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दूसरों को....................'जान' गोरखपुरी

खुशियों में होते है सब हमसफ़र..

गम में साथ कोई खड़ा नही होता!

दूसरों को करके छोटा ए-दोस्त...

कोई बड़ा नही होता!

जाने कितनी खायी ठोकरें

लाख रंजिश की गम ने..!

सामने खींचकर बड़ी लकीर

बड़ा बनना सीखा नही हमने..!!

यही करना था तो सियासत आजमाई होती!

हाथ में कलम की न रोशनाई होती..

जंग अदब की मै लड़ा नही होता!!

दूसरों को करके छोटा ए-दोस्त...

कोई बड़ा नही होता!

जिसने रची है सारी ही सृष्टि!

उसने है दी सबको एक आसमाँ एक ही जमीं..

जब खुदा ने,खुद फर्क न किया बन्दों में!

तो बाँध मत वाइज उसे मतलब के धन्धों में!!

लाख बड़ा बन जाये कोई मगर उससे कोई बड़ा नही होता!!

आये है सब वहीँ से,जाना है सबको वहीँ

बात है सच,मानो या मानो नही!

मै,मै हूँ करता तुम,तुम हो करते!

एक वो है कि.... शताब्दियों शताब्दियों

युगों युगों से,सुनता है सबकी

मगर कभी कुछ बोलता नहीं होता !

हम कोई रसूल हैं?

गुनाह अपने भी कई मकबूल हैं

कबूल है!कबूल है!कबूल है!

वर्ना बनके गर्द-ए-गुबारां दर-ए-यारां पड़ा न होता!

दुनिया में ‘जान’ अपना घड़ा न होता!!

दूसरों को करके छोटा ए-दोस्त...

कोई बड़ा नही होता!

*****************************************

मौलिक व् अप्रकाशित (c) ‘जान’ गोरखपुरी

*****************************************

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 28, 2015 at 11:06pm

बहुत बढ़िया गहन सन्देश छुपा है प्रस्तुति में ,बहुत पसंद आई ये रचना ,,ढेरों बधाई आपको कृष्ण मिश्रा जी. 

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 28, 2015 at 5:08am
यही करना था तो सियासत आजमाई होती!
जंग अदब की मै लड़ा नही होता!!
बहुत खूब , बधाई , प्रिय कृष्ण मिश्रा जी , सादर।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:40pm

आदरणीय मिथिलेश सरजी! हौसलाफजाई के लिए तहेदिल से शुक्रिया!आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:39pm

आदरणीय गोपाल नारायन सरजी! आपकी सराहना पाकर लेखनकर्म सार्थक हुआ!बहुत बहुत आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:37pm

आदरणीया meena pathak जी रचना पर आपकी उपस्थिति पाकर!मन हर्षित हुआ!आपकी सराहना से बहुत संबल मिला बहुत बहुत आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:35pm

आदरणीय shyam mathpal जी हौसलाफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!स्नेह बनाये रखें!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:35pm

आ० मोहन सेठी सर!उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत आभार! रचनाकर्म पर सदैव आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहती है!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 27, 2015 at 10:33pm

आ० गिरिराज भंडारी सर!आपकी उपस्थिति मात्र से ही रचनाकर्म सार्थक हो जाता है,आपकी सराहनापाकर गदगद हूँ!

बहुत बहुत आभार!सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on March 26, 2015 at 9:33pm

आदरणीय कृष्ण भाई जी ... सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति पर बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 26, 2015 at 8:53pm

प्रिय कृष्णा

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति .  बधाई देता हूँ  . स्नेह .

कृपया ध्यान दे...

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