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!!!-ः दोहे:-!!!

पानी - पानी हो रही, लोकतंत्र सरकार।
हर क्षेत्र में असफल है, देश विदेश करार।।1

पानी नकसिर चढ़ गया, लोक तंत्र बेहाल।
जल संसाधन लूटता, बोतल भर कर माल।।2

जल संकट से घिर गया, अब यह पृथ्वी लोक।
जन मन रंजन कर रहा, नहि भविष्य का शोक।।3

सुबह बाल रवि तेज है, प्रखर प्रचण्डहि धूप।
सलिल अंबु जीवन लिए, मिलते नहि नल कूप।।4

जल ही जीवन जान लें, नीर वारि पय तोय।
पानी बिना सृष्टि नहीं, धरा हवा नभ कोय।।5

जीवन जलधि शरीर है, प्राण हुए चैतन्य।
श्वांस सधे तन साधना, नीर पिए मूर्धन्य।।6

पानी जैसा होइए, कोरा रंग दिखाय।
जाति धरम कुल वर्ण में, सतरंगी हो जाय।।7

के0पी0सत्यम/ मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Shyam Narain Verma on June 19, 2013 at 10:21am
इस प्रस्तुति हेतु बहुत-बहुत बधाई व शुभकामनाएँ...........................
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 18, 2013 at 6:36pm

आ0 मंजरी जी,  आपके स्नेह और उत्साहवर्धन से मेरा मान बढ़ गया। आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by mrs manjari pandey on June 18, 2013 at 12:41pm

 आदरणीय केवल प्रसाद जी , आपने पानी पानी ही कर दिय. बधाई इस सामायिक चित्रण के लिए

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 17, 2013 at 9:41pm

आ0  कुन्ती मैम जी,  स्नेह व उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 17, 2013 at 9:40pm

आ0  विजय सर जी,  उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 17, 2013 at 9:39pm

आ0  राजेश भाई जी,  उत्साहवर्धन हेतु आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by राजेश 'मृदु' on June 17, 2013 at 1:35pm

बहुत ही बढि़या

जीवन जलधि शरीर है, प्राण हुए चैतन्य।
श्वांस सधे तन साधना, नीर पिए मूर्धन्य।।6

पानी जैसा होइए, कोरा रंग दिखाय।
जाति धरम कुल वर्ण में, सतरंगी हो जाय।।

ये दोनों तो बहुत-बहुत अच्‍छे लगे

Comment by विजय मिश्र on June 17, 2013 at 1:13pm
राजनीतिज्ञों में आज की सत्तालोलुपता और मानसिक पतन को चेताती एक सुन्दर कविता. बधाई केवलजी .
Comment by coontee mukerji on June 16, 2013 at 5:41pm

राजनेतिक  स्थिति को उजाकर करते बहुत ही सुंदर व सटीक दोहे / सादर / कुंती

कृपया ध्यान दे...

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