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कुंडलियाँ छंद-लक्ष्मण लडीवाला

 मधुशाला खुलती गयी, विद्यालय के पास,  

आजादी जब से मिली, ऐसा हुआ विकास |

ऐसा हुआ विकास, मिले शराब के ठेके

आय करे सरकार, नेता रोटियाँ सेकें

शिक्षा पर हो ध्यान, उन्नत हो पाठशाला

शिक्षालय के पास, हो न कोई मधुशाला |

(२)

रंगत बदले मनुज अब, गिरगिट भी शर्माय   

गिरगिट पुनर्जन्म धरे, नेता बनकर आय |

नेता बनकर आय, क्षमता और बढ़ जावे

पेटू बनकर खाय, खाकर डकार न लावे     

ईश्वर करे सहाय, पाये न इनकी संगत,

सूझे न कछु उपाय,बदलते झट से रंगत |

.

(मौलिक व् अप्रकाशित)

-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 6, 2013 at 12:26pm

छंद की सार्थकता बताने और गेयता सम्बन्धी सुझावे के लिए आपक हार्दिक आभार डॉ प्राची सिंह जी 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 6, 2013 at 9:57am

आदरणीय लक्ष्मण सर जी बेहद सुन्दर कुण्डलिया छंद वर्तमान परिस्थिति से रूबरू करवाती लाजवाब कुण्डलिया छंद हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

रंगत बदले मनुज अब, गिरगिट भी शर्माय   

गिरगिट पुनर्जन्म धरे, नेता बनकर आय | .. वाह कितना सुन्दर एवं सटीक व्यंग कसा है आपने.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 6, 2013 at 9:34am

आपका हार्दिक् आभार भाई श्री अरुण कुमार निगम जी, एवं राज बुन्देली जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 6, 2013 at 9:33am

कुंडलिया छंद के माध्यम से सामाजिक बुराई पर व्यंग ही मकसद होता है, आपकी सराहना के लिए हार्दिक आभार स्वीकारे

आदरणीया अन्नपूर्णा वाजपेयी जी, गीतिका "वेदिका"जी, एवं विनितिया शुक्ला जी  

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 6, 2013 at 9:27am

छंद पसंद कर सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार श्री जीतेन्द्र गीत जी 

Comment by बृजेश नीरज on August 5, 2013 at 10:03pm

आपके इस प्रयास पर आपको हार्दिक बधाई!

Comment by MAHIMA SHREE on August 5, 2013 at 9:53pm

रंगत बदले मनुज अब, गिरगिट भी शर्माय   

गिरगिट पुनर्जन्म धरे, नेता बनकर आय |

नेता बनकर आय, क्षमता और बढ़ जावे

पेटू बनकर खाय, खाकर डकार न लावे  .... वाह आदरणीय बहुत ही बढ़िया ... बधाई स्वीकार करें    

Comment by कवि - राज बुन्दॆली on August 5, 2013 at 9:19pm

वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह शानदार कुंडलियाँ छंद- बधाई सर जी,,,,,,,,,


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 5, 2013 at 9:18pm

आदरणीय लक्ष्मण जी 

सामाजिक मुद्दों पर सुन्दर कुंडलिया रची हैं..

शब्द संयोजन व गेयता पर भी अब ध्यान देते चलें.

सादर शुभकामनाएँ 

Comment by Vinita Shukla on August 5, 2013 at 9:13pm

व्यवस्था पर सुंदर कटाक्ष! बधाई आदरणीय.

कृपया ध्यान दे...

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