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कंवर करतार
  • Male
  • Dharamshala Kangra (HP)
  • India
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कंवर करतार's Page

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कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"बृजेश कुमार 'ब्रज जी आपका धन्यवाद I"
Jan 11
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on कंवर करतार's blog post कविता
"बड़ी सुन्दर कविता हुई बधाई.."
Jan 10
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"जनाब समर कबीर भाई ज़र्रानवाजी के लिए शुक्रिया I "
Jan 10
Samar kabeer commented on कंवर करतार's blog post कविता
"जनाब कंवर करतार जी आदाब,इस रचना पर बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 9
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"भाई मनोज एहसास जी आपका हृदय से आभार I"
Jan 9
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"मोहमद आरिफ भाई ,आपका आभार I"
Jan 9
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"भाई मोहित मिश्रा जी हौसला आफसाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया I "
Jan 9
कंवर करतार commented on कंवर करतार's blog post कविता
"सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी रचना अछि लगी बहुत बहुत धन्यवादI "
Jan 9
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on कंवर करतार's blog post कविता
"आद0 कंवर करतार जी सादर अभिवादन। बढ़िया लिखा आपने, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर।"
Jan 9
Mohit mishra (mukt) commented on कंवर करतार's blog post कविता
"सुन्दर रचना आदरणीय, शरद् के वर्णन को शब्दबद्ध करने के लिए बधाई । सादर"
Jan 9
Mohammed Arif commented on कंवर करतार's blog post कविता
"आदरणीय कँवर करतार जी आदाब,                                  बहुत ही बेहतरीन शरद ऋतु की आमद का वर्णन करता गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।"
Jan 9
Manoj kumar Ahsaas commented on कंवर करतार's blog post कविता
"बहुत अच्छी कविता हुई है आदरणीय  सादर बधाई"
Jan 8
कंवर करतार posted a blog post

कविता

शरद ऋतु गीतझम झम रिमझिम पावस बीता अब गीले पथ सब सूख गए गगन छोर सब सूने सूने परदेश मेघ जा बिसर गए हरियावल पर चुपके चुपकेपीताभा देखो पसर गई हौले हौले ठसक दिखा कर चंचल चलती पुरवाई है -लो! शरद ऋतु उतर आई है Iदशहरा, नवरात्र, दीवाली छठ, दे दे खुशियाँ बीत गए पक कट गए मकई बाजरा पीले पीले भी हुए धान रातें भी बढ़ कर हुईं लम्बी घटते घटते गए दिनमान विरहन का तन मन डोल रहा खुद खुद से ही कुछ बोल रहा-प्रियतम की चिट्ठी आई है -लो! शरद ऋतु उतर आई है Iप्रवासी पक्षी झीलों के तट अठखेलियाँ करते निराली जब…See More
Jan 8

Profile Information

Gender
Male
City State
Dharamshala Distt. Kangra HP
Native Place
Hamirpur(HP)
Profession
Retd. College Principal (HPHES)
About me
Reader of Hindi literature,compose poems in Hindi and Pahari languages,member of different cultural and social organisations.

ग़ज़ल

 

2122  2122   2122   212

 

मौज मस्ती चंद रोज आखिर जवानी फिर कहाँ I

दोस्तों में प्यार की वो ख़ुश-बयानी फिर कहाँ II

 

ख़्वाबों में बसता जो ऐसा यार-ए–जानी फिर कहाँ I

दिल में वो सोज़-ए–मुहब्बत की रवानी फिर कहाँ II

 

दिल के पुर्ज़े पुर्ज़े पर थी हो नुमायाँ अक्स जो ,

लिखने वाले लिख गये ऐसी कहानी फिर कहाँ I

 

फूल खिलकत के ले आए तोड़ हम उनके लिए ,

जाने उनकी कब मिलेगी मेज़बानी फिर कहाँ I

 

फिर मिलेंगे कब कहाँ जी भर के बातें कर लें हम ,

दौर-ए –उल्फ़त फिर कहाँ ये शादमानी फिर कहाँ I

 

