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वैदेही सोच रही मन में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते !!

वैदेही सोच रही मन में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते 
लव-कुश की बाल -लीलाओं का आनंद प्रभु संग में लेते .

जब प्रभु बुलाते लव -कुश को आओ पुत्रों समीप जरा ,
घुटने के बल चलकर जाते हर्षित हो जाता ह्रदय मेरा ,
फैलाकर बांहों का घेरा लव-कुश को गोद उठा लेते !
वैदेही सोच रही मन में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते !!

ले पकड़ प्रभु की ऊँगली जब लव-कुश चलते धीरे -धीरे ,
किलकारी दोनों की सुनकर मुस्कान अधर आती मेरे ,
पर अब ये दिवास्वप्न है बस रोके आंसू बहते-बहते .
वैदेही सोच रही मन में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते !!

लव-कुश को लाकर उर समीप दोनों का माथा लिया चूम ,
तुम केवल वैदेही -सुत हो ; जाना पुत्रों न कभी भूल ,
नारी को मान सदा देना कह गयी सिया कहते -कहते . 
वैदेही सोच रही मन में यदि प्रभु यहाँ मेरे होते !! 

शिखा कौशिक 'नूतन '

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Comment by shikha kaushik on November 6, 2012 at 11:39pm

laxman ji ,shalini ji ,ravikar ji v arun ji -aap sabhi ka hardik aabhar tippani hetu .

Comment by Arun Sri on November 6, 2012 at 12:48pm

देवी सीता को माध्यम बनाकर एक स्त्री और एक माँ के उद्गारों को  बहुत ही सुन्दर तरीके से शब्द दिए है आपने ! वाह ! बहुत ही सुन्दर और हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति !

Comment by रविकर on November 5, 2012 at 11:06am

शुभकामनायें बहन शालिनी -
बहना बांटे दर्द है, जिनके पति हैं दूर |
एकल माता बन करे, फर्ज हमेशा पूर ||

Comment by shalini kaushik on November 4, 2012 at 2:50pm
bahut bhavpoorn abhivyakti .
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 4, 2012 at 12:46pm

नारी और वह भी माँ, विरह में क्या क्या भाव मन में लाती होगी, इसकी सुन्दर अभ्व्यक्ति 

बधाई शिखा कौशिक जी 
Comment by shikha kaushik on November 4, 2012 at 12:17pm
rajesh ji ,ganesh ji v seema ji -aapki tippani sadaiv protsahit karti hain .ye anmol hain .aabhar
Comment by seema agrawal on November 4, 2012 at 10:37am

माँ और पत्नी दोनों के विशेष परिस्थितिजन्य मनोभावों का सम्यक चित्रण 

बधाई शिखा जी 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 4, 2012 at 10:22am

शिखा जी, रामायण के किसी एक प्रसंग को लेकर उसपर मार्मिक कविता रचना, बहुत ही उम्दा है, बधाई स्वीकार करें |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 4, 2012 at 9:57am

बहुत सुन्दर बहुत प्यारे, ममत्व  भाव से परिपूर्ण  रचना हेतु बहुत बहुत बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

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