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अरबों माल डकार के

अरबों माल डकार के राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है लूट सके तो लूट।।

निकले जब वो जेल से यूँ दिखलाया रंग।
अभिवादन थे कर रहे जीत लिया ज्यों जंग।।

बाहर आकर वायु मे चुम्बन रहे उछाल।
इतने घृणीत कर्म का कोई नही मलाल।।

हर्षित चेलाराम के जमीं न पड़ते पाँव।
बेशरमी रख ताख पे खुश हो करते काँव।।

झिंगुर घुरवा से कहे "जितबे तुहीं चुनाव।
कट्टा पिस्टल साथ हैं डर जइहैं सब गाँव"।।

  • आशीष यादव

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 17, 2012 at 6:34pm
प्रिय आशीष जी, सस्नेह 
यथार्त का काव्यात्मक चित्रण. अच्छा लगा. बधाई.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 17, 2012 at 5:47pm

अरबों माल डकार के  राजा जी गै छूट।
जनहित में संदेश है  लूट सके तो लूट।।............   और आपने नैदान मार लिया, आशीष भाई.

सामयिक तथ्यों पर सुन्दर प्रयास.

Comment by Rekha Joshi on May 17, 2012 at 4:41pm

बाहर आकर वायु मे  चुम्बन रहे उछाल।

इतने घृणीत कर्म का  कोई नही मलाल।।आशीष जी बढ़िया दोहे ,बधाई 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 17, 2012 at 3:46pm

बहुत लाजवाब दोहावली कही है भाई आशीष यादव जी, बधाई।

Comment by आशीष यादव on May 17, 2012 at 12:34pm

आदरणीया rajesh kumari दी, aapko दोहे पसन्द आये मेरा श्रम सार्थक हुआ।
आपको सादर धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 17, 2012 at 12:13pm

आशीष जी बहुत सामायिक लाजबाब दोहे इन जबरदस्त दोहों के लिए मेरी मुबारकबाद स्वीकार कर्रें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 17, 2012 at 12:12pm

 आशीष जी बहुत सामायिक लाजबाब दोहे इन जबरदस्त दोहों के लिए मेरी मुबारकबाद स्वीकार कर्रें 

Comment by आशीष यादव on May 17, 2012 at 12:10pm

आदरणीय श्री SANDEEP KUMAR PATEL जी, आदरणीय श्री Bhawesh Rajpal जी, आदरणीय श्री SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" जी  एवँ आदरणीय श्री डॉ. सूर्या बाली "सूरज" जी, दोहे पसन्द करने हेतु आप लोगों को बहुत-बहुत धन्यवाद.

आज की गन्दी राजनीति में किसका भरोसा करें समझ मे ही नही आता। आज राजा जैसे लोग भी छूट जा रहे हैं और तो और बाहर आकर ऐसा दिखा रहे हैं जैसे युद्ध जीत लिया हो।

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on May 17, 2012 at 11:54am

आशीष जी बहुत सी समसामयिक , साहित्यिक , भावपूर्ण रचना .....इन दोहों ने तो आज की सच्चाई बयान कर दी । बहुत बहुत बधाई !!

Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on May 17, 2012 at 11:49am

wah aashish ji bahut khoob kya manzar kashi ki hai apne ..................behtreen kakam hai badhayi kubool karein

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