For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मौसम कहाँ जाये बदल जानें कहाँ बरसात हो |

२२१२   २२१२   २२१२  2212
मौसम  कहाँ जाये  बदल जानें कहाँ बरसात हो |
दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
कैसे  करे दोस्ती कहीं  जा कर किसी भी  देश में ,
सहमें जमाना   मेल से  कोई   कहीं ना बात हो |
कोई करे   कोई भरे     बदनाम हो    कोई कहीं ,
आतंक के माहौल में जाने किसी घर  मात  हो |
जाकर कहीं अंजान दुनिया में  बसाते घर  सभी  ,
सपने सजाते  हैं उमर भर जैसा भी औकात  हो  | 
पाखी उड़े जब आसमां में हौसला कम ना हो कभी ,
वर्मा जहाँ में खुश रहें हर जन खुशी की  बात हो |
श्याम नारायण वर्मा 
(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 536

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on March 12, 2015 at 4:06pm

आदरणीय सभी लोगों को  रचना भाव पसंद करने हेतु हार्दिक आभार , कृपया स्नेह बनाए रखे | सादर

आदरणीय शिज्जू  'शकूर' जी कौन सा शब्द उचित रहेगा , आप का बहुत बहुत आभार |
सादर ,

Comment by Hari Prakash Dubey on March 12, 2015 at 2:16pm
आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी, इस सुन्दर और सधी हुई ग़ज़ल पर हार्दिक बधाई ! सादर
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 12, 2015 at 11:37am

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |

बहुत खूब कहा भाई श्याम जी हार्दिक बधाई .

Comment by khursheed khairadi on March 12, 2015 at 9:10am
मौसम  कहाँ जाये  बदल जानें कहाँ बरसात हो |
दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
कैसे  करे दोस्ती कहीं  जा कर किसी भी  देश में ,

सहमें जमाना   मेल से  कोई   कहीं ना बात हो |

आदरणीय श्याम जी ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |सादर अभिनन्दन |

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 12, 2015 at 5:56am

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो.....यही सच है आज की दुनियाँ का ..प्रभावी रचना ...बधाई श्याम नारायण वर्मा  जी 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on March 11, 2015 at 10:25pm

समसामयिक प्रस्तुति पपर हार्दिक बधाई आ० shyam नारायण जी!!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on March 11, 2015 at 8:28pm

आदरणीय श्याम नारायण जी ग़ज़ल पर अच्छा प्रयास है बहुत बहुत बधाई। यहाँ इतना ध्यान रखियेगा कि दोस्ती का वज्न 212 है

Comment by Shyam Mathpal on March 11, 2015 at 7:40pm


Aadarniya Shyam Verma Ji,

Bahut sundar tarike se gazal ki suruwat ki hai. Bahut-2 badhai.

दहशत भरे माहौल में जाने  कहाँ  पर  घात  हो |
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 11, 2015 at 7:08pm

आ० वर्मा जी

बहुत अच्छी गजल कही आपने i  सादर i

Comment by maharshi tripathi on March 11, 2015 at 5:26pm
पाखी उड़े जब आसमां में हौसला कम ना हो कभी ,
वर्मा जहाँ में खुश रहें हर जन खुशी की  बात हो |,,,,,,,,अतिसुन्दर ,,,,बहुत बधाई आपको आ.श्यामनारायण वर्मा जी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"धन्यवाद आदरणीय "
3 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रणाम भाई अखिलेश जी, क्या ही सुंदर चौपाईयां हुईं हैं। वाह, वाह। फागुन का पूरा वृतांत कह दिया…"
3 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"बौर से फल तक *************** फागुन आया ऐसा छाया, बाग़ आम का है बौराया भरी मंजरी ने तरुणाई, महक रही…"
7 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
" दिल रुलाना नहीं कि तुझ से कहें  हम ज़माना नहीं कि  तुझ से…"
8 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" दिल रुलाना नहीं कि तुझसे कहें  हम ज़माना नहीं कि तुझसे कहें   फ़क़त अहसास है…"
8 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"भाई अजय गुप्ता जी, मेरी नजर में बहुत शनदार रचना हुई है। इसके लिए बहुत बहुत बधाई। अनुष्टुप छंद तो…"
8 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"यह रचना #अनुष्टुप_छंद में रचने का प्रयास किया है। हिन्दी में इस छंद का प्रयोग कम है लेकिन मेरा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"झूठों ने झूठ को ऊँचे, रथ पर बिठा दिया और फिर उसे खूब, सुंदर सा सजा दिया   पहिये भी गवाहों के,…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"कृपया गिरह में // वो ज़माना // को //अब ज़माना// पढ़ा जाए। धन्यवाद "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"शुक्रिया मनजीत जी, बहुत आभार। ।  //तरही मिसरे पर आपका शेअर कमाल है।// हा हा हा, तिलकराज…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
" आदरणीय अजय गुप्ता जी ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए। तरही मिसरे पर आपका शेअर कमाल है।"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"आदरणीय ऋचा जी ग़ज़ल की मुबारकबाद क़ुबूल कीजिए, विद्वानों की राय का इंतज़ार करते हैं।"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service