आदमी हैं आदमी से काम कुछ तो कर चलें ,

ये जमाना फिर कहाँ ये जिंदगानी फिर कहाँ I

 

वो शराफ़त और नफ़ासत के हैं  पैकर बन गये ,

गालिवन उनकी सदाकत का भी सानी फिर कहाँ I

 

आ चमन में सुर्ख इक ‘कंवर’ लगाएं फूल हम ,

कुछ दिनों की जिन्दगी होगी निशानी फिर कहाँ I  

 

 "मौलिक एवं अप्रकाशित"

कंवर करतार's Blog

कविता

शरद ऋतु गीत

झम झम रिमझिम पावस बीता

अब गीले पथ सब सूख गए

गगन छोर सब सूने सूने

परदेश मेघ जा बिसर गए

हरियावल पर चुपके चुपके

पीताभा देखो पसर गई

हौले हौले ठसक दिखा कर

चंचल चलती पुरवाई है -

लो! शरद ऋतु उतर आई है I

दशहरा, नवरात्र, दीवाली

छठ, दे दे खुशियाँ बीत गए

पक कट गए मकई बाजरा

पीले पीले भी हुए धान

रातें भी बढ़ कर हुईं लम्बी

घटते घटते गए दिनमान

विरहन का तन मन डोल रहा

खुद खुद से ही कुछ बोल…

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Posted on January 8, 2018 at 10:00pm — 12 Comments

ग़ज़ल

212  212  212  212

सज सँवर अंजुमन में वो गर जाएँगे I

नूर परियों के चेहरे   उतर जाएँगे II

जाँ निसार अपनी  है तो उन्हीं पे सदा ,

वो कहेंगे जिधर  हम उधर जाएँगे I

ऐ ! हवा मत करो  ऐसी अठखेलियाँ ,

उनके चेहरे पे गेसू बिखर  जाएँगे I

 

पासवां कितने  बेदार हों हर तरफ ,

उनसे मिलने को हद से गुजर जाएँगे I

है मुहब्बत का तूफां जो दिल में भरा ,

उनकी नफ़रत के शर बे-असर जाएँगे I

बेरुखी उनकी…

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Posted on August 17, 2017 at 9:30pm — 8 Comments

ग़ज़ल

1222  1222  1222  1222

 

अगर तुम पूछते दिल से शिकायत और हो जाती I

सदा दी होती जो  तुमने  शरारत ओर हो जाती II

 

पहन कर के नकावें जिन पे बरसाते कोई पत्थर ,

वयां तुम करते दुख उनका हिमायत और हो जाती I

 

कहो जालिम जमाने क्यों मुहव्वत करने वालों पर?

अकेले सुवकने से ही कयामत और हो जाती I

 

बड़ा रहमो करम वाला है मुर्शिद जो मेरा यारो ,

पुकारा दिल से होता गर सदाकत और हो जाती I

 

मुझे तो होश में लाकर भी…

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Posted on August 15, 2017 at 10:21pm — 12 Comments

नन्हें दिल की जीत (लघु कथा)

“बेटे सुजित, कहाँ हो” शर्मा जी अपनी चाबी से मुख्य दरबाजा खोलते ही अंदर अँधेरा देख बोले Iआबाज लगाते लगाते ही घर की बत्तियाँ जलाने लगे Iज्यों ही बेटे वाले कमरे की बत्ती का बटन दबाया, कक्षा दो  में पढ़ने बाले बेटे को मोबाइल पर अपने नन्हें दोस्तों से व्हाट्स एप पर चैटिंग करते देख डांटते  हुए बोले, “हर समय बस चैटिंग-चैटिंग, कुच्छ होम वर्क कर लेते I उठो, जाओ अपना होम वर्क करो I”

     “आइ एम सॉरी पापा --” रुआंसा हुआ सुजित बोला, “ पर पापा --आप सुवह मेरे स्कूल जाने से पहले आफिस निकल जाते हो और…

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Posted on October 7, 2015 at 10:00pm — 6 Comments

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At 6:09pm on May 14, 2014, Admin said…

आभार आदरणीय ।

 
 
 

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