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मजदूर दिवस पर विशेष 

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मजदूर दिवस बहुत बड़ी ख़ुशी लेकर आया था. आज मजदूरों के सामने मालिकों को झुकना ही पड़ा था. अन्य सुविधायों के अतिरिक्त मजदूरों की रोजाना दिहाड़ी बढ़ा दी गई उन्हें ओवरटाईम तथा बढ़ा हुआ बोनस देने की घोषणा भी कर दी गई. मजदूर बस्ती में हर तरफ ख़ुशी का माहौल था, अपनी मांगें पूरी होने की ख़ुशी में जहाँ मजदूर मंदिरों जाकर भगवान को धन्यवाद दे रहे थे, वहीँ दूसरी तरफ मजदूर यूनियन के कुछ नेता मालिकों के घर दावत उड़ा रहे थे, क्योंकि एक बात मजदूरों से छुपाई गई थी कि अगले छ: महीनों में २० प्रतिशत मजदूरों की छंटनी कर दी जाएगी.  


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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 4, 2012 at 12:07pm

सादर आभार आदरणीय सौरभ भाई जी.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 4, 2012 at 12:07pm

लघुकथा पसंद करने के लिए सादर आभार राजेश कुमारी जी. 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on May 3, 2012 at 9:51pm

सशक्त लेखनी से निकली एक तीखी रचना। सचमुच आज का यही सत्य है। अंततः मरता मजदूर ही है। बधाई स्वीकारें

Comment by MAHIMA SHREE on May 3, 2012 at 9:12pm
आदरणीय योगराज सर ,
सादर नमस्कार ..
मजदूरो के मज़बूरी का फायदा उठाने में  मजदूरो के तथाकथित नेता भी उठाने से नहीं चुकते ...
बधाई स्वीकार करें  
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on May 3, 2012 at 7:47pm

सामयिक यथार्थपरक कथा है आपकी! घर के भेदी हर युग में रहे हैं| हार्दिक बधाई आदरणीय अग्रज!

Comment by वीनस केसरी on May 2, 2012 at 11:29pm

श्रमिक वर्ग के जीवन अंश का सुंदर रेखांकन
सार्थक लघुकथा के लिए बधाई


Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 1:27pm

aadarniya pradhan sampadak ji, saadar abhivaadan. 

padha shuru kiya, jiggyasa badhi. aur ant, kya kahna. yahi sacchai hai neta ki aur majdoor ki. 

jara si khushi main ham jashn manate hain

mansha apne rahnumaon ki pahchan na pate hain

badhai sir ji. ipl ki mauj lagti hai rachna main.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 2, 2012 at 9:51am

नेता चाहे देश का हो या संगठन / यूनियन का , बस मौका की तलाश में होता है , जहाँ देखा मौका वाही लगाये चौका, बहुत ही जानदार लघु कथा है आदरणीय प्रधान संपादक जी , बहुत बहुत बधाई |

Comment by Bhawesh Rajpal on May 1, 2012 at 4:10pm

What a dirty game hiding behind promises.

Regards.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 1, 2012 at 3:22pm

यानि लेदे के ’बेतलवा’ उसी डाल पर !  आपकी लघुकथा सही जगह पर सटीक प्रहार करती है.

बधाई स्वीकार करें आदरणीय.

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