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अतुकांत - स्वीकार हैं मुझे तुम्हारे पत्थर ( गिरिराज भंडारी )

अतुकांत - स्वीकार हैं मुझे तुम्हारे पत्थर

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स्वीकार हैं मुझे आज भी

कल भी थे स्वीकार , भविष्य मे भी रहेंगे

तुम्हारे फेके गये पत्थर

तब भी फल ही दिये मैनें

आज भी दे रहा हूँ , और मेरा कल जब तक है देता रहूँगा

मैं जानता हूँ  और मानता हूँ , इसी में तो मेरी पूर्णता है

यही मेरी नियति है , और उद्देश्य भी

चाहे मेरी जड़ों को तुमने पानी दिया हो या नहीं

मैं अटल हूँ , अपने उद्देश्य में

पर आज मना करने का जी कर रहा है , पत्थरों के लिये

इसलिये नहीं कि , मुझे अब पीड़ा होती है

इसलिये , केवल इस लिये कि,

अब तुम्हारे फेके पत्थर फलों तक नहीं पहुँच रहे

मेरे अनुभवों से पके बहुत से फल ऊपर हैं

बहुत ऊपर ,

पत्थरों की पहुँच और तुम्हारे निशाने से दूर  

तो, चढ़ जाओ ,

मेरे घुटनों पर पैर रख के, खड़े हो जाओ मेरे कन्धों पर , सर पर

और तोड़ लो , मेरे अनुभवों से पके मीठे फल

इससे पहले कि समय मेरी जड़ों को कमज़ोर कर दे 

और मै गिर पड़ूँ धरती पर

भरभरा के ।

*****************

(मौलिक और अप्रकाशित) 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 12, 2014 at 11:45am

आदरणीय भाई गिररिराज जी इस बेहतरीन कविता के लिए कोटि कोटि बधाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 11, 2014 at 9:49pm

आदरणीय गिरिराज सर अपने अनुभवों को क्या खूब शब्द दिया है आपने बहुत बहुत बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on December 11, 2014 at 9:49pm

आदरणीय गिरिराज सर अपने अनुभवों को क्या खूब शब्द दिया है आपने बहुत बहुत बधाई आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on December 11, 2014 at 9:26pm

जीवन के अनुभव को बुनती हुई रचना वृक्ष का बिम्ब बहुत ही सार्थक हुआ ,बहुत बहुत बधाई आ० गिरिराज जी| 

Comment by कंवर करतार on December 10, 2014 at 10:27pm

भाई गिरिराज,

जीवन की  गूढ़ता को बहुत बढिया ढंग से सजाया है इस रचना में ,बहुत बहुत बधाई I  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 10, 2014 at 11:02am

आदरणीय सौरभ भाई , कथ्य के अनुमोदन और सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।

शिल्प सुधारने का एक और प्रयास करूंगा और पोस्ट करूँगा ।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 10, 2014 at 11:01am

बहुत सुंदर.  जीवन में  अच्छे -बुरे अनुभवों को बहुत ही गहरे मनन से साझा किया है आपने आदरणीय गिरिराज जी. बहुत बहुत बधाई आपको  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 10, 2014 at 10:57am

आदरणीय राहुल भाई , आपकी सदाशयता का बहुत शुक्रिया !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 10, 2014 at 10:55am

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , आपकी सराहना ने मेरी मेहनत सफल कर दी , आपका दिली आभार ।

एक बात --एक निवेदन -  मेरे( अनुज ) के लिये आदरणीय न लगाया कीजिये ।  वैसे भी अनुज के साथ आदरणीय से अच्छा प्रिय लगता है ।सादर ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 10, 2014 at 10:50am

आदरनीय योगराज भाई , आपकी सराहना ही मेरा संबल है , आपका दिली शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

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