For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुण्डलिया छंद - लक्ष्मण रामानुज

1 धन बल का मद 

धन के माया जाल में, लगे रहे दिन रेन

दुखियों के दुख देखकर, हुआ न मन बेचैन |

हुआ न मन बेचैन. ह्रदय न किसी का रोया

सुरा सुन्दरी जाम. जमा धन सभी डुबोया

सोचें अब हो दीन, काम आता निर्धन के

थी बापू की सीख, पड़े न मोह में धन के | 

(2) दुर्लभ मानव जीवन 

मानव दुर्लभ जन्म का, उचित करे उपयोग ,
तन मन धन हमको मिला, ऐसा दुर्लभ योग 
ऐसा दुर्लभ योग, पूर्व कर्मों का फल है          
करे यदि सदुपयोग, तभी वह मनुज सफल है  
कहे संत कविराय, अधर्म बनाता दानव

करे सदा सद्कर्म, कर्म से बनता मानव | 

(मौलिक व अप्रकाशित) 

Views: 629

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 26, 2015 at 9:31am

छंद पसंद कर  स्नेह  देने के लिए  हार्दिक आभार  आपका श्री गिरिराज  भंडारी  जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 26, 2015 at 9:30am

छंद  पसंद करने के लिए हार्दिक  आभार  श्री कृष्णा मिश्रा "जान" गोरखपुरी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 19, 2015 at 12:15pm

अतिशय  आभार आपका श्री  हरी प्रकाश दुबे जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 19, 2015 at 12:13pm

छंद सराहने के लिए हार्दिक  आभार  आपका श्री श्याम  नारायण वर्मा जी और श्री श्याम मठपाल जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 19, 2015 at 12:12pm

हार्दिक आभार  आपका आद. डॉ  गोपाल नारायण श्रीवास्तव  जी 

सादर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 19, 2015 at 10:41am

बहुत सुन्दर संदेश देती कुंडलिया रचना के लिये आपको हार्दिक बधाइयाँ , आदरणीय लक्ष्मण भाई जी ।

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 18, 2015 at 10:15pm

दुर्लभ मानव जीवन  ये छंद बहुत ही पसंद आया! बहुत बहुत बधाईयां आदरणीय!
 

Comment by Hari Prakash Dubey on March 18, 2015 at 8:57pm

आदरणीय लक्ष्मण रामानुज लडीवाला सर,सुन्दर रचना, इससे इस छंद को समझने में भी सहायता मिलेगी , हार्दिक बधाई ! सादर 

Comment by Shyam Mathpal on March 18, 2015 at 8:48pm

आ० लडीवाला जी,

सुन्दर रचना के लिए बधाई.

Comment by Shyam Narain Verma on March 18, 2015 at 2:40pm

सुन्दर कुंडलिया छंद के लिए बहुत बहुत बधाई

सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन ।फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
9 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
15 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
18 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
yesterday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Admin's group आंचलिक साहित्य
"कुंडलिया छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी ह भाखा, सरल ऐकर बिधान सहजता से बोल सके, लइका अऊ सियान लइका अऊ…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service