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शरद ऋतु गीत

झम झम रिमझिम पावस बीता
अब गीले पथ सब सूख गए
गगन छोर सब सूने सूने
परदेश मेघ जा बिसर गए
हरियावल पर चुपके चुपके
पीताभा देखो पसर गई
हौले हौले ठसक दिखा कर
चंचल चलती पुरवाई है -
लो! शरद ऋतु उतर आई है I

दशहरा, नवरात्र, दीवाली
छठ, दे दे खुशियाँ बीत गए
पक कट गए मकई बाजरा
पीले पीले भी हुए धान
रातें भी बढ़ कर हुईं लम्बी
घटते घटते गए दिनमान
विरहन का तन मन डोल रहा
खुद खुद से ही कुछ बोल रहा-
प्रियतम की चिट्ठी आई है -
लो! शरद ऋतु उतर आई है I

प्रवासी पक्षी झीलों के तट
अठखेलियाँ करते निराली
जब किलकारियां नभ गुँजातीं
गुमसुम हो देखें अली- आली
देशी परिंदे दुबके पकड़ें
पत्तों के झुरमुट में डाली
शीत निद्रा कुछ पे छाई है -
लो! शरद ऋतु उतर आई है I

बच्चे हों बूढ़े, ठुर-ठुर करते
ओस लगी जब दूब पे जमने
धूप के पीछे हर इक भागे
साँसों से भाप लगी उड़ने
पत्ते कुछ झड़ने को आतुर
गेहूं -ज्वारे बढ़ते तत्पर
धुंध ने जान अटकाई है -
लो! शरद ऋतु उतर आई है I

पर्वत बर्फ से लकदक सारे
लसित रजत से अजब नजारे
वितान श्वेताम्बर शंकु तरुवर
मानो कहते- हम कब हारे
अलाव भरता जीवन में रस
बढ़े कथा करे कोई न बस
दरिया की गति सुस्ताई है -
लो! शरद ऋतु उतर आई है I

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by कंवर करतार on January 11, 2018 at 9:47pm
बृजेश कुमार 'ब्रज जी आपका धन्यवाद I
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on January 10, 2018 at 10:12pm

बड़ी सुन्दर कविता हुई बधाई..

Comment by कंवर करतार on January 10, 2018 at 9:51pm

जनाब समर कबीर भाई ज़र्रानवाजी के लिए शुक्रिया I 

Comment by Samar kabeer on January 9, 2018 at 11:17pm

जनाब कंवर करतार जी आदाब,इस रचना पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by कंवर करतार on January 9, 2018 at 10:11pm

भाई मनोज एहसास जी आपका हृदय से आभार I

Comment by कंवर करतार on January 9, 2018 at 10:09pm

मोहमद आरिफ भाई ,आपका आभार I

Comment by कंवर करतार on January 9, 2018 at 10:08pm

भाई मोहित मिश्रा जी हौसला आफसाई के लिए तहे दिल से शुक्रिया I 

Comment by कंवर करतार on January 9, 2018 at 10:06pm

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप जी रचना अछि लगी बहुत बहुत धन्यवादI 

Comment by नाथ सोनांचली on January 9, 2018 at 11:30am

आद0 कंवर करतार जी सादर अभिवादन। बढ़िया लिखा आपने, बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति पर।

Comment by Mohammed Arif on January 9, 2018 at 7:43am

आदरणीय कँवर करतार जी आदाब,

                                 बहुत ही बेहतरीन शरद ऋतु की आमद का वर्णन करता गीत । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

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