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Shyam Mathpal
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  • सुनील प्रसाद(शाहाबादी)
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Shyam Mathpal's Blog

तमन्ना

तमन्ना

इस चमन की सुमन खिलते रहें

सुख दुःख में हम मिलते रहें

लाख कोशिश करे हमें तोड़ने की

हम जुड़े हुवे हम जुड़ते रहें

इंद्रधनुषी रंग छाते रहें

खुशियों के गीत गाते रहें

लहू के रंग फैलायें न कोई

हम जगे हुवे हम जगते रहें

पक्षियों का कलरव गूंजता रहे

पर्वतों को गगन चूमता रहे

आँधियाँ चाहे चले जोर से

हम अडिग हुवे हम अडिग रहें

झरने कल कल झरते रहें

विकास पथ पर बढ़ते रहें

भूल से भी न रोके कोई

हम अजये विजयी रहें

हिम शिखर…

Continue

Posted on April 3, 2015 at 7:30pm — 5 Comments

सच

हर फूल खुश्बू नहीं देता,हर कली  फूल नहीं बनती           

हर चमकता रात  में तारा नहीं होता ,हर चमकता पत्थर हीरा नहीं होता

जरा संभल के मेरे दोस्त हर बात सच्ची नहीं होती

हर मीठा स्वर अच्छा नहीं होता, हर खड़ी जीज सहारा नहीं होती,

हर खून का रिश्ता अपना नहीं होता ,हर दोस्त सच्चा नहीं होता .

जरा सभंल........

हर रात काली नहीं होती,हर दिन उजाला नहीं होता,

हर रात दिवाली नहीं होती, हर रोज होली नहीं होती.

जरा संभल......

हर लाल कपड़ा कफ़न नहीं…

Continue

Posted on March 26, 2015 at 8:44pm — 14 Comments

आज़ादी

मन के कमरे में कैद हमारे भाव विचार

बने वाणी के मोती ,कलम की बहती धार

सुवासित हो फ़िज़ा ,पढ़े सुने संसार

बुने सतरंगी सपने,बरसे प्यार की फुहार

डूबे खुश्बुओं में ,सुगन्धित हो बहार

खुशिओं के फूटे झरने ,भीगें बार -बार

मिले जीने की उमंग,सपना हो साकार

भूल सारे गम ,नव अंकुर का आधार

चाहतों की संतुष्टि ,आशीष से सरोबार

खुले परिचय के द्वार ,जुड़ा नया परिवार

धन्य हो गए हम ,दिलों के जुड़े तार

भूल जोड़ बाकी का गणित ,मिला जीने का…

Continue

Posted on March 18, 2015 at 11:50am — 12 Comments

क्षणिकाएँ

प्रणाम      

 

देश के वीरों को प्रणाम

उन शहीदों को सलाम

हमारे कल के लिए नव कोपलों का बलिदान

माताओं ने किये बेटे कुर्बान

बहिनों ने दिया सुहाग का दान

सदियों सदा याद रखेगा हिंदुस्तान

 

संतान

 

देश के लिए जान दे

देश भक्ति का ज्ञान दे

राष्ट्र भाषा को मान दे

माँ ऐसे संतान दे.

 

आंसू

 

आंसुओं को यों ही पीते रहे

होंठों…

Continue

Posted on March 16, 2015 at 4:00pm — 18 Comments

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At 3:14pm on March 17, 2015, Shyam Narain Verma said…

आदरणीय ,

अगर कमेंट भी हिंदी लिपि में करें तो और बेहतर रहेगा |

सादर

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

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