश जी ने कह ही दिया है ,मुझे तो इस विधा का विशेष ज्ञान  नहीं है ! शुभकामनायें आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 28, 2015 at 11:02pm

अब तू सम्हल जिंदगी होश खो चुके हम

है मिला दी आंखों उसने शराब आँखें-----मिसरा व्याकरण के हिसाब से दुरुस्त नहीं है 

*

ढूंढ लेंगे हम.....रहो पास तुम बैठे

सब सवालों का देती हैं जव़ाब आँखें---ये शेर बेबह्र हो रहा है 

***

**

मेरी मोहब्बत इबादत है हर नफ़स में-----मुहब्बत सही शब्द  दूसरे जुज्ब-ए-रदीफैन दोष भी आ रहा है 

रखती हो तुम तो मेरा सब हिसाब आँखें-----यहाँ भी व्याकरण गड़बड़ है --रखती हैं अब तो  मेरा सब हिसाब आँखें-  ----हो सकता है 

***

तुम पलक के मस्त पन्ने उलटते जाओ

पढ़ रहा हूँ 'जान' तेरी किताब आँखें-----उला में तुम ....सानी  में  तेरी ??? शुतुर्गुरबा दोष बन रहा है 

कृष्णा जी ,आप ग़ज़लों पर अच्छा प्रयास कर रहे हैं ,ग़ज़ल की कक्षा की सभी पोस्ट पढ़ते जाइए धीरे धीरे ग़ज़ल सधने लगेंगी 

Comment by Shyam Narain Verma on March 28, 2015 at 3:57pm
बहुत खूब ! इस सुंदर गजल हेतु बधाई स्वीकारें ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 28, 2015 at 3:24pm

आ ० कृष्णा जी

बहुत  सुन्दर  गजल . मतला उम्दा . चौथे शेर में लाज्तमा-ए -जुज्ब -ए -रदीफैन दोष को देखिएगा  सस्नेह .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
3 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service