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महिला दिवस पर रचित -

घनाक्षरी – 16-15 वर्ण

कंधें से कंधा मिला काम करे जो खेत में,

भोर में उठ, देर रात तक जगती है |

 

खुद का वजूद भूल मान रखे आदमी का,

सर्वस्व समर्पण को तैयार रहती है |

 

शादी कर अनजान घर बसाने, कोख में,

नौ माह तक पीड़ा भी सहती रहती है |

 

फिर भी स्वयं का नही कोई वजूद मानती,

नाम बच्चें को भी वह बाप का ही देती है |

 

सर्दी गर्मी वर्षा सहती अंग भी झुलसाती,

दूजे घर काम से पाई पाई जोडती है |

 

व्रत है कहकर खुद तो भूखी ही सोती,

अपने पति और बच्चों को खाना देती है | 

 

देवी मान पूजते पर, अबला ही मानते,

कष्ट सहकर भी नौकरी जो करती है |

 

बेबसी में जमीदार के द्वारें ब्याज में ही ,

आँचल से मुहं ढापे, लाज बेच जाती है |

(मौलिक अप्रकाशित)

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 13, 2015 at 11:18am

आ० भाई  लडीवाला जी , बहुत सुन्दर घनाक्षरी रचना हुई है और भाव भी बहुत सुन्दर हैं , हार्दिक बधाई .


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Comment by शिज्जु "शकूर" on March 13, 2015 at 8:45am

आदरणीय लक्ष्मणजी रचना के भाव अच्छे हैं बधाई आपको, पर गेयता बाधित है ज़रा देख लीजियेगा

Comment by Dr. Vijai Shanker on March 12, 2015 at 9:49pm
मार्मिक प्रस्तुति, आदरणीय लक्षमण रामानुज लडीवाला जी, बधाई, सादर।
Comment by Shyam Mathpal on March 12, 2015 at 8:33pm

Aadarninay Laxam Ji,

Bahut hi marmik and hakikat ka drishya prastut kiya aapne .  Ek naari pure jivan desaron ke liye jiti hai khud ko bhulakar.....  Parinam.. ?

Comment by maharshi tripathi on March 12, 2015 at 8:24pm

बेबसी में जमीदार के द्वारें ब्याज में ही ,

आँचल से मुहं ढापे, लाज बेच जाती है |,,,,,,अंत तो बहुत बढ़िया आ.लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी ,,बहुत बहुत बधाई आपको |

Comment by Shyam Narain Verma on March 12, 2015 at 4:18pm
भावनाओं से ओतप्रोत रचना पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें.... 
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 12, 2015 at 4:03pm

सर्दी गर्मी वर्षा सहती अंग भी झुलसाती,

दूजे घर काम से पाई पाई जोडती है |

व्रत है कहकर खुद तो भूखी ही सोती,

अपने पति और बच्चों को खाना देती है |

सार्थक रचना पर बहुत बहुत बधाई! आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी!

Comment by Hari Prakash Dubey on March 12, 2015 at 3:45pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला जी , बहुत सुन्दर घनाक्षरी रचना और भाव भी बहुत सुन्दर हैं , हार्दिक बधाई आपको इस रचना पर ! सादर

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