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मरा था मैं तड़प कर वो जमाना भी भुला देना
बसाया था तुझे दिल में फसाना भी भुला देना

जले खुद थे चरागो से बचाया था तुझे हमने
नहीं ये राह फूलो की बताना भी भुला देना

सहे है दर्द हम कितने पता हो तो जरा बोलो
छुपा कर दर्द मेरा  मुस्‍कुराना भी भुला देना

निगााहो में बसाया था तुझे आखे बनाया था
चली जो छोड़ कर अाँसू बहाना भी भुला देना


उड़े आंचल तुम्‍हारे थे सभाला था हवाओं से
कहा था कुछ हवाओं ने बताना भी भुला देना

मौलिक एवं अप्रकाशित

अखंड गहमरी गहमर गाजीपुर

Views: 875

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Comment by Akhand Gahmari on August 2, 2014 at 10:11am

सर्व प्रथम मैं देरी के लिये क्षमा चाहता हूँ मैं बाबा बरफानी के दर्शन के लिये गया हुआ था। हम आपके उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्‍वीकार करे आदरणीय गिरिराज भंडारी जी आज जो कुछ भी हूँ आप सब की मेहनत का फल है आशीवाद बनाये रख्‍ेा।

Comment by Akhand Gahmari on August 2, 2014 at 10:10am

सर्व प्रथम मैं देरी के लिये क्षमा चाहता हूँ मैं बाबा बरफानी के दर्शन के लिये गया हुआ था। हम आपके उत्‍साहवर्धन एवं मार्गदर्शन के सदैव आकांक्षी है मेरा प्रणाम स्‍वीकार करे आदरणीय लक्ष्‍मण प्रसाद लाडीवाल जी

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 24, 2014 at 6:25pm

उम्दा भाव लिए सुंदर गजल  श्री अखंड गहमरी जी | -


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 24, 2014 at 2:39pm

आदरणीय अखण्ड भाई , बहुत ही लाजवाब गज़ल कही है । हर शे र खूब सूरत हैं , पूरी ग़ज़ल के लिये मेरी दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ॥

कहींं कहीं टँकण की त्रुटियाँ हैं , सुधार लीजियेगा ॥

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 23, 2014 at 10:50pm
सुन्दर रचना , बधाई .
Comment by Shyam Narain Verma on July 23, 2014 at 4:55pm
सुंदर भावों की सुंदर गजल   … हार्दिक बधाई आदरणीय.....
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 23, 2014 at 11:08am

बहुत खूबसूरत गजल , आदरणीय भाई अखंड जी. दिली बधाइयाँ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 22, 2014 at 3:35pm

आपके कहे में अब गहनता आने लगी है, भाई अखण्ड जी.

इस प्रयास के लिए दिल से बधाई लें .. .

शुभ-शुभ

Comment by ARVIND KUMAR PATHAK on July 22, 2014 at 1:11pm

bahut

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 22, 2014 at 11:22am

बहुत खूब गहमरी जी

उड़े आंचल तुम्‍हारे थे सभाला था हवाओं से
कहा था कुछ हवाओं ने बताना भी भुला देना

कृपया ध्यान दे...

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