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वो कौन है जिसकी याद सताती है हमें||

वो कौन है जिसकी याद सताती है हमें|
न जाने किस तरफ ये रोज बुलाती है हमें||

खोजता हूँ मै उसे मिलती नहीं वो मुझको|
रात को लेकिन चुपके से जगाती है हमें||

कहीं मिले जो कभी मुझसे साफ़ कह दूँ मैं|
की कौन है और ऐसे सताती है हमें||

देर तक तन्हा बैठ कर के यूँ ही सोचते हैं|
फिर याद उसकी जमीं महफ़िल में लाती है हमें||

फूल के जैसे खिल के वो मेरे सिने में|
साथ हूँ इसका एहसास कराती है हमें||

एक अनजान सहारा सी बन गयी है वो|
अश्क जब आँखों में आये तो हसाती है हमें||

दूर होती नहीं मुझसे एक पल खातिर|
हर घडी बन के हवा छूकर जाती है हमें||

न जाने किस तरफ ये रोज बुलाती है हमें|
वो कौन है जिसकी याद सताती है हमें||

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Comment by आशीष यादव on November 25, 2010 at 12:29am
hausala aafjai ke liye aap logo ko dhanywaad,
Comment by Anupama on November 2, 2010 at 10:38pm
bhaavpoorna rachna!
Comment by Raju on October 25, 2010 at 7:49pm
bahut hi sunder Aashish bhai.
Comment by Dr.Brijesh Kumar Tripathi on October 13, 2010 at 10:11pm
फूल के जैसे खिल के वो मेरे सिने में|
साथ हूँ इसका एहसास कराती है हमें||

badhiya aasar ...sundar khayal ,ek ek pankti gudgudati hai
Comment by Julie on October 11, 2010 at 11:36pm
दूर होती नहीं मुझसे एक पल खातिर|
हर घडी बन के हवा छूकर जाती है हमें||

वाह बहुत सुंदर लिखा है आपने... आशीष जी... बधाई...!!
Comment by Pooja Singh on October 11, 2010 at 9:39pm
दूर होती नहीं मुझसे एक पल खातिर|
हर घडी बन के हवा छूकर जाती है हमें||
सुंदर भावनावो सहित बेहतरीन अभिव्यकि है |
Comment by आशीष यादव on October 11, 2010 at 9:09pm
Anupama ji aur Hilal ji dhanyawad
Comment by Hilal Badayuni on October 11, 2010 at 6:56pm
behtar hai aashish sahab
Comment by Anupama on October 11, 2010 at 6:08pm
rachna sundar kalpanaon ka ehsaas karati hai!
shubhkamnayen!
Comment by आशीष यादव on October 11, 2010 at 5:48pm
satish ji dhanyawaad

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