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ग़ज़ल (अजय अज्ञात)

करें हम हमेशा ही उनकी इबादत 
ये जीवन हमारा है जिनकी बदौलत... 


नहीं कोई सानी है माता पिता का
यकीनन ये करते हैं दिल से मुहब्बत... 


चरण छू लो इनके, मिलेंगी दुआएं 
इन्हें देखने भर से होती जियारत ... 


सही मायने में यही देवता हैं 
यही पूरी करते हमारी ज़रूरत ...


हमेशा कलेजे से रखते लगाए
बलाओं से करते हमारी हिफाज़त ...


ये उंगली पकड़ हम को चलना सिखाते
पिलाते हैं घुट्टी में हम को सदाकत .... 


न माता पिता का कभी दिल दुखाना 
इन्हीं की दुआओं से हम हैं सलामत ....


यहीं लुत्फ मिलता है जीवन का यारो 
कि अज्ञात कदमों में इनके है जन्नत ...

.

मौलिक व अप्रकाशित ...

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Comment

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Comment by Ajay Agyat on April 9, 2014 at 7:29pm

सभी मित्रों का हृदय से आभार ... 

Comment by वीनस केसरी on January 20, 2014 at 3:40am

इस मुसल्सल ग़ज़ल के लिए ढेरो मुबारकबाद


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on January 14, 2014 at 11:22pm

अच्छी मुसलसल ग़ज़ल के लिए बधाई अजय अज्ञात भाईजी.

आदरणीय, आप तो एक दम से छुपे रुस्तम ही हो गये हैं, हलद्वानी कार्यक्रम के बाद से .. .

सादर

Comment by ram shiromani pathak on January 14, 2014 at 9:41pm

सुंदर  ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय बधाई स्वीकारें.

Comment by MAHIMA SHREE on January 13, 2014 at 10:08pm

बहुत ही खुबसूरत गजल ..बधाई आपको सादर

Comment by Dr Ashutosh Mishra on January 13, 2014 at 1:05pm

आदरणीय ..जीवन नीति को दर्शाते शानदार अशार ..बेहतरीन रचना के लिए तहे दिल बधाई ..सादर न माता पिता का कभी दिल दुखाना 
इन्हीं की दुआओं से हम हैं सलामत ....

सही मायने में यही देवता हैं 
यही पूरी करते हमारी ज़रूरत ...

 ये शेर मुझे बेहद पसंद आये 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 13, 2014 at 11:03am

बेहद खूबसूरत ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय बधाई स्वीकारें.

Comment by बृजेश नीरज on January 12, 2014 at 10:55pm

बहुत अच्छी संदेशपरक रचना! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by Abhinav Arun on January 11, 2014 at 2:57pm

हर शेर सीख दे रहा है  आदरणीय अजय जी। .बहुत खूब !!

Comment by ajay sharma on January 10, 2014 at 10:55pm

isi mauzu  ke apne do sher yaad aa rahe hain .......

उनकी याद भी आये , तो आये कैसे
घरों में कोई चीज़ें पुरानी हैं कहाँ अब

घरों में वो दादी , नानी ,  हैं कहाँ अब
सपनों में वो राजा रानी हैं कहाँ अब.

teek kaha apne , 

न माता पिता का कभी दिल दुखाना 
इन्हीं की दुआओं से हम हैं सलामत ....

ishwar sabhi ko ye samjh de ..............

